May 2020

हिन्दी कविता: सीसीई (सतत् व्यापक मूल्यांकन) – मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ,

सतत व्यापक मूल्यांकन पर आधारित कविता, जिसे मैंने सन् 2013 में विज्ञान प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर बनने के दौरान लिखा था ताकि शिक्षकों को सतत व्यापक मूल्यांकन की उपयोगिता पता चल सके.

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मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां- पदमा साहू

हिंदी कविता

मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां मोर जनमभूमि के भुंईयां मा माथ नवावंव गा।मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां मा माथ नवावंव गा।।जनम लेंव इही माटी मा ,,,,,2इही मोर संसार आवय गा–मोर………………… इंहा किसम- किसम के बोलबाखा मय छत्तीसगढ़िया हावंव।छत्तीसगढ़ म मोर जनम भूमि,मय एला माथ नवावंव।पले- बढे हों इही माटी मा,,,,2एला कईसे मय भुलावंव गा —मोर……………………… संगवारी मन

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हिन्दी निबंध : कोरोना वायरस (संकलित रचना )

मन और भावनाएँ

प्रस्तावना : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना की कोरोना अमेरिका पर पर्ल हार्बर और 9/11 के आतंकी हमले से बड़ा हमला है. जो इस बात की पुष्टि करता है कि दुनिया का महाशक्ति कहलाने वाला देश कोरोना के सामने कैसे अपना घुटना टेकते नजर आ रही है. आज दुनिया में ऐसा कोई

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हिन्दी कविता : नंद नयन का तारा है,विधा तांटक छंद,डिजेन्द्र कुर्रे

हिंदी कविता

नंद नयन का तारा है ★★★★★★★★★★★कोयल कूके जब अमुवा पर,मन भौंरा इठलाता है।तान बाँसुरी की मधुरिम सी,कान्हा सरस् बजाता है। श्याम रंग में डूबी श्यामल,राधा क्यूँ अकुलाती है।तड़प कभी तो कभी प्रीति की,विरहन गीत सुनाती है। गोकुल का गइया चरवाहा,माखन जिसको प्यारा है।मातु यशोदा का ललना है,नंद नयन का तारा है।~~~~~~~★★★★★~~~~रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)मो. 8120587822है

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हल्दीघाटी एकलिंग दीवान…

समाज और यथार्थ

हल्दीघाटी एकलिंग दीवान बाबूलालशर्मा *विज्ञ* मन करता है गीत लिखूँ मैं,एक लिंग दीवाने पर।मातृ भूमि के रक्षक राणा,मेवाड़ी परवाने पर।।✍१चित्रांगद का दुर्ग लिखूँ जब,मौर्यवंश नि: सार हुआ।मेदपाट की पावन भू पर,बप्पा का अवतार हुआ।कीर्ति वंश बप्पा रावल के,मेवाड़ी पैमाने पर।मन करता है गीत लिखूँ मैं,एक लिंग दीवाने पर।।✍२अंश वंश बप्पा रावल का ,सदियों प्रीत रीति

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वेदों पर कविता- डिजेन्द्र कुर्रे

हिंदी कविता

वेदों पर कविता सार भरा ऋग्वेद में ,देवों का आह्वान।लिखा वेद जी व्यास ने,जिसका अतुल विधान।। यजुर्वेद में मंत्र का,पावन है विस्तार।मुनिजन जिसको बाचकर,पाएं जीवन सार।। तन मन को शीतल करें,सामवेद का ज्ञान।लिखा मंत्र के रुप में,जिसमें सुर लय तान।। अथर्ववेद है तंत्र का,अनुपम अतुलित जाप।कभी जगत को दे सजा,कभी हरे संताप।। चारों वेदों में

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सतनाम पिरामिड रचना

हिंदी कविता,

सतनाम पिरामिड रचना हेनरतज तूनशाखोरीजाति प्रपंचचोरी, व्यभिचारअसत,हिंसा,हत्याअपना   सतनामकरूणा निधानदेगा सम्मानवही सच्चामहानधर्म है। #मनीभाई”नवरत्न”

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हे नारी तू खास है

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता,

चोका:- नारी तू खास है★★★★★ हर युद्ध काजो कारण बनतालोभ, लालचकाम ,मोह स्त्री हेतुपतनोन्मुखइतिहास गवाहस्त्री के सम्मुखधाराशायी हो जाताबड़ा साम्राज्यशक्ति का अवतारनारी सबला।स्त्री चीर हरण सेकौरव नाशमहाभारत कालरावण अंतसीता हरण करस्त्री अपमानहर युग का अंत।आज का दौरनारी सब पे भारीगर ठान लेदिशा मोड़े जग कासहनशीलप्रेम त्याग की देवीधैर्य की धागाबांधकर रखतीदेवों का वासतेरे आस पास

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आओं खेलें सब खेल

हिंदी कविता, ,

आओं खेलें सब खेल आओं खेलें सब खेल ।बन जाओ सब रेल।छुक छुक करते जाओ ।सवारी लेते जाओ ।कोई छुट  ना जाए ।हमसे रूठ ना जाए ।सबको ले जाना जरूरी ।तय करनी लम्बी दूरी ।सबको मंजिल पहुंचायेंगे ।घुम फिरकर घर आयेंगे । मनीभाई नवरत्न

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ओ नारी- मनीभाई नवरत्न

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता,

ओ नारी- मनीभाई नवरत्न जिन्दगी चले ना, बिन तेरे ओ नारी!उठा ली तूने,  सिर अपने  ऐसी जिम्मेदारी । मर्दों ने नाहक किये खुद पे ऐतबार ।सच तो यह है कि नारी होती जग की श्रृंगार ।महक ऐसे , फूल जैसे खिल उठे क्यारी क्यारी ।रोशन होता रहे तेरा जी,  फैले ज्ञान की चिनगारी ।। संयमित

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विश्व दूरदर्शन दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ,

विश्व दूरदर्शन दिवस पर कविता समाज का एक वर्गइतराता नहीं ये कहने से,मूल्यों के विघटन मेंदूरदर्शन का हाथ है ।पर पवित्र ना होदृष्टिकोण तोलगता है दिन भीघनघोर रात है ।। कहीं चूक है अपनी जोमित्र दूरदर्शन हो रहा दोषी ।वरना ताकाझांकी चलती सदाकि क्या कर रहा अपना पड़ोसी? ज्ञान है, विज्ञान हैमनोरंजन की खान है

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पृथ्वी दिवस विशेष : ये धरा अपनी जन्नत है

हिंदी कविता, ,

ये धरा अपनी जन्नत है ये धरा,अपनी जन्नत है।यहाँ प्रेम,शांति,मोहब्बत है। ईश्वर से प्रदत्त , है ये जीवन।बन माली बना दें,भू को उपवन।हमें करना अब धरती का देखभाल।वरना पीढ़ी हमारी,हो जायेगी कंगाल।सब स्वस्थ रहें,सब मस्त रहें।यही “मनी” की हसरत है॥1॥ ये धरा …… चलो कम करें,प्लास्टिक का थैला।उठालें झाड़ु हाथों में,दुर करें मैला।नये पौधे लगायें,

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