कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मैं हूँ मोहब्बत – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

मोहब्बत मुझेखूब दबाया गयासूलियों परलटकाया गयामेरा कत्ल भीकराया गयामुझे खूब रौंदा गयाखूब कुचला गयामैं बाजारों में निलाम हुईगली-गली बदनाम हुईतख्तो-ताज भीखतरा मानते रहेरस्मो-रिवाज मुझसेठानते रहेजबकि में एकपावन अहसास हूँहर दिल केआस-पास हूँबंदगी काहसीं प्रयास हूँमैं हूँ मोहब्बतजीवन का पहलूखास हूँ। –विनोद सिल्ला©

मैं हूँ मोहब्बत – विनोद सिल्ला Read More »

संविधान दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

संविधान दिवस पर कविता हांमैं सेकुलर हूँसमता का समर्थक हूँमैं संविधान प्रस्त हूँसेकुलर होना गुनाह नहीं गुनाह हैसांप्रदायिक होनागुनाह हैजातिवादी होनागुनाह हैपितृसत्ता कासमर्थक होनागुनाह हैभाषावादी होनागुनाह हैक्षेत्रवादी होनागुनाह हैभेदभाव कापोषक होना। -विनोद सिल्ला©

संविधान दिवस पर कविता Read More »

मैं सो जाऊं – बाल कविता

हिंदी कविता

बाल गीत प्यारे प्यारे सपनों की दुनिया में, मैं खो जाऊं।चंदन के पलने में मुझे झुलाओ, मैं सो जाऊं। ममता का आंचल ओढ़ कर, तेरा राजा बेटा,सुकून भरी नींद में मुझे सुलाओ, मैं सो जाऊं। परियों की दुनिया की सैर, करनी है सपने में,चंदा तारे सब मुझे खिलाएं, मैं सो जाऊं। मम्मी मेरी सबसे प्यारी,

मैं सो जाऊं – बाल कविता Read More »

विश्व मानवाधिकार दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

विश्व मानवाधिकार दिवस पर कविता मिले कई अधिकार, जीवधारी को जग में|कुछ हैं ईश प्रदत्त, बने उपयोगी पग में |जीने का अधिकार, जगत में सबने पाया |भोजन पानी संग, भ्रमण का हक दिलवाया |अपने मन का नृप बने, जीव सभी इनसंसार में |अधिकारों का कर हनन, मस्त रहे व्यवहार में || अधिकारों कीइन 5 बात,

विश्व मानवाधिकार दिवस पर कविता Read More »

तितली पर बाल कविता

हिंदी कविता

तितली पर बाल कविता नीली पीली काली तितली।सुंदर पंखों वाली तितली।। आए-जाए फूलों पर ये,घूमे डाली-डाली तितली।। कुदरत ने कितने रंग भरे,लाड-चाव से पाली तितली।। फूल-फूल पर आती जाती,रहती है कब खाली तितली।। सब को खुशियां देने वाली,ऐसी है मतवाली तितली।। छूने से ये डर जाती है,नाजो-नखरे वाली तितली। -विनोद सिल्ला

तितली पर बाल कविता Read More »

पशु पक्षियों की पाठशाला ( कविता )

हिंदी कविता

पशु पक्षियों की पाठशाला ( कविता ) सुबह हुई है देखो भाई,पशु पक्षियों ने कक्षा लगाई,कौवा बोला ‘क’ से मैं,कोयल बोली ‘क’ से मैं,कबूतर बोला ‘क’ से मैं,ख से मैं हूँ खरगोश,बोला सब हो जाओ खामोश,न करो तुम आपस में लड़ाई,हमने अपनी अपनी पहचान बनाई,‘ग’ से बोले गधे भाई,एकता में है शक्ति समाईइतने में आये

पशु पक्षियों की पाठशाला ( कविता ) Read More »

मैंने चाहा तुमको हद से -मनीभाई

हिंदी कविता

मैंने चाहा तुमको हद से -मनीभाई मैंने चाहा तुमको हद से,कोई खता तो नहीं।मैंने मांगा मेरे राम सेकोई ज्यादा तो नहीं।तू समझे या ना समझेतू चाहे या ना मुझे चाहेइसमें कोई वादा तो नहीं। तेरी भोली बातें सुनूं,या देखूं ये निगाहेंकैसे संभालूं दिल को,कैसे छुपाऊं आहें।तेरे पास पास रहूं,तेरे साथ साथ चलूंइसकी कोई वजह तो

मैंने चाहा तुमको हद से -मनीभाई Read More »

मेरी जीवन यात्रा

हिंदी कविता

मेरी जीवन यात्रा मेरी ये यात्रामुट्ठी बंद शून्य सेअशून्य की ओर।जैसे ही नैन खुले,चाहिए खिलौने।और एक चमकता भोर। पाने की तलाश।जिसकी बुझे ना प्यास।ये कुछ पाना ही बंधन है ।पर जो मिल रहामन कैसे कह देसब धोखा है, उलझन है। ये जो घोंसला तिनकों कामेरी आंखो के सामने।जिसमें आराम है सुरक्षा है।ठंड में गरमऔर गर्म

मेरी जीवन यात्रा Read More »

क्रिकेट पर कविता| POEM ON CRICKET IN HINDI

हिंदी कविता

हमारे देश में घर-घर में क्रिकेट मैच देखा जाता है क्रिकेट मैच के दौरान टीवी देखते वक्त घर का माहौल खास हो जाता है। पति पत्नि का नोक झोंक और क्रिकेट का वर्णन करती हुई मनीभाई का यह कविता जरूर पढ़िए। क्रिकेट पर कविता| POEM ON CRICKET IN HINDI क्रिकेट का खेल है, रोमांच से

क्रिकेट पर कविता| POEM ON CRICKET IN HINDI Read More »

गाय पालन पर छत्तीसगढ़ी कविता

हिंदी कविता

गाय पालन पर छत्तीसगढ़ी कविता पैरा भूँसा ,कांदी-कचरा,कोठा कोंन सँवारे,हड़ही होगे ,बछिया कहिके रोजेच के धुत्कारे।। बगियाके बुधारू ,छोड़िस,गउधन आन खार।बांधे-छोरे जतने के,झंझट हे बेकार।। बछिया आगे शहर डहर अउपारा-पारा घुमय।कोनो देदे रोटी-भातलइका मन ह झुमय।। देखते-देखत बछिया संगीघोसघोस ले मोटागे।चिक्कन-देहें ,दिखन लागयमन सबके हरसागे।। आना होगे एक दिन संगीबुधारू के हाट।देख परिस ,बछिया ललालच

गाय पालन पर छत्तीसगढ़ी कविता Read More »

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कविता सच कहो,चाहे तख्त पलट दो, चाहे ताज बदल दोभले “साहब” गुस्सा हो, चाहे दुनिया इधर से उधर होतुम रहो या ना रहोपर, जब कुछ कहो तो, सच कहो। सच पर ही तो, न्याय टिका हैशासन खड़ा है, धर्म बना हैहे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ!सच से ही तुम होतो, अगर कुछ

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कविता Read More »

दीपावली पर कविता (Diwali kavita in hindi)

समाज और यथार्थ

का के राजा रावण का वध कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन पूरी अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा रही थी. भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या आगमन पर दिवाली मनाई गई थी. हर नगर हर गांव में दीपक जलाए गए थे. तब से लेकर

दीपावली पर कविता (Diwali kavita in hindi) Read More »

Scroll to Top