हिंदी कविता

शिव – मनहरण घनाक्षरी

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शिव – मनहरण घनाक्षरी उमा कंत शिव भोले, डमरू की तान डोले, भंग संग  भस्म धारी, नाग कंठ हार है। शीश जटा चंद्रछवि, लेख रचे ब्रह्म कवि, गंग का विहार शीश, पुण्य प्राण धार है। नील कंठ  महादेव, शिव शिवा एकमेव, शुभ्र वेष  मृग छाल, शैल ही विहार है। किए काम नाश देह, सृष्टि सार  […]

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भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि – मनीभाई नवरत्न

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भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि सूत बिहनिया उठके , मय करव अस्नान ।पार्वती ओ मैंइया तोरे हावे मोला धियान ।जइसन पाये तय अपन भोला भगवान।वइसन पावव हरजनम, मय अपन गोसान। लाली चौकी फबेहे, सुग्घर भुइयां भित्ति।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।आसन बिराजे हे, भोलेबाबा पारबती।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि। सोला

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मुहम्मद आसिफ अली के नज़्म

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मुहम्मद आसिफ अली के नज़्म अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी है अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी हैदिया है हुस्न मौला ने दिखाना भी ज़रूरी है इशारा तो करो मुझको कभी अपनी निगाहों सेअगर है इश्क़ मुझसे तो जताना भी ज़रूरी है अगर कर ले सभी ये काम झगड़ा हो

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आगे हरेली तिहार – रविन्द्र दुबे बाबू

प्रकृति और पर्यावरण

आगे हरेली तिहार झूम झूम के सावन आगे, बादर करिया अमावस ममजा उडाबो,माटी मतियाबो, हरेली पहली तिहारी हे ।। बिहन ले गाँव के टुरा जुड़ गे , नरियर फेकेन जम के, गेड़ी खपायेन टेंग टेंग रेंगेन, झूमत संग संगवारी हे ।। नागर फांद के चीला खवाइश, भूति करे बनिहारिनछत्तीसगढ़ म हरियाली छाए, खेत खार आउ

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रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला

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रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला रोटी तू भी गजब है, कर दे काला चाम।देश छोड़ के हैं गए, छूटे आँगन धाम।। रोटी तूने कर दिए, घर से बेघर लोग।रोटी ही ईलाज है, रोटी ही है रोग।। रोटी तेरे ही लिए, बेलें पापड़ रोज।मोहताज तेरे सभी , तेरी ही नित खोज।। रोटी सबसे है बड़ी, इससे

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कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता

नारी जीवन और संवेदना

कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता वतन के हिफाजत के लिए त्याग दिये अपने प्राण। तुमनें आह तक नहीं किये त्यागते समय अपने प्राण।। सीने में गोली खा के हो गये देश के लिए शहीद। मुख में था मुस्कान गोली खा के भी बोले जय हिंद।। मेरे वतन के जांबाज सिपाहियों तुमको शत्

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नये तराने – माधुरी मुस्कान ग़ज़ल

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नये तराने – माधुरी मुस्कान ग़ज़ल करीब आओ न दूर जाओ मुझे गले से सनम लगा लो।न जी सकेंगे न मर सकेंगे जहाँ भी हो तुम हमे बुला लो ।। अभी अभी तो बहार देखी नये तराने मचल रहे हैंअभी उजालों ने आँख खोली चलो न खुशियों को भी मना लो । मुझे नज़र से

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mahatma gandhi

अहिंसा दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

अहिंसा दिवस पर कविता: अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस महात्मा गांधी के जन्मदिन पर 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे भारत में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। अहिंसा दिवस पर कविता साबरमती के संत तुझे लाख बार प्रणाम है साबरमती के संत तुझे, लाख बार प्रणाम हैअहिंसा के पुजारी तुझे,लाख बार प्रणाम हैस्वतन्त्रा की राह हो या, सत्यता की

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विश्वास के पुल – सन्त राम सलाम

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विश्वास के पुल उफनती नदी में उमड़ता सैलाब, पुलिया के नीचे पानी गहरा है।बीच मझधार में फँसा है जीवन, विश्वास के पुलिया पर ठहरा है।। जीवन मृत्यु दो छोर जीवन के, जहाँ पर पाँच तत्वों का पहरा है।सजग हवा सोते हैं साँसों पर, तब तब ही यह जीवन कहरा है।। धूप और छाँव में बीतता

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खुद से वादा – सुशी सक्सेना

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खुद से वादा साहिब, खुद से भी एक वादा करना है।मंजिल तक पहुंचने का इरादा करना है।नित नए संघर्ष होंगे, जीवन के पथ पर,मगर सवार हो कर, उत्साह के रथ पर।कांटों भरा हो या फूलों भरा, जारी ये सफ़र रखना,कदम जमीं पर हो, और आसमां पर नजर रखना।मुश्किलें सर झुका दें, तेरे कदमों पर,नित नए

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शीतल छाया दे रहे – विनोद सिल्ला

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शीतल छाया दे रहे शीतल छाया दे रहे, परउपकारी पेड़। हरे पेड़ को काट कर, कुदरत को ना छेड़।। पेड़ दे रहे औषधी, ले के रहो निरोग।पेड़ लगाने चाहिए, काट रहे हैं लोग।। पालन पोषण कर रहे, देकर के फल फूल। पेड़ लगा उपकार कर, पींग डाल कर झूल।। पेड़ सलामत जब तलक, सोओ लंबी

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कहाँ गई कागज की कश्ती – प्यारेलाल साहू

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कहाँ गई कागज की कश्ती – प्यारेलाल साहू कहाँ गई कागज की कश्ती।कहाँ गई बचपन की मस्ती।। बचपन कितना था मस्ताना।कभी रूठना और मनाना।। साथ साथ खेला करते थे।आपस में फिर हम लड़ते थे।। साथ साथ पढ़ने जाते थे।बाँट बाँट कर हम खाते थे।। छुट्टी के दिन मौज मनाते।अमराई से आम चुराते।। कभी पकड़ में

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