लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न
हिंदी कवितालाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न कितने लाभ और कितने हानि-मनीभाई नवरत्न बादल से गिरतीअमृत बनकर पानी।प्यास फिर बुझातीअपनी धरती रानी । फुटते कली शाखों परबगिया बनती सुहानी ।आती फिर धरा मेंनित नूतन जवानी । छम छम करतीसुनो बारिश की जुबानी ।दिल छू कर गुजरेध्वनि ऐसी रूहानी । घनघोर घटा चीरतीबिजली की रवानी।मूरत […]
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