हिंदी कविता

शहीदों की कुर्बानी पर कविता -मनोरमा जैन पाखी

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शहीदों की कुर्बानी पर कविता -मनोरमा जैन पाखी पवन वेग से उड रे चेतक ,जहाँ दुश्मन यह आया है ।रखा रुप विकराल दुष्ट ने ,ताँडव  वहाँ  मचाया  है। रक्तरंजित हो गयी धरा ,निर्दोषो के खून से।जाने न पाये दुष्ट नराधमरंग दे भू उस खून से । रही सिसकती आज वसुंधरादेखे अपना दामन लाल।न जाने कितनी […]

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ताटंक छंद

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ताटंक छंद           ——  1——दिलों से नफ़रत को मिटाकर,               सबको गले लगाना है |हमें देश की खातिर अपने,               जीना है मर जाना है |आपस में हो भाईचारा,               प्रेम भाव उपजाना है |हरे भरे अपने गुलशन को,               खुशबू से मँहकाना है |                ——–2——–दीन दुखी की सेवा कर के,             खुद को धन्य बनाना है |अपने सदकर्मो से

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खामोशी पर कविता

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खामोशी पर कविता मैं ,चुप ही रहती हूं ,जाने कबसे ,मुझे पता भी ,नहीं चला ,खामोशी कब,मेरी मीत बन गई,और तुमने समझा,मैं सुधर गई,क्योंकि ,नहीं पूछती देर से आने की वजह ।नहीं कहती क्या अच्छा हैक्या बुरा ?नहीं लाती हल्के रंग की शर्ट।नहीं कहती तुम पर फबेगा।शायद ,हमारे रिश्ते के रंगहल्के हो गए हैं ,काश

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मेरी मातृभूमि

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मेरी मातृभूमि स्वर्ग  से   सुंदर   भू   भारती ।भानु शशि नित्य करे आरती ।।गौरव   गान  श्रुति  वेद करते ।प्रातः नमन ऋषि हृदय भरते ।।उर्वर  भूमि  सजी  इठलाती ।श्रम बिन्दु से प्यास  बुझाती ।।सौंधी  सुगंध  पवन  मचलते ।मंजु मधुक मधु कंठ विहरते ।।देवभूमि    हे  दिव्य  रसोमय ।साधक जीवन करती निर्भय ।।प्राची   हिमाद्रि   उतंग  श्रेणी ।प्रगटी जहाँ सुरसरि

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doha sangrah

नैन पर दोहे

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  नैन पर दोहे दुनिया    के   सबसे   बड़े, , जादूगर  ये  नैन।इनके बिन मिलता कहाँ ,भला किसी को चैन?कमल-नयन   श्रीराम  हैं , त्रिलोचन  महादेव।सृजन  प्रलय  के  हेतु   हैं  ,ये  देवों  के  देव।नयन   समंदर   झील हैं   ,नैन  तीर  तलवार।नैन   जिसे  ले   डूबते,  अलग  कहाँ  उद्धार।नील-गगन  भी  नयन  हैं , जिन  में तारे मौन।मन -पंछी  उड़ते  यहाँ 

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लाल तुम कहाँ गये

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लाल तुम कहाँ गये * मेरे आँगन  का उजियारा थामाँ बाप के आँख का तारा थासीमा पर तुझको भेजा थापत्थर  का बना  कलेजा थापर मैने यह नहीं   सोचा  था।तू मुझे छोड़  कर जायेगा माँ बाप को  रुलवायेगा ।क्यों पुलवामा  में सो गये ।लाल तुम कहाँ गये । कहता था ब्याह रचाऊँगाप्यारी सी बहू   मैं  लाऊँगाफिर झूले

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हिम्मत न हार

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हिम्मत न हार आज  नहीं  तो  ये  कल  होगा ।प्रश्न  यहीं  का   है  हल  होगा ।।जीवन  जीये  जा   मत   रोना ।यार   हताशा   में  मत   होना ।।मान   पहेली   तू   लग   पीछे ।हिम्मत  को बांधो  कस भींचे ।।जीत  चलो  बाजी  उलझा  है ।बंधन  तोड़़ा  जो  निकला  है ।।तू  इतिहासों  कोे  लिखता जा ।कर्ज अभी  से ही  गिनता

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मनीभाई की तांका

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मनीभाई की तांका नंद के लालाब्रज का तू गोपालाहै भोला भालाभाये बांसुरी तेरीछाये प्रेम घनेरी।। -मनीभाई ●●●●●●●●●●नाचते देखादेव विसर्जन मेंलोगों कोलिए फूहड़पनडीजे केे तरानों में।●●●●●●●●●●मैं नहीं एकमेरे रूप अनेकमैं ही ना जानूँ मेरी हकीकत कोमुझसे मिला दे तू।●●●●●●●●●●मनीभाई ‘नवरत्न’ मनीभाई की ताकाँ आता न कलमहाकाल विजेताकर तो शुरूअपना अभियानलाना गर तूफान।

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Maa Durga photo

मैया की लाली है सिंगार/केवरा यदु “मीरा

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“मीरा की कविता ‘मैया की लाली है सिंगार’ में माता के प्रति भक्ति और प्रेम का गहरा भाव है। इस रचना में मीरा अपनी माँ की सुन्दरता और भक्ति को बयां करती हैं, जो भावनाओं और आस्था से भरपूर है। यह कविता मातृ प्रेम और भारतीय संस्कृति की अद्भुत परंपरा को दर्शाती है।” मैया की

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आज का नेता पर कविता

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आज का नेता पर कविता जहाँ बहरी सियासत है, जहाँ कानून है अंधा।करें किसपे भरोसा तब, जहाँ पे झूठ है धँधा।विचारों पे लगा पहरा,बड़ा ये ज़ख्म है गहरा,भला क्या देश का होगा,सियासी रंग है गन्दा।। मुनाफ़े का बड़ा धंधा, कभी होता नहीं मंदा।सियासी वस्त्र है ऐसा, कभी होता नहीं गंदा।सफेदी में छिपा लेता, सभी गुनाह

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जीवन का शाश्वत सत्य

प्रकृति और पर्यावरण

जीवन का शाश्वत सत्य भोर की बेला हुई, दिनकर की पलकें खुली।इंतज़ार ख़त्म हुआ, सौगात लेकर आई नयी सुबह।।धीरे धीरे आँखे खोल रहा,स्वर्ण किरणें बिखेर रहा।नयी सुबह प्रारंभ हुई, रात्रि निशा विभोर हुई।। कल जो जा रहा पश्चिम में था,आज फिर पूरब में है।नयी रोशनी नयी किरण आज हमारे जीवन में है।।दे रहा संकेत हमें,

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बैताली छंद के कविता

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बैताली छंद के कविता      काम  क्रोध ,  लोभ  छोड़  दे ।राम   संग ,  प्रीत   जोड़   दे ।।एक   राम ,   सत्य   है   यहाँ ।हो   अचेत , सो  रहा   कहाँ ।। स्वार्थ   हेतु ,   प्रीत  को  रचे ।खो  प्रपंच , ग्यान   से   बचे ।।चार   रात ,   चाँदनी     सजे ।अंत   छोड़ ,  आग  में  तजे ।। हाड़   मांस

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