कविता बहार

नव दीप

नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट

समाज और यथार्थ

इस कविता में भुवन बिष्ट ने आशा, प्रेम, और भाईचारे का संदेश दिया है। हर व्यक्ति के मन में नई उम्मीदों और सकारात्मकता के दीप जलाने का आह्वान किया है, जिससे समाज में शांति, प्रेम, और सद्भावना का वातावरण बने। नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट नव दीप जले हर मन में,          अब […]

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kavi aur kavita

कवि और कविता/ पुष्पा शर्मा”कुसुम”

समाज और यथार्थ

कवि: कवि वह व्यक्ति होता है जो शब्दों के माध्यम से भावनाओं, विचारों, और अनुभवों को व्यक्त करता है। कवि अपनी रचनाओं में कल्पना, संवेदना, और आत्मा का मिश्रण करते हुए पाठकों को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है। कवि का कार्य केवल शब्दों का संग्रह करना नहीं होता, बल्कि वह अपनी रचनाओं के माध्यम

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save tree save earth

धरती हमको रही पुकार-आदेश कुमार पंकज

हिंदी कविता

धरती हमको रही पुकार धरती हम को रही पुकार ।समझाती हमको हर बार ।। काहे जंगल काट रहे हो ।मानवता को बाँट रहे हो ।इससे ही हम सबका जीवन,करें सदा हम इससे प्यार ।।धरती हमको रही पुकार ।। बढ़ा प्रदूषण नगर नगर में ।जाम लगा है डगर डगर में ।दुर्लभ हुआ आज चलना है ,लगा

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हाइकु

गीता द्विवेदी की हाइकु

हिंदी कविता

गीता द्विवेदी की हाइकु 1  –  पकते फल       फुदके गिलहरी       कोई न हल 2  –  बीज धरा में        झर – झर बरखा        नवअंकूर 3  –  कठपुतली       मनोरंजन कड़ी       दुनिया भूली 4  –  एक आंगन       संयुक्त परिवार        लुभाए मन 5  –  ठण्डा है पानी       काँपती है सयानी        नहाए कैसे गीता द्विवेदीअम्बिकापुरजिला – सरगुजा

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हाइकु

हाइकु मंजूषा-पद्म मुख पंडा स्वार्थी

हिंदी कविता

हाइकु मंजूषा 1चल रही हैचुनावी हलचलप्रजा से छल 2 भरोसा टूटाकिसे करें भरोसासबने लूटा 3 शासन तंत्रबदलेगी जनताहक बनता 4 धन लोलूपनेता हो गए सबअब विद्रूप 5 मंडरा रहाभविष्य का खतराचुनौती भरा 6 खल चरित्रजीवन रंगमंचन रहे मित्र 7 प्यासी वसुधाजो शान्त करती हैसबकी क्षुधा 8 नदी बनाओजल संरक्षण कावादा निभाओ 9 गरीब लोगनिहारते गगननोट

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बाल श्रम निषेध दिवस

जीवन के झंझावातों में श्रमिक बन जाते है

हिंदी कविता,

जीवन के झंझावातों में श्रमिक बन जाते है नन्ही नन्ही कोमल कायानिज स्वेद बहाते हैं।जीवन के झंझावातों में,श्रमिक  बन जाते है।हाथ खिलौने वाले  देखो,ईंटों को झेल रहे।नसीब नहीं किताबें इनकोमिट्टी से खेल रहेकठिन मेहनत करते है तबदो रोटी पाते है।जीवन के—–गरीबी अशिक्षा के चलते,जीवन दूभर होतातपा ईंट भठ्ठे में जीवनबचपन कुंदन होतासपने सारे दृग जल

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hands mother and her kids

राह निहारूं माई- सन्त राम सलाम

हिंदी कविता

यहाँ मान पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। राह निहारूं माई – सन्त राम सलाम सांझ सबेरे तेरी,,,,,,,,राह निहारूं माई,,,,,,,,,मुझे छोड़-छोड़ मां तू, कहां चली जाती है।

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जवाहरलाल नेहरू

जन-जन करोड़ों की मधुर मुसकान चाचा नेहरू /सुनील श्रीवास्तव ‘श्री’

समाज और यथार्थ,

भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चे प्यार से ‘चाचा नेहरू’ भी कहते हैं। जवाहरलाल नेहरू का मानना ​​था कि बच्चे किसी भी समाज की मूल नींव होते हैं, इसलिए उनका पालन-पोषण उपयुक्त वातावरण में किया जाना चाहिए और पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के उपलक्ष्य में हर साल 14 नवंबर को बाल

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बाल श्रम निषेध दिवस

बाल मजदूरी निषेध पर कविताएँ

समाज और यथार्थ,

बाल मजदूरी निषेध पर कविताएँ: बाल-श्रम का मतलब यह है कि जिसमे कार्य करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा से छोटा होता है।

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बाल श्रम निषेध दिवस

बाल मजदूर पर कविता (लावणी छंद मुक्तक)

समाज और यथार्थ, , ,

हर साल 12 जून को विश्व दिवस बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करने और उनकी मदद के लिए किया जा सकता है, इसके लिए सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज के साथ-साथ दुनिया भर के लाखों लोगों को एक साथ लाता है। बाल मजदूर पर कविता (लावणी छंद मुक्तक) राज, समाज, परायों अपनों, के

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chandani raat

आँख खुलने लगी / नीलम

प्रकृति और पर्यावरण

आँख खुलने लगी/ नीलम आँख खुलने लगी/ नीलम रात के पिछले पहर मेंशीत की ठंडी लहर मेंकोहरे की चादर ओढ़ेसो रहे थे चाँद-तारे धीरे -धीरे धरा सरकतीजा पहुँची प्राची के द्वारेथरथराती ठंड से सिकुड़तीथपथपा खुलवा रही थी द्वार उषा ने धीमें से झांका झिरी सेफिर हौले से खोले द्वारपहचान पृथा को थोड़ा साकिया स्वागत उजास

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