देख रहा हूँ कल – मनीभाई नवरत्न
हिंदी कवितादेख रहा हूँ कल सोते हुए जो “कल” को मैंने देखा था।वह महज सपना था ।आज इस पल फिर सेदेख रहा हूं “कल” मैं जागते हुए ।हां !यही अपना रहेगा।इस पल साथ हैं मेरे तीन दोस्त“जोश जुनून और जवानी “।और इन्ही के संग मुझे गढ़नी हैनित नूतन कहानी ।कल कुछ बोलता नासमझ सेनिशानी थी बालपन […]
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