कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

कोरोना पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना

Uncategorized

कोरोना पर कविता कोरोना फिरि फैलि रहो है, बाने देखौ केते मारेकाम नाय कछु होय फिरउ तौ, निकरंगे घरि से बहिरारे। मुँह पै कपड़ा नाय लगाबैं, केते होंय रोड पै ठाड़ेबखरिन मै मन नाय लगत है, घरि से निकरे काम बिगाड़े जाय किसउ की फसल उखाड़ैं, खेतन कौ बे खूब उजाड़ैंकोऊ उनसे नाय कछु कहै, […]

कोरोना पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना Read More »

atal bihari bajpei

अटल बिहारी वाजपेई जी पर कविता

हिंदी कविता

अटल बिहारी वाजपेई जी पर कविता 25 दिसंबर,1924 को, ग्वालियर की पवित्र भूमि पर,एक दिव्य पुत्र ने जन्म लिया। धन्य हुई भारत की धरती, भारतरत्न जो आए थे। राजनीति के प्रखर प्रवक्ता, भारतरत्न से सम्मानित थे,हिंदी कवि और पत्रकार के रूप में भी वो जाने जाते हैं।चार दशक तक राजनीति में जो सक्रिय भूमिका निभाए

अटल बिहारी वाजपेई जी पर कविता Read More »

doha sangrah

तुलसी पूजा पर दोहा – हरीश बिष्ठ

हिंदी कविता

तुलसी पूजा पर दोहा देवलोक से देवता, करते नित्य प्रणाम |तुलसी का जग में सदा, सबसे ऊँचा नाम || जिस घर में तुलसी रहे, रोग रहें सब दूर |उस घर में आती सदा, खुशहाली भरपूर || तुलसी घर में लाइए, करिये रोज प्रयोग |स्वस्थ रहे तन-मन सदा, दूर रहे सब रोग || तुलसी को पूजें

तुलसी पूजा पर दोहा – हरीश बिष्ठ Read More »

atal bihari bajpei

भारत रत्न अटल जी जन्मदिन पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

भारत रत्न अटल जी जन्मदिन पर कविता भारत के प्रधानमंत्री बनकर थे दुनिया में छाएराजधर्म के अटल प्रणेता, अटल बिहारी जी कहलाए।💐💐सन् उन्निस सौ चौबीस में,पच्चीस दिसंबर का दिन आयाकृष्ण बिहारी जी के घर में, लिया जन्म सबका मन भायामूल निवास बटेश्वर में था, जुड़े ग्वालियर से वे इतनेलिख डालीं ऐसी कविताएँ, भाव-विभोर हुए थे

भारत रत्न अटल जी जन्मदिन पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना Read More »

राष्ट्रीय सेवा योजना पर कविता (NSS Poem in Hindi)- अकिल खान

समाज और यथार्थ

nss poem in hindi -राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) भारत सरकार, युवा मामलों और खेल मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसे औपचारिक रूप से 24 सितंबर, 1969 को शुरू किया गया था। यह ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के छात्र युवाओं और स्कूलों के छात्र युवाओं को अवसर प्रदान करता है। राष्ट्रीय सेवा योजना पर कविता

राष्ट्रीय सेवा योजना पर कविता (NSS Poem in Hindi)- अकिल खान Read More »

माँ शारदे पर कविता

हिंदी कविता

माँ शारदे पर कविता (देव घनाक्षरी) नमन मात शारदेअज्ञानता से तार देकरुणा की धार बहामुख में दो ज्ञान कवल।। वीणा पुस्तकधारिणीभारती ब्रह्मचारिणीशब्दों में शक्ति भरदोवाणी में दो शब्द नवल।। हंस की सवारी करेतमस अज्ञान हरेरोशन जहान करेपहने माँं वस्त्र धवल।। अज्ञानी है माता हमकरिए दोषों को शमज्ञान का दान कर दोबढ़ जाएगा बुद्धि बल।। ✍️

माँ शारदे पर कविता Read More »

मैं भी सांता क्लाॅज

हिंदी कविता

मैं भी सांता क्लॉज क्रिसमस डे को सुबह सवेरे मैं भी निकला बन ठन कर सांता क्लॉज के कपड़े पहन चलने लगा झूम झूम कर पीठ पर लिया बड़ा सा थैला खिलौने रख लिए भर भर कर लंबी दाढ़ी पर हाथ फेरते मैं चला बच्चों की डगर पहुँचा क्रिसमस पार्टी में जब बच्चों की तैयारी

मैं भी सांता क्लाॅज Read More »

पैसों के आगे सब पराया

हिंदी कविता

मुश्किल समय में नहीं आता है; अपने ही अपनो के काम होगा। आगे चलकर भुगतना पड़ता है; ऊँचे से ऊँचे मोल का दाम होगा।1। मोल पैसों का नहीं संस्कार का है; प्यार से करो बात मन में जगता आस। माता-पिता और गुरु से मिले जो संस्कार; कभी ना खोना धैर्य मन में रखो विश्वास।2। मुश्किल

पैसों के आगे सब पराया Read More »

जिम्मेदारी पर कविता

हिंदी कविता

कविता-जिम्मेदारियां जिम्मेदारियां एक बोझ है ढोने वाले पर लद जाते हैं, ना ढोने वाले को नासमझ/ नालायक/ आवारा लोग कह जाते हैं, जिम्मेदारियां, जीवन का एक पहलू है बिना जिम्मेदारी के जीवन जानवर का बन जाते हैं , जिम्मेदारियों से घबड़ाना/ चिल्लाना/ कभी नहीं परेशानियां तो इनके संग ही आते हैं, जिम्मेदारियों से अपनो में

जिम्मेदारी पर कविता Read More »

वक्त पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

वक्त पर कविता पलटी खाता वक्त बेवक्त, मुंह बिचका के चिढ़ाता है। किया धरा पानी फिराता, वक्त ओंधे मुंह गिराता है।। सगा नहीं किसी का वक्त, हर वक्त चलता रहता है। कभी धूप कभी छांव सा, स्वरूप बदलता रहता है।। कच्ची धूप ओस की बूंद, प्रकृति को निहलाती है। तेज़ धूप झुलसाती तपन, अंत में

वक्त पर कविता Read More »

जीवन का पथ

हिंदी कविता

जीवन का पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना समय बिताना लक्ष्य तभी जब ना पाओगे मलते हाथ ही रह जाओगे सुख दु:ख दोनों मिलते पथ में संग चले जीवन

जीवन का पथ Read More »

चली चली रे रेलगाड़ी

हिंदी कविता

चली चली रे रेलगाड़ी छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक झटपट बना ली गाड़ी चली चली रे देखो चली रेलगाड़ी रेलगाड़ी देखो बच्चों की निकली सवारी देखो बच्चों की निकली सवारी लपेट लपेट ऐसा मोड़ा दोनों पल्लू साथ में जोड़ा देखो रस्सी बन गई साड़ी चली चली रे देखो चली रेलगाड़ी रेलगाड़ी देखो

चली चली रे रेलगाड़ी Read More »

Scroll to Top