सर्वोत्तम शाकाहार/ सोनाली भारती
प्रकृति और पर्यावरणसर्वोत्तम शाकाहार/ सोनाली भारती मानव को पता है क्या अपना आहार –जीव चेतना से ही क्यों अब भी इतना प्यार!नियति विधि से नियंत्रण हेतु संयत होते शिकार,संतुलित है इससे पशु पक्षी का संसार।रसना के वशीभूत मूक जीवों का संहार?क्रूर आस्वादन का हिंसक ये व्यापार।मानवता हो मौन;हो जाए शर्मसार!भोजन का भाव से जुड़ता है तार,जैसा हो […]
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