मनखे के कोरा भक्ति पर व्यंग्य

हनुमान जंयती

  “धरव -पकड़व -कुदावव”
अउ सब्बो झन तोआवव।
चढ़गय बेंदरा रूख म त,
ढेला घलव बरसावव।
अइसने करम करत हावे,
आज के मनखे।
मनावत हे “हनुमान जयंती”
सीधवा अस बनके।


सबों जीव के रखबो जी
जूरमिल के मान
बेंदरा घलव ल तो
जानव हनुमान
बड़ सुघ्घर नता हावे,
बेंदरा अऊ इनसान के।
बड़ भारी सेना रहिन ,
श्रीराम भगवान के ।


हनुमान-राम के नता ल,
सब्बोझन जानथे।
बेंदरा तभ्भे मनखे ल,
अपन राम मानथे
फेर बेंदरा ल हनुमान
मनखे कहाँ मानथे
वाह – वाह रे मनखे
बेंदरा के चीरफाड़,
परयोग बर करथे
अउ कोनो दूसर नही
हमरे संही मनखे।
मनावत हे “हनुमान जयंती”
सीधवा अस बनके।

मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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