प्रीत के रंग में-राजेश पाण्डेय *अब्र*
हिंदी कविताप्रीत के रंग में गुनगुनाती हैं हवाएँमहमहाती हैं फ़िजाएँझूम उठता है गगन फिरखुश हुई हैं हर दिशाएँ प्रीत के रंग में मीत के संग में, रुत बदलती है यहाँ फिरफूल खिल उठते अचानकगीत बसते हैं लबों परमीत मिल जाते […]
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