बोध और अवबोध
हिंदी कविताबोध और अवबोध बोध और अवबोधजान लेना हीदेख लेना नहीं होता।सूचनायेंआँख नहीं खोलती,केवल स्मृति भरती है।यही भ्रमजीवन भर चलता रहता है। तथ्य बताए गए,पर भीतर कुछ नहीं हिला।कहा गया—यह ठीक है,यह गलत है।दिमाग नेसहमति दे दी,जीवन वैसा ही रहाजस का तस। आग का वर्णनहाथ नहीं जलाता।जब तक तापस्वयं को न छुए,सावधानीकेवल एक विचार तक रहती






