विरोधाभासपूर्ण कविता
हिंदी कविताविरोधाभासपूर्ण कविता आर आर साहू, छत्तीसगढ़ हो न यदि संवेदना पर पीर की,मोल क्या जानोगे श्री रघुवीर की! दुष्ट दुर्योधन दुशासन हैं जहाँ,दुर्दशा है द्रौपदी के चीर की। सत्य को सूली लगाकर आज वो,छद्म पूजा कर रहे तस्वीर की। रौशनी की ओट ले फूली-फली,सल्तनत अंधेर के जागीर की। पाप को मन में छिपा तन धो […]
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