कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

दिल का पैगाम

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दिल का पैगाम भेज रहा हूँ पैगाम तुझको आँखें मिलाकर आँखों से चेहरा पढ़कर महसूस कर ले जो समझा न सके अपनी बातों से ना समझना इसे कोरा कागज ना तौलना इसे लहू के नातों से है पैगाम हमारा वफा-ए-इश्क जो लिखा है दिल के जज्बातों से इसमें लगी है प्यार की स्याही पैगाम भरा […]

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एक मुस्कान

हिंदी कविता

एक मुस्कान मनुजता शूचिता शुभता,खुशियों की पहचान होती है। जहाँ बिटिया के मुखड़े पर,धवल मुस्कान होती है। इसी बिटिया से ही खुशियाँ,सतत उत्थान होती है। जहाँ बिटिया के मुखड़े,पर धवल मुस्कान होती है। सदन में हर्ष था उस दिन,सुता जिस दिन पधारी थी। दिया जिसने पिता का नाम,यह बिटिया दुलारी थी। महा लक्ष्मी यही बेटी,यही

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लक्ष्य पर कविता

हिंदी कविता

लक्ष्य पर कविता लक्ष्य बना लो जीवन का तुम फिर सपने बुनना सीखो छोड़ सहारा और किसी का खुद पथ पर चलना सीखो लक्ष्य नहीं फिर जीवन कैसा? व्यर्थ यहां जीना तेरा साध लक्ष्य जीवन का अपने चल पथ का चीर अधेरा लक्ष्य बिना ना मंजिल मिलती न मिलता जीवन आधार पशु मानव में फिर

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महिमा वीर नारायण के

हिंदी कविता

महिमा वीर नारायण के महिमा वीर नारायण के ये,जे भुइँया म भारी जी। सोनाखान हवय हमरो ,बलिदानी के चिन्हारी जी। जन-जन के हितवा बनके,जे बेटा बिताईन जी। धन के लोभी छलिया मन ल,निसदिन यही सताइन जी। माल खजाना लूट लूट के, निर्धन मन ल दान करे। भांज अपन तलवार ल मेंछा,म साहस के ताव भरे।

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तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना रे सुवाना

हिंदी कविता

तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना रे सुवाना।पिया ला सुना देबे मोर गाना तरी हरी नाना। बेर उथे फेर , बेरा जुड़ाथे,रातके मोरे नीदियां उड़ाथे,अतक मया, मय काबर करेंजतक करें ओतक तरसाथे।डाहर बैरी के देखत सुवानाजान डारिस सारा जमाना।तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना रे सुवाना।

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गौ सिरतोन ईमान

हिंदी कविता

गौ सिरतोन ईमान जबले मारे गोरी नैइना के बान। जीना मोर होगे कठिन हो गय परेशान । (गौ सिरतोन ईमान) x 2 ले गय मोर जान गौ सिरतोन ईमान. मय नइ आये पाछु ,सुनले बेईमान । मया करे बर तय हो गय अघुआन । (गौ सिरतोन ईमान) x 2 ले गय मोर जान गौ सिरतोन

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मोला मया हे तोर से बड़ रे

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ए देखत कि तोला का होगै मोला। मोर जिया करे फड़ फड़ रे। मोला मया हे तोर से बड़ रे। जहां जावा तोला पावा तोर पाछु मय ह आवा। का सुनावा, का बतावा रे। तोर मोहनी सूरत देखके मयतो मरमरजावा रे। तोर सुरता ऐसे लागे मैं ठहरो बेरा भागे। मोर काम बुता नई होवे रीता

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अपना-अपना एक सितारा- उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

अपना-अपना एक सितारा इतने तारे आसमान में, उनका क्यों संज्ञान करें अपना-अपना एक सितारा, उसका ही सब ध्यान करें। दुनिया के सब काम आजकल, मतलब से ही चलते हैंभोले -भालों की छाती पर, दुष्ट मूँग अब दलते हैंअपना उल्लू सीधा करने को सब खूब मचलते हैंआस्तीन के साँप यहाँ पर, चुपके-चुपके पलते हैं अब अपनी

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संविधान का सम्मान – अखिल खान

समाज और यथार्थ

संविधान का सम्मान स्वतंत्रता के खातिर,कितने गंवाएं हैं प्राण,संविधान के लिए,वीरों ने दी है अपनी जान।अस्पृश्यता,दुर्व्यवहार में लिप्त था समाज,समाज में अत्याचारी-राक्षस,करते थे राज।दु:खियों,बेसहारों का होता था नित अपमान,प्यारे हिन्दवासी किजीए,संविधान का सम्मान। एक – रोटी के टुकड़े के लिए,तरसते थे जन, आजादी के लिए पुकारता,धरती और गगन। ज्ञान की रोशनी से दूर हुआ,जुल्म का

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doha sangrah

संविधान पर दोहे

हिंदी कविता

——संविधान—— सपने संत शहीद के,थे भारत के नाम।है उन स्वप्नों का सखे, संविधान परिणाम।। पुरखों ने निज अस्थियों,का कर डाला दाह।जिससे पीढ़ी को मिले, जगमग ज्योतित राह।। संविधान तो पुष्प है, बाग त्याग बलिदान।अगणित अँसुवन धार ने,सींची ये मुस्कान।। भीमराव अंबेडकर,थे नव भारत दूत।संविधान शिल्पी कुशल, सच्चे धरा सपूत।। लोकतंत्र संदर्भ में, संविधान का अर्थ।ऐसी

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संविधान दिवस को समर्पित दोहे

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

संविधान दिवस को समर्पित दोहे संविधान में लिख गए, तभी मिले अधिकार।बाबा साहब आप को, नमन करें शत बार।। संविधान ने ही दिया, मान और सम्मान।वरना तो हम थे सभी,खुशियों से अनजान।। संविधान से ही मिला, जीवन का अधिकार।वरना तो खाते रहे, वर्णाश्रम की मार।। छुआछूत भी कम हुआ, शुद्र हुए आजाद।जात-पात को खत्म कर,किए

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संविधान शुभचिंतक सबका

हिंदी कविता

संविधान शुभचिंतक सबका (आल्हा छंद) विश्लेषकजन का विश्लेषण, सुधीजनों का है उपहार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।। जन मानस सब विधि के सम्मुख, कहते होते एक समान।अपने मत का पथ चुन लें हम, शिक्षा का भी मुक्त विधान।।समता से अवसर हो हासिल, सबके सपने हों साकार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।।

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