हैप्पी हैप्पी क्रिसमस टू यू – मनीभाई नवरत्न
मन और भावनाएँ25 दिसंबर क्रिसमस डे यीशु मसीह
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25 दिसंबर क्रिसमस डे यीशु मसीह
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स्काउट जम्बुरी गीत यह गीत स्काउट गाइड और जम्बूरी के महत्व और मूल्यों को दर्शाता है। यहां इस गीत को आगे बढ़ाते हुए प्रस्तुत है: जम्बूरी गीत सबसे अपना गहरा नाता है,सबसे अपनी है प्रीति।आओ एक दूजे को मान दें,समझें सबकी संस्कृति। स्काउट गाइड सिखाताअनुशासन का पाठ,चलो हिलमिल जाएं हम सबमिटाके आपस की दूरी। जम्बूरी…
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maa durga bhajan: bhakti hai jinke ragon mein
मनीभाई नवरत्न के भक्ति गीत Read More »
दम्भ पर कविता घाव ढाल बन रहे. स्वप्न साज बह गये।. पीत वर्ण पात हो. चूमते विरह गये।। काल के कपाल पर. बैठ गीत रच रहा. प्राण के अकाल कवि. सुकाल को पच रहा. सुन विनाश गान खगरोम की तरह गये।पीत वर्ण……….।। फूल शूल से लगेमीत भयभीत छंदरुक गये विकास नव. छा रहा प्राण द्वंद.
दम्भ पर कविता – बाबूलालशर्मा *विज्ञ* Read More »
मोहिनी-कुंडलियाँ सूरत है मन मोहिनी, राधा माधव साथ।हुए निरख सब बावरे, ले हाथों में हाथ।।ले हाथों में हाथ, छवि लगती अति न्यारी।मुरलि बजाए श्याम,लगे सबकोये प्यारी।।कहता कवि करजोरि,है मनमोहिनी मूरत।सब पाएं सुख चैन, देखके उनकी सूरत।।🕉🕉🕉🕉राधा गोरी है अधिक, साँवले घनश्याम।लगती दोनों की छवी,अनुपमअरुअभिराम।।अनुपम अरु अभिराम, रूप सुंदर है भाया।प्रेमभावअलौकिक,दुनिया को ही सिखाया।।कहत नवल करजोरि,
मोहिनी-डॉ एन के सेठी Read More »
पृथ्वीराज पर कविता अजयमेरु गढ़ बींठली, साँभर पति चौहान।सोमेश्वर के अंश से, जन्मा पूत महान।। ग्यारह सौ उनचास मे, जन्मा शिशु शुभकाम।कर्पूरी के गर्भ से, राय पिथौरा नाम।। अल्प आयु में बन गए, अजयमेरु महाराज।माँ के संगत कर रहे, सभी राज के काज।। तब दिल्ली सम्राट थे, नाना पाल अनंग।राज पाट सब कर दिया, राय
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नन्ही कदमों पर कविता नन्ही कदमों से कोसों चलेमाँ की आंचल पकड़े -पकड़े !और कितनी दूर जाना है माँकुछ चलकर हो जाते खड़े !! माँ बोली थोड़ी दूर और ..बेटा हमको चलना है !एक बार पहुँच गये तोफिर वही पर ठहरना है !!चुभती गर्मी तपती सड़केंनंगे कदमों पर पड़े हैं छाले !लंगड़ाते कई बार गिरामाँ
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सरकारी रिपोर्ट पर कविता सरकारी रिपोर्ट में कभीमजदूर नहीं होतेमज़दूरों की पीड़ा नहीं होतीमज़दूरों के बिलखते बच्चे नहीं होतेनहीं होता उनके अपनी धरती से पलायन होने का दर्दनहीं होती उनकी भूख और प्यास की कथाबूढ़े माँ-बाप से अलगाव की मज़बूरीऔर शासन-प्रशासन की नाकामी की बातसरकारी रिपोर्ट में कतई नहीं होती सरकारी रिपोर्ट में होती हैखोखली
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विकास यात्रा निकला था वहविकास यात्रा में कमायाअपार धन अर्जित कियाअपार यश अब उसेभूख नहीं लगतीनींद नहीं आती अब केवलअपनी तृष्णा के सहारेजीवित हैविकास यात्री। — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र9755852479
विकास यात्रा पर कविता-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र Read More »
रोटी पर कविता पता नहींइसे रोटी कहूँया भूख या मौतआईना या चाँदमज़बूरी या ज़रूरी कभी मैं रोटी के लिएरोती हूँकभी रोटीमेरे लिए रोती है कभी मैंभूख कोमिटाती हूँकभी भूखमुझे मिटाती है रोटी से सस्तीहोती है मौतवह मिल जाती हैआसानी सेपर रोटी नहीं मिलती रोटी आईना हैजिसमें दिखते हैं हमपर रोटी मेंहम नहीं होतेहमारा आभास होता
रोटी पर कविता-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र Read More »
विकास पर कविता उनकी सोच विकासवादी हैउन्हें विश्वास है केवल विकास परविकास के सारे सवालों परवे मुखर होकर देते है जवाबउनके पास मौजूद हैंविकास के सारे आँकड़े कृषि में आत्मनिर्भर हैंखाद्यान से भरे हुए हैं उनके भंडारआप भूख से मरने का सवाल नहीं करनावे आंकड़ों में जीत जाएंगेआप सबूत नहीं दे पाएंगेआपको मुँह की खानी
विकास पर कविता-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र Read More »
रुकना भी है चलना हमें तो बस यही सिखाया गया है चलते रहो चलते रहोबस चलते ही रहो चलते ही रहने का नाम है जिंदगीरुक जाने से जिन्दगी भी रुक जाएगी तुम्हारीउनके लिए विरोधाभासों में जीना जैसे जिंदगी ही नहीं होतीमैं कहूँ रूकने से जिंदगी सँवर जाती है तो आप हँसेंगेआपने कभी रुकना सीखा ही
रुकना भी है चलना- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र Read More »