February 2022

सुरों की मल्लिका लता जी – जगदीश कौर

हिंदी कविता

सुरों की मल्लिका लता जी- जगदीश कौर कहाँ गई वो सुरों की मल्लिकाकहाँ गई वो मधुर सी कोकिलाजिसके सुरों के जादू से सारा हिंदूस्तां था फूलों सा खिला। छेड़ती थी जब सुरों की तान मंद -मुग्ध हो जाता हिन्दूस्तानतेरे गुनगुनाएं गीतों सेऊर्जा से भरता नौजवान।। बस गई थी सभी के दिलों मेंभारत की यह लाडली […]

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सुविचारित पग आगे बढ़ें

समाज और यथार्थ

सुविचारित पग आगे बढ़ें मातृभूमि की सेवा करें,दलित शोषित समाज की पीड़ा हरें,निजी स्वार्थों से, ऊपर उठकर,पर हित में भी, ध्यान धरें,नव भारत के लिए, पथ गढ़ें,सुविचारित पग आगे बढ़ें! निर्धनता अभाव से जूझ रहे हैं लोग,अज्ञानता का व्याप्त है, महा रोग!अंध विश्वास, अंध श्रद्धा, सर्वत्र व्याप्त है,आगे बढ़ने के लिए, सब कुछ पर्याप्त है,फ़िर

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भारत रत्न लताजी – ज्ञान भण्डारी

नारी जीवन और संवेदना

भारत रत्न लताजी – ज्ञान भण्डारी दूर झितिज,एक तारा टूटा ,रूठा धरा से, वो यों रूठा ,स्वर लहरी का , हर सुर डोला,शोकाकुल है बसंती चोला। कर्तव्य बोथ का भान तुम्हे था ,वेदना का अहसास तुम्हे था ,तुमने किए लाखो समर्पण ,उत्तम मिसाल दी नारी जीवन । साधिका थी तुम कंठ कोकिला ,रूप हंस वाहिनी

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मनीभाई के प्रेम कविता

हिंदी कविता

मनीभाई के प्रेम कविता दुख की घड़ियां है दो पल की दुख की घड़ियां है ,दो पल की।फिर क्यों तेरी ,आंखें छलकी ।।याद ना कर ,बातें कल की ….जाने जां  …जाने जां …जानेजां …जानेजां… माना दौर है , मुश्किल की ।आदत नहीं तेरी ,महफिल की ।मुस्कुरा तो जरा ,ख्वाहिश है दिल की….जाने जां  …जाने जां

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मनीलाल पटेल की लघु कविता

हिंदी कविता

मनीलाल पटेल की लघु कविता किसके बादल? स्वप्न घरौंदे तोड़के उमड़ता, घुमड़ता ।। बिना रथ के नभ में ये घन किसे लड़ता? नगाड़े ,आतिशबाजी नभ गर्जन है शोर । सरपट ही जा रहा किसके हाथों में डोर? भीग रहे, कच्ची ईंटें पकी धान की फसल किसान का ये नहीं तो, भला किसके बादल? मनीभाई नवरत्न,

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मनीभाई नवरत्न की रोमांचित गीत

हिंदी कविता

मनीभाई नवरत्न की रोमांचित गीत प्यार मेरा तेरे लिए… प्यार मेरा तेरे लिए, तेरे लिए मेरा प्यार ।सबसे जुदा हसीन सबसे जुदा ।तुझ पर जानिसार ।तुझ पर जानिसार . मेरे यार मेरे यार. कदमों में तेरी पलके बिछा दूं।तू जो कहे तो खुद को सजा दूं ।मिट जाऊ तेरे लिएआजमा ले हू तैयार।तुझ पर जानिसार

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बसन्त की सौगात – रमेश कुमार सोनी

प्रकृति और पर्यावरण

बसन्त की सौगात – रमेश कुमार सोनी शरमाते खड़े आम्र कुँज में कोयली की मधुर तान सुन बाग-बगीचों की रौनकें जवां हुईंपलाश दहकने को तैयार होने लगे पुरवाई ने संदेश दिया कि-महुए भी गदराने को मचलने लगे हैं। आज बागों की कलियाँ उसके आने से सुर्ख हो गयी हैं ज़माने ने देखा आज ही सौंदर्य

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mahatma gandhi

बापू जी को नमन -अकिल खान

हिंदी कविता

बापू जी को नमन -अकिल खान जन्म लिए एक महान संत स्थान था पोरबंदर,नाम था महात्मा गांधी अहिंसा के थे समंदर।दुःखी अश्वेतों को अफ्रीका में दिलाई आजादी,महात्मा गांधीजी थे कर्तव्यपरायण-सत्यवादी,अहिंसा से करते थे अन्यायीयों का दमन,सत्य-अहिंसा के पुजारी,बापू जी को नमन। जर्रा-जर्रा कह उठा,देश से गोरों को है भगाना,गोरों को भगाकर,देश भक्ति का गीत है

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तटरक्षक दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

 हर साल 1 फरवरी को मनाया जाता है। 1 फरवरी 1977 को भारत में एक अंतरिम तटरक्षक संगठन के गठन का निर्णय लिया गया। तटरक्षक या तटरक्षक बल एक नौसेना के समान सैन्य या अर्द्ध-सैन्य संगठन होता है, परन्तु इसका मुख्य कर्तव्य आतंकवाद और अपराध से एक देश के समुद्री क्षेत्रों की रक्षा करना है, इसके अतिरिक्त यह खतरे में पड़े

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गांधी जी के विचार – जगदीश कौर प्रयागराज

प्रकृति और पर्यावरण

गांधी जी के विचार – जगदीश कौर प्रयागराज गांधी तेरे विचारों की फिर जरूरत है ।सत्य, अंहिसा, रामराज्य की हसरत है। मानव को मानव का दर्जा मिल जाए ।मंहगाई में सबका खर्चा चल जाए।इंसानियत न बिके सरेआम बाजारों में ।पढा लिखा वर्ग न खडा हो हजारों में।अब फिर से अंहिसा का दे आ पाठ पढ़ा

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mahatma gandhi

बापू की यादें – सन्त राम सलाम

हिंदी कविता

बापू की यादें – सन्त राम सलाम मोहन दास करम चन्द गाॅधी, बालक पन में तेरा नाम धरे।तोड़े गुलामी अंग्रेजी हुकूमत,स्वदेश भारत को आजाद करे।। बने बैरिस्टर दक्षिण अफ्रीका में, लौटे स्वदेश तो सुंदर पैरवी करे।लोहा तो लोहा को काटता है, अद्भुत सूत्र को अपने मन में धरे ।। 2 अक्तूबर 1869 में जन्म लिए,पुतली

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