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नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट
कवि और कविता/ पुष्पा शर्मा”कुसुम”
धरती हमको रही पुकार-आदेश कुमार पंकज
गीता द्विवेदी की हाइकु
हाइकु मंजूषा-पद्म मुख पंडा स्वार्थी
हाइकु त्रयी
जीवन के झंझावातों में श्रमिक बन जाते है
राह निहारूं माई- सन्त राम सलाम
जन-जन करोड़ों की मधुर मुसकान चाचा नेहरू /सुनील श्रीवास्तव ‘श्री’
बाल मजदूरी निषेध पर कविताएँ
बाल मजदूर पर कविता (लावणी छंद मुक्तक)
आँख खुलने लगी / नीलम
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