हिंदी कविता

Rakshabandhan

रक्षाबन्धन पर दोहे – बाबूलाल शर्मा, बौहरा

मन और भावनाएँ

रक्षा बन्धन एक महत्वपूर्ण पर्व है। श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं। यह ‘रक्षासूत्र’ मात्र धागे का एक टुकड़ा नहीं होता है, बल्कि इसकी महिमा अपरम्पार होती है। कहा जाता है कि एक बार युधिष्ठिर ने सांसारिक संकटों से मुक्ति के लिये भगवान कृष्ण से उपाय पूछा तो कृष्ण

रक्षाबन्धन पर दोहे – बाबूलाल शर्मा, बौहरा Read More »

सृष्टि कुमारी की कवितायेँ

समाज और यथार्थ

सृष्टि कुमारी की कवितायेँ आज की नारी मैं आज की नारी हूं, इतिहास रचाने वाली हूं,पढ़ जिसे गर्व महसूस करे वो इतिहास बनाने वाली हूं।नारी हूं आज की, खुले आसमान में उड़ना चाहती हूं मैं,बांध अपने जिम्मेदारियों का जुड़ा, अपने सपनों को पूरा करना चाहती हूं मैं।अब अपने जुल्मों का शिकार नहीं बना सकता कोई

सृष्टि कुमारी की कवितायेँ Read More »

आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न ऐ दीदी ओ,  ऐ बहिनी ओ।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। सावन भादों सुख के देवय्या।झमाझम बादर चले पुरवय्या।।डारा पाना ह सबो हरियागे।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। झूलेना बने हे  सुग्घर पटनी।धरे रहव जी दवरा के गठनी।ठेठरी खुरमी अउ खारा कटनी।भजिया सुहाथे लहसून के चटनी।नोनी बाबू ऐदे खाये

आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न Read More »

doha sangrah

बछ बारस पर कविता – दोहा छंद

हिंदी कविता

बछ बारस पर कविता – दोहा छंद बछ बारस सम्मानिए, गौ बछड़े की मात।मिटे पाप संताप तन, दैव प्रमाणित बात।। पावस सावन में मनें, बछ बारस का पर्व।गौ सेवा कर नर मिले, मेवा मंगल गर्व।। भिगो मोठ को लीजिए, उत्तम यह आहार।गौ को मीठे में खिला, बछ बारस व्यवहार।। गौ माताएँ हिन्द हित, बछ सौभाग्य

बछ बारस पर कविता – दोहा छंद Read More »

व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान में दोहा छंद

हिंदी कविता

आ.मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान म़े सादर समर्पित मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान में दोहा छंद प्रेम चन्द साहित्य में , भारत की त़सवीर।निर्धन,दीन अनाथ की,लिखी किसानी पीर।। सामाजिकी विडंबना , फैली रीति कुरीति।चली सर्व हित लेखनी, रची न झूठी प्रीत।। गाँव खेत खलिहान सब,ठकुर सुहाती मान।गुरबत में ईमान का , पाठ लिखा गोदान।। बूढ़ी

मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान में दोहा छंद Read More »

तीज पर कविता – चौपाई छंद

हिंदी कविता

तीज पर कविता – चौपाई छंद _बाबूलालशर्मा,विज्ञ_ वर्षा ऋतु सावन सुखदाई।रिमझिम मेघ संग पुरवाई।।मेह अमा हरियाली लाए।तीज पर्व झूले हरषाए।। झूले पटली तरुवर डाली।नेह डोर सखियाँ दे ताली।।लगे मेंहदी मने सिँजारा।घेवर संग लहरिया प्यारा।। झूला झूले नारि कुमारी।गाए गीत नाचती सारी।।करे ठिठोली संग सहेली।हँसे हँसाए तिय अलबेली।। झूले पुरुष संग सब बच्चे।पींग बढ़ाते लगते सच्चे।।धीर

तीज पर कविता – चौपाई छंद Read More »

नाग पंचमी पर कविता – अमृता प्रीतम

हिंदी कविता

नाग पंचमी पर कविता – अमृता प्रीतम मेरा बदन एक पुराना पेड़ है…और तेरा इश्क़ नागवंशी –युगों से मेरे पेड़ कीएक खोह में रहता है। नागों का बसेरा ही पेड़ों का सच हैनहीं तो ये टहनियाँ और बौर-पत्ते –देह का बिखराव होता है… यूँ तो बिखराव भी प्याराअगर पीले दिन झड़ते हैंतो हरे दिन उगते

नाग पंचमी पर कविता – अमृता प्रीतम Read More »

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर कविता

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर कविता जन्म जनवरी दस को इक दिन,राष्ट्र संघ बन जाता है।शांति राह में चलने को ही,अपना कदम बढाता है।। विश्वयुद्ध भड़काने वाले,लालच रख कर डोले थे।साम्राज्य बढ़ाने उत्साहित,दुनिया से भी बोले थे।। गुप्त संधि करके रखते थे,झगड़े खूब बढ़ाने को।मित्र राष्ट्र सब के सब साथी,लड़ने और लड़ाने को।। विश्वयुद्ध दुनिया

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर कविता Read More »

मोर दंता ओ शिरी – तोषण चुरेन्द्र

हिंदी कविता

मोर दंता ओ शिरी – तोषण चुरेन्द्र मोर दंता ओ शिरी… आरती तोर उतारँवगंगा के पानी धरके ओ दाई तोर चरन ला पखारँवमोर दंता ओ शिरी….. दंतेवाड़ा मा बइठे ओ दाई दंताशिरी सुहायेबड़ सिधवा हम तोरे लइका महतारी तिही कहायेनरिहर बंदन फूल दसमत संग तुहिला मँयहा मनावँवमोर दंता ओ शिरी…… महिमा तोरे बरनी न जाये

मोर दंता ओ शिरी – तोषण चुरेन्द्र Read More »

किसान खेत जोतते हुए

किसान पर कविता

हिंदी कविता

किसान पर कविता खेती किसानी पर कविता नांगर बइला पागा खुमरी संगहावय हमरो मितानीहोवत बिहनिया सूरूज जोत संगकरथंन खेती किसानी धरती दाई के सेवा बजाथंवचरण मा मांथ नवावंवरुख राई मोर डोंगरी पहाड़ीबनके मँय इतरावंवकलकल छलकत गंगा जइसनधार हे अरपा के पानीहोवत बिहनिया सूरूज जोत संगकरथंन खेती किसानी हरियर हरियर खेती अउ डोलीलहर लहर लहरावयपड़की परेवना

किसान पर कविता Read More »

मालविका अरुण की कवितायेँ

हिंदी कविता

मालविका अरुण की कवितायेँ गुरु की महिमा गुरु प्राचीन हैं पर विकास हैंगुरु चेतना हैं, प्रकाश हैंएक महान पद्धति का प्रमाणगुरु, भारतीय संस्कृति का मान हैं। गुरु श्रम हैं, प्रोत्साहन हैंगुरु तप हैं, गुरु त्याग हैंगुरु निष्ठा हैं, विश्वास हैंगुरु हर चेष्टा का परिणाम हैं। गुरु जिज्ञासा हैं, ज्ञान हैंगुरु अनुभव हैं, आदेश हैंगुरु कल्याण,

मालविका अरुण की कवितायेँ Read More »

Scroll to Top