अभयदान
हिंदी कविताअभयदान शांति कपोत,लहूलुहान।वो जलायेंगे,खलिहान।युद्ध व्यापार,आलीशान।मानवता झेलती,घमासान।दानवता करे,अभिमान।सभ्यता विलोपन,अभियान।कैसे मिलेगा,अभयदान???भावुककविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद
अभयदान शांति कपोत,लहूलुहान।वो जलायेंगे,खलिहान।युद्ध व्यापार,आलीशान।मानवता झेलती,घमासान।दानवता करे,अभिमान।सभ्यता विलोपन,अभियान।कैसे मिलेगा,अभयदान???भावुककविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद
वो स्काउट कैम्प है मेरा जहाँ प्रकृति की सुंदर गोदी में स्काउट करता है बसेरावो स्काउट कैम्प है मेराजहाँ सत्य सेवा और निष्ठा का हर पल लगता है फेरावो स्काउट कैम्प है मेरायह धरती जहाँं रोज फहरता,नीला झण्डा हमाराजहाँ जंगल में मंगल करता है,स्काउट वीर हमाराजहाँ शिविर संचालक सबसे पहले डाले तम्बू डेरावो स्काउट कैम्प
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बुढ़ापे से लाभ जब मिले बुढ़ापा , खो मत आपा ,ईश्वर को धन्यवाद दे ।उसकी है करुणा , आया पहुना , प्रसन्नता का प्रसाद दे ।।सूक्ष्म है संदेश , श्वेत ये केश , पवित्रता का पालन हो ।इंद्रिय शिथिल हो, मन सविकल हो ,ध्यान का नित्य साधन हो ।।जब न दिखे दुनिया , नैन पुतरिया निहारना तू निज
बूढ़ी हो गई हैं स्वेटर समय के साथबूढ़ी हो गई हैं स्वेटर…यकायक आज..संदूक से निकालकर… आलमारी में सजाते समयधर्मपत्नी बोल उठी थी..आधुनिक समय में कद्र कहाँ है …?दिन रात…आंखें चुंधिया गई थी..बूढ़ी आंखें….लेकिन स्नेह से भरपूर…मशीनों में स्नेह थोड़े ही होता है…?नदारद..कितना मोलभाव किया था..पसंद की पषम…आज तो दुकानें भी मिलती हैं सहज..दुर्लभ है ढूंढना…आधुनिकीकरण
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छत्तीसगढ़ महतारी/ पुनीत राम सूर्यवंशी सुघ्घर हाबय छत्तीसगढ़ महतारी,एला कइथे भईया धान के कटोरा,आवव मयारू मितान संगवारी मन,नवा छत्तीसगढ़ राज बनाय बर हे। बोली-भाखा,जात-पात, छुआ-छुत ल,छोड़ के कहव हमन हाबन एखर संतान,महानदी, अरपा, पइरी, इंन्द्रावती नदी म,बांध बंधवा के खेत म पानी पहुंचाय बर हे।जम्मो कमाईया मन ल काम-बुता मिलय,देवभोग अऊ सोनाखान के खनिज
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जो भारत विरोधी नारा लगाते “जो भारत विरोधी नारा लगाते”अपनी भारत माता डरी हुई ,वो कुछ भी नही कह पाती है ।अपने कुछ गद्दारों के कारण,मन ही मन वो शर्माती है ।।पाल पोस कर बडा किया,इसकी आँगन मे ही खेले ।वो पिला रही थी दूध जिन्हें,पर निकले वही हैं जहरीले ।।इन्हीं जयचंदों के कारण ,मुगलों
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हकीकत तब पता चलता है हकीकत तब पता चलता है कौन अपना है ,कौन पराया है , ये तो वक़्त बताता है ।हकीकत तब पता चलता है जीवन में, जब बुरा वक़्त आता है ।।01।।न कोई दोस्त है यहां, ना कोई यार है ।यह दुनियाँ भी यारों , मतलब का संसार है ।।02।।बुरे वक़्त में
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निःशब्द तो नहीं [१]निःशब्द तो नहीं !किंचित् भी नहीं !!बस…नहीं हैं आजशहद या गुलाबी इत्र मेंडुबोयेसुंदर-सुकोमल-सुगंधित शब्दनहीं हैं आजकर्णप्रिय,रसीले,बांसुरी के तानों संगगुनगुनाते अल्फाज़…सब जल गये !भस्म हो गयेसारे के सारेअंतरिक्ष में विचरतेछंदटूट-फूटकरबिखर गये सारे अलंकारनिस्सार हो गयींसारी व्यंजनाएँलक्षणा भी हो गयीं सारीमहत्त्वहीन..अबबचे हैं तो केवलउबड़-खाबड़कंटकाकीर्णक्षिति पर पांव जमाते……कुछ शब्दजो टटोलते हैंपैरों से अपना ज़मीनपैरों के
आक्रोश पर कविता ये आज्ञा अब है मिली ,खुल के लो प्रतिशोध चुन- चुन के रिपु मारिये, हो गलती का बोध ।। *कोई अब बातें नहीं , करो सिर्फ आघात ।दुष्ट दमन करते चलो , एक बराबर सात ।। . *जय भारत जय हिंद से , गूँज उठे संसार ।माँ भारती तिलक करो ,
23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है और भारत में मनाया जाता है। इस दिन 1931 को तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। महात्मा गांधी की स्मृति में। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी के सम्मान में
शहीदों की कुर्बानी पर कविता -मनोरमा जैन पाखी पवन वेग से उड रे चेतक ,जहाँ दुश्मन यह आया है ।रखा रुप विकराल दुष्ट ने ,ताँडव वहाँ मचाया है। रक्तरंजित हो गयी धरा ,निर्दोषो के खून से।जाने न पाये दुष्ट नराधमरंग दे भू उस खून से । रही सिसकती आज वसुंधरादेखे अपना दामन लाल।न जाने कितनी
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ताटंक छंद —— 1——दिलों से नफ़रत को मिटाकर, सबको गले लगाना है |हमें देश की खातिर अपने, जीना है मर जाना है |आपस में हो भाईचारा, प्रेम भाव उपजाना है |हरे भरे अपने गुलशन को, खुशबू से मँहकाना है | ——–2——–दीन दुखी की सेवा कर के, खुद को धन्य बनाना है |अपने सदकर्मो से