हिंदी कविता

हाइकु

सुधा राठौर जी के हाइकु

हिंदी कविता

सुधा राठौर जी के हाइकु छलक गयापूरबी के हाथों सेकनक घट★बहने लगींसुनहरी रश्मियाँविहान-पथ★चुग रहे हैंहवाओं के पखेरूधूप की उष्मा★झूलने लगींशाख़ों के झूलों परस्वर्ण किरणें★नभ में गूँजेपखेरुओं के स्वरप्रभात गान सुधा राठौर

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हाइकु

निमाई प्रधान’क्षितिज’ के हाइकु

प्रकृति और पर्यावरण

निमाई प्रधान’क्षितिज’ के हाइकु *[1]* *हे रघुवीर!**मन में रावण है* *करो संहार ।* *[2]**सदियाँ बीतीं* *वहीं की वहीं टिकीं* *विद्रूपताएँ ।* *[3]**जाति-जंजाल**पैठा अंदर तक**करो विमर्श ।* *[4]**दुःखी किसान* *सूखे खेत हैं सारे* *चिंता-वितान* *[5]**कृषक रुष्ट* *बचा आख़िरी रास्ता* *क्रांति का रुख़* *[6]**प्रकृति-मित्र!**सब भूले तुमको**बड़ा विचित्र!!* *[7]* *अथक श्रम* *जाड़ा-घाम-बारिश* *नहीं विश्राम* *[8]**बंजर भूमि**फसल कहाँ से

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मन की लालसा किसे कहे

हिंदी कविता

मन की लालसा किसे कहे सच कहुं तो कोई लालसा रखी नहींमन की ललक किसी से कही नहीं क्यों कि     जीवन है मुट्ठी में रेत    धीरे धीरे फिसल रहा   खुशियां, हर्ष, गम प्रेम   इसी से मन बहल रहा। बचपन की राहे उबड़ खाबड़,फिर भी आगे बढ़ते रहे,भेद भाव ना बैर मन मेंनिश्छल ही चलते

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कुछ चिन्ह छोड़ दें -गीता द्विवेदी

हिंदी कविता

कुछ चिन्ह छोड़ दें -गीता द्विवेदी मृत्यु आती है ,सदियों से अकेले ही ,बार – बार , हजार बारलाखों , करोड़ों , अरबों बार ।पर अकेले जाती नहीं ,ले जाती है अपने साथ ,उन्हें , जिन्हें ले जाना चाहती है । एक , दो या हजारकुछ भयभीत रहते हैं ,उसके नाम से , उसकी छाया

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ये उन्मुक्त विचार -पुष्पा शर्मा”कुसुम”

हिंदी कविता

ये उन्मुक्त विचार -पुष्पा शर्मा”कुसुम” नील गगन  के विस्तार सेपंछी के फड़फड़ाते पंख से,उड़ रहे, पवन के संग ये उन्मुक्त विचार । पूर्ण चन्द्र के आकर्षण सेबढते उदधि में ज्वार से,उछलते, तरंगों के संगये उन्मुक्त विचार। बढती , सरिता के वेग सेकगारों के ढहते पेड़ से,रुकते नहीं, भँवर मेंये उन्मुक्त विचार। निर्झर के कल-कल नाद

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तृष्णा पर कविता

हिंदी कविता

तृष्णा पर कविता तृष्णा कुछ पाने कीप्रबल ईच्छा हैशब्द बहुत छोटा  हैपर विस्तार  गगन सा है।अनन्त नहीं मिलता छोर जिसकाशरीर निर्वाह की होतीआवश्यकतापूरी होती है। किसी की सरलकिसी  की कठिनईच्छा  भी पूरी होती है।कभी कुछ कभी कुछपर तृष्णा  बढती जातीपूरी नहीं होती। तृष्णा परिवार कीतृष्णा धन कीतृष्णा सम्मान कीतृष्णा यश  की। बढती लाभ संगदिखाती अपना

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हाइकु

वृन्दा पंचभाई की हाइकु

हिंदी कविता

वृन्दा पंचभाई की हाइकु छलक आतेगम और खुशी में मोती से आँसू। लाख छिपाएकह देते है आँसूमन की बात। बहते आँसूधो ही देते मन केगिले शिकवे। जीवन भर साथ रहे चलेमिल न पाए। नदी के तटसंग संग चलतेकभी न मिले। जीवन धुनलगे बड़ी निरालीतुम लो सुन। जीवन गीतअपनी धुन में हैमानव गाता। सुख दुःख केपल

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नारी पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

स्त्री पर कविता ( Stree Par Kavita ): चैत्र नवरात्रि हिन्दु धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है। चैत्र नवरात्रि चैत्र (मार्च अप्रेल के महीने) में मनाई जाती है, इसे चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। चूकी दुर्गा माँ भी एक स्त्री है तो नारी शक्ति पर एक कविता नारी पर सुन्दर कविता आँखों  

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शिव में ध्यान लगा -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

शिव में ध्यान लगा शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.शिव में ध्यान लगा.शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.शिव में ध्यान लगा. मौका मिला तुझे , शिव से मिलने को .जाने ना दे ये पल, दिन है ढलने को ।वरना होगा गुनाह, मिले ना फिर पनाह.मन से अपने आलस भगा .शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.शिव

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बारिश पर कविता हिन्दी में

प्रकृति और पर्यावरण

यहां बारिश पर कविता हिन्दी में दिए जा रहे हैं आप इनको पढ़के आनंद लें। बारिश का मौसम सर सर सरसराता समीरचम चम चमकती चपलाथम थम कर टपकती बूँदेंअनेक सौगात लाती बहारेंप्रेम का, खुशियों काबारिश के मौसम का। घनश्याम घिरे नभ घन मेंहरित धरा राधे की आँचलघनघोर बरसता पानी मध्य मेंलगता ज्यों खीर सागर बीच

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पिता पर कविता (Pita Par Kavita)

समाज और यथार्थ

फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं जिसमे पितृत्व (फादरहुड), पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। अनेक देशों में इसे जून के तीसरे रविवार, तथा बाकी देशों में अन्य दिन मनाया जाता है। यह माता के सम्मान हेतु मनाये जाने

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जगन्नाथ रथयात्रा पर हिंदी कविता (Jagannath Rathyatra)

नारी जीवन और संवेदना

रथ यात्रा दूसरे शब्दों में रथ महोत्सव एकमात्र दिन है जब भक्तों को मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है, उन्हें देवताओं को देखने का मौका मिल सकता है। यह त्योहार समानता और एकीकरण का प्रतीक है।रथ यात्रा भारत के पुरी में जून या जुलाई के महीनों में आयोजित भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु का अवतार) से जुड़ा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है| पुरी रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है और हर साल एक लाख तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती है, न केवल भारत से बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भी।

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