हिंदी कविता

doha sangrah

मनीभाई के दोहे ( Manibhai ke Dohe)

प्रकृति और पर्यावरण

मनीभाई के दोहे (1) जंगल मंदिर बन गये , शहर हुए अब खेत।मानव के करतूत से , हो गये पशु निश्चेत।। (2) मानव तेरी भूख ही , मांस नोच के खाय।है तू हिंसक पशु बड़ा, देखत सब थर्राय। (3) मानव रक्षक है प्रकृति ,मानव बन शैतान ।छोटे से सुख के लिए,काटत मुर्गा श्वान।। (4) प्रीत

मनीभाई के दोहे ( Manibhai ke Dohe) Read More »

व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले / कबीरदास

हिंदी कविता

मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले / कबीरदास मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले हीरा पायो गाँठ गठियायो बार-बार बा को क्यूँ खोले हल्की थी तब चढ़ी तराजू पूरी भई तब क्यूँ तओले सूरत-कलारी भई मतवारी मदवा पी गई बिन तोले हंंसा पाए मानसरोवर ताल तलैया क्यूँ डोले तेरा साहब है घर माँ हीं बाहर

मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले / कबीरदास Read More »

Hindi Poem ( KAVITA BAHAR)

मैं जीने लगी

हिंदी कविता

मैं जीने लगी वक्त का सरकनाऔर उनके पीछेमेरा दौड़ना  ये खेल निरन्तर   चल रहा हैकहाँ थे औरकहाँ आ गये।   कलेन्डर बदलता रहा   पर मैं यथावतजीने की कोशिशभागंमभाग जिन्दगी    कितना समेटूमैं जीवन रुपी जिल्दसंवारती रही, औरपन्ने बिखरते गये।   एक कहावत सुनीऔर जीवन सुखी हो गयाआप सब भी सुनिएजब दर्द और कड़वी गोलीसहन होने लगे  समझो जीना

मैं जीने लगी Read More »

आंसू पर कविता

हिंदी कविता

आंसू पर कविता दर्द जब पिघलता है तो बह आते हैं आँसूसुख में हों या हो दुख में रह जाते हैं आँसू विकट वेदना पीर बहेआघातों के तीर सहेकंपित अधरें मौन रहेगूंगी वाणी व्यथा कहे सूनी सूनी  पलकों पर हिमकण जम जाते हैं आँसू वेदना जब गीत गाती कोख पीड़ा की भर जाती विदीर्ण होते

आंसू पर कविता Read More »

व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

राम प्रसाद बिस्मिल की लिखी कविताएं

मन और भावनाएँ

रामप्रसाद बिस्मिल एक क्रान्तिकारी थे जिन्होंने मैनपुरी और काकोरी जैसे कांड में शामिल होकर ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंका था। वह एक स्वतंत्रता संग्रामी होने के साथ-साथ एक कवि भी थे और राम, अज्ञात व बिस्मिल के तख़ल्लुस से लिखते थे, उनके लेखन को सर्वाधिक लोकप्रियता बिस्मिल के नाम से मिली थी। पेश हैं

राम प्रसाद बिस्मिल की लिखी कविताएं Read More »

kavita book

सादगी का रंग / राष्ट्रीय सादगी दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

यहाँ राष्ट्रीय सादगी दिवस के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत की जा रही है: सादगी का रंग सादगी का रंग हो प्यारा,सीधा-सादा जीवन हमारा। चमक-दमक को भूल चलें हम,सादगी में ही सुख पाएं हम। कम में खुश रहना सिखाएं,सादगी का पाठ पढ़ाएं। भव्यता में न फंसे जीवन,सादगी में हो सच्चा धन। जीवन का यही है

सादगी का रंग / राष्ट्रीय सादगी दिवस पर कविता Read More »

वर्ल्ड जूनोसिस डे पर नारे

समाज और यथार्थ

वर्ल्ड जूनोसिस डे हर साल 6 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य जूनोटिक रोगों (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोग) के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन लुई पाश्चर द्वारा पहली सफल रेबीज वैक्सीन का परीक्षण करने की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। जूनोसिस रोगों को रोकने के लिए अच्छे स्वच्छता उपाय, पशुओं का टीकाकरण और उचित पशु चिकित्सा देखभाल महत्वपूर्ण हैं।

वर्ल्ड जूनोसिस डे पर नारे Read More »

छत्तीसगढ़ कविता

छत्तीसगढ़ परिचय (दोहा छंद )/ वेदकांति रात्रे “देविका”

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ परिचय (दोहा छंद ) नामकरण पर राज्य के, मत हैं विविध प्रकार।चेदिसगढ़ था नाम शुभ , हीरा के अनुसार।। रहते थे छत्तीस कुल , जरासंध के काल ।नामकरण पर राज्य के , कहे वेगलर हाल ।। चेदी जनपद काल में, चेदिसगढ़ सुखधाम।चेदिसगढ़ से है बना, इस प्रदेश का नाम ।। शासक थे जो कल्चुरी

छत्तीसगढ़ परिचय (दोहा छंद )/ वेदकांति रात्रे “देविका” Read More »

सावन के दोहे/ नरेन्द्र वैष्णव “सक्ती”

हिंदी कविता

नरेंद्र वैष्णव जी का “सावन के दोहे”” काव्य विशेष रूप से उनकी कविताओं में एक प्रमुख पहलू हैं। वे उत्तर भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन-दर्शन को अपनी कविताओं में प्रकट करने वाले प्रमुख कवि रहे हैं। सावन के दोहे/ नरेन्द्र वैष्णव “सक्ती” बारिश की यादें लिए , सिसके सावन देख ।वर्णन करना चाहता , काव्य

सावन के दोहे/ नरेन्द्र वैष्णव “सक्ती” Read More »

yogasan

जीवन का पाठ है योग / अरुणा डोगरा शर्मा

समाज और यथार्थ,

अरुणा डोगरा शर्मा की “यह”जीवन का पाठ है योग” कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य योग के सामूहिक अभ्यास के महत्व को रेखांकित करना और पाठकों को इसे अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जीवन का पाठ है योग /अरुणा डोगरा शर्मा भौतिक सुखों को

जीवन का पाठ है योग / अरुणा डोगरा शर्मा Read More »

yogasan

आओ मिल कर योग करें हम / शिवांगी मिश्रा

समाज और यथार्थ,

शिवांगी मिश्रा की कविता “आओ मिल कर योग करें हम” योग के सामूहिक और सामाजिक महत्व को उजागर करती है। इस कविता में कवयित्री ने योग को न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शांति का साधन बताया है, बल्कि इसे एक सामूहिक गतिविधि के रूप में भी प्रस्तुत किया है जो समुदाय और समाज में एकता

आओ मिल कर योग करें हम / शिवांगी मिश्रा Read More »

Scroll to Top