राष्ट्रवाद पर कविता
हिंदी कविताराष्ट्रवाद पर कविता बाँध पाया कौन अब तक सिंधु के उद्गार को।अब न बैरी सह सकेगा सैन्य शक्ति प्रहार को।1तोड़ डालें सर्व बंधन जब करे गुस्ताखियाँ।झेल पायेगा पड़ोसी शूरता के ज्वार को।2कांपता अंतःकरण से यद्यपि बघारे शेखियाँ।छोड़ रण को भागने खोजा करे अब द्वार को।3मानसिकता में कलुष है छल प्रपंचों में जुटा।कूटनीतिक योग्यता से अवसर […]
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