कोरोना पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना
Uncategorizedकोरोना पर कविता कोरोना फिरि फैलि रहो है, बाने देखौ केते मारेकाम नाय कछु होय फिरउ तौ, निकरंगे घरि से बहिरारे। मुँह पै कपड़ा नाय लगाबैं, केते होंय रोड पै ठाड़ेबखरिन मै मन नाय लगत है, घरि से निकरे काम बिगाड़े जाय किसउ की फसल उखाड़ैं, खेतन कौ बे खूब उजाड़ैंकोऊ उनसे नाय कछु कहै, […]
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