कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता,

लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न कितने लाभ और कितने हानि-मनीभाई नवरत्न बादल से गिरतीअमृत बनकर पानी।प्यास फिर बुझातीअपनी धरती रानी । फुटते कली शाखों परबगिया बनती सुहानी ।आती फिर धरा मेंनित नूतन जवानी । छम छम करतीसुनो बारिश की जुबानी ।दिल छू कर गुजरेध्वनि ऐसी रूहानी । घनघोर घटा चीरतीबिजली की रवानी।मूरत […]

लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न Read More »

छत्तीसगढ़ी कविता – तरिया घाट के गोठ

नारी जीवन और संवेदना,

( यह कविता कुछ ग्रामीण महिलाओं के स्वभाव को दर्शाती है जहाँ उनकी दिखावटीपन, आभूषण प्रियता, बातूनीपन  और  कुछ अनछुए पहलू को बताने की कोशिश की गई है ।)

छत्तीसगढ़ी कविता – तरिया घाट के गोठ Read More »

छत्तीसगढ़ी कविता – जड़कल्ला के बेरा

हिंदी कविता

जड़कल्ला के बेरा -छत्तीसगढ़ी कविता आगे रे दीदी, आगे रे ददा, ऐ दे फेर जड़कल्ला के बेरा।गोरसी म आगी तापो रे भइया , चारोखुँट लगा के घेरा॥ रिंगीचिंगी पहिरके सूटर,नोनी बाबू ल फबे हे।काम बूता म,मन नई लागे, बने जमक धरे हे।देहे म सुस्ती छागय हे,घाम लागे बड़ मजा के।दाँत ह किटकिटावथे,नहाय लागे बड़ सजा

छत्तीसगढ़ी कविता – जड़कल्ला के बेरा Read More »

12 मार्च दाण्डी मार्च दिवस पर कविता

हिंदी कविता

12 मार्च दाण्डी मार्च दिवस नव-चेतना का आह्वान किया।नमक कानून के खिलाफ पदयात्रा किया।जीना सिखाया हमें स्वाभिमान से,“महात्मा”बुलाते हम सम्मान से,घनघोर अँधेरा में बने आशा की किरण,सत्यअहिंसा की मिशाल बने जिनका जीवन।आज उन्हीं के काम के मान दिवस है।12 मार्च दाण्डी मार्च दिवस है।। चल पड़े थे अपने मकसद में अकेले,कुछ सहयोगी भी उनके संग

12 मार्च दाण्डी मार्च दिवस पर कविता Read More »

कोरोना को नहीं बुलाओ

प्रकृति और पर्यावरण

कोरोना को नहीं बुलाओ पटाखों का मोह छोड़कर दीवाली में दीप जलाओ।प्रदूषण फिर से फैलाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। हरसाल दिवाली आयेगी हम सबको यह हर्षायेगी।खुशियों पर पैबंद लगाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। बच्चे, बुजुर्ग और जवान हमारे घर की सभी है शान।डर स्वास्थ्य का फैलाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। मानव जाति पर बन आई

कोरोना को नहीं बुलाओ Read More »

छंद क्या है? इसके प्रमुख अंगों को जानिए

मन और भावनाएँ

सामान्यतः लय को बताने के लिये छन्द शब्द का प्रयोग किया गया है। यह अंग्रेजी के ‘मीटर’ अथवा उर्दू-फ़ारसी के ‘रुक़न’ (अराकान) के समकक्ष है। छंद क्या है? विशिष्ट अर्थों या गीत में वर्णों की संख्या और स्थान से सम्बंधित नियमों को छ्न्द कहते हैं जिनसे काव्य में लय और रंजकता आती है। छंद व्यवस्था

छंद क्या है? इसके प्रमुख अंगों को जानिए Read More »

अगले जनम मोहे बिटिया ना बनाए

हिंदी कविता

अगले जनम मोहे बिटिया ना बनाए बचपन में ही मेरी डोर थी बांधीतब मैं उसे समझ ना पाई॥पर बाद में पता चला कि,यह राह तो मुझे शैतान तक है ले आयी॥ पढ़ाई करने की उम्र मेंमेरी शादी है रचाई॥विदा कर मुझेसबके मन को तसल्ली है आयी॥ चूल्हे की आग मेंमैंने खाना भी बनाया॥हाथ में पड़े

अगले जनम मोहे बिटिया ना बनाए Read More »

मोर छत्तीसगढ़ महतारी

Uncategorized

मोर छत्तीसगढ़ महतारी मोर छत्तीसगढ़ महतारी,तोर अलग हे चिनहारी!देवता धामी ऋषि मुनि मन,तप करीन इहाँ भारी!! आनी बानी के रतन भरे हे ,इहाँ के पावन माटी म !मया पिरती बढ़त रहिथे ,गिल्ली डंडा अऊ बांटी म !!नांगमुरी करधनिया संग म ,दाई गोड़ म पहिरे सांटी ….. भिलाई कोरबा बैलाडीला म,बड़़े – बड़े कारखाना हे !कटकट – कटकट डोंगरी

मोर छत्तीसगढ़ महतारी Read More »

महिमा मोर छत्तीसगढ़ के..गीत पद्मा साहू पर्वणी

हिंदी कविता

महिमा मोर छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ महतारी मोर, तोर महिमा हे बड़ भारी।गजब होवत हे नवा बिहान, छत्तीसगढ़ के संगवारी। ये भुइयाँ के नाम हे पहिली दक्षिण महाकोसल,अउ हे छत्तीस किला ले एकर छत्तीसगढ़ नाम।लव-कुश के जनम इही भुइयाँ मा संगी,कौशिल्या के मईके, अउ ननिहाल हरे प्रभु राम ।मध्यपरदेश के दुहिता, दाई मोर छत्तीसगढ़,हरियर लुगरा पहिने

महिमा मोर छत्तीसगढ़ के..गीत पद्मा साहू पर्वणी Read More »

कोरोना या करमा

नारी जीवन और संवेदना

कोरोना या करमा नर मे वास करें नारायणनारी में नारायणी ,हे मानव॥स्वयंम को समझअपने कर्मों को तू बदल॥ चांद ,सूरज, पृथ्वी ,गगनसब अपने कार्य में है मगन॥नीति देखो रे मनुष्य कीजो खो गई जाने किस भवन॥ रोज सवेरे स्नान करे वोतन को रखें स्वच्छ॥मन का मैल ना धुल पावेगाचाहे काशी गंगा जावे हर वर्ष॥ तूने

कोरोना या करमा Read More »

कलयुग और रामायण

हिंदी कविता

कलयुग और रामायण सतयुग की हम बात सुनावे राजा दशरथ के पुत्र यहां है ॥ राम जिसका है नाम प्रतापी गायॆ सब मुनिवर उनकी वाणी॥ कलयुग में जो खेल रचा है हर मनुष्य सबसे जुदा है॥ स्वार्थ से  यहां इंसान बना है पीड़ा के दुख में उलझा है॥ राम करे पिता की सेवा माता सीता

कलयुग और रामायण Read More »

Scroll to Top