कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

सूर घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान:सूर घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ सूर घनाक्षरी विधान ३० वर्ण(८८८६) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत चरणांत की कोई शर्त नहीं है। सूर घनाक्षरी विधान का उदाहरण . __जल रक्षण__ मनुज भूल नादानी,आज समय की मानी,बचत वर्षा का पानीसोचो कुण्ड बने। नही बहा ये अमृतबचा नीर से प्राकृत,धरा हेतु है सुकृतटांके कुण्ड बने। ताल तलैया बापीगहराई […]

सूर घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

देव घनाक्षरी विधान -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

देव घनाक्षरी विधान -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’ देव घनाक्षरी विधान ३३वर्ण (८८८९) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत चरणांत नगण१११(पुनरावृत्ति) (जैसे कदम कदम) देव घनाक्षरी विधान का उदाहरण __कदम-कदम__ लड़ें सीमा पर हम,पातकी जाएगा थम,कारवाँ चले बढ़ेगा,चलना कदम-कदम। पाक पड़ौसी बे दम,सुधारो उसको तुम,करना नहीं रहम,वह तो छदम छदम। चीन भाई धोखे सम,फैलता है काला तम,भारती माता पावन,झूठ

देव घनाक्षरी विधान -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

हरिहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: हरिहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ हरिहरण घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण( ८८८८) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत आंतरिक समान्तता अपेक्षित चरणांत लघु लघु ११ हरिहरण घनाक्षरी का उदाहरण . __परिवर्तन__ हे श्याम वर्ण के घननर्मद सा हो ये मन,पत्थर शिव जीवनवसुधा पर सावन। सागर जैसा हो धनविहगों जैसा जीवन,यमुना सी बंशी धुनगंगा सा जल पावन।

हरिहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

विजया घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: विजया घनाक्षरी -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’ विजया घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत आंतरिक समान्तता हो चरणांत नगण १११ विजया घनाक्षरी विधान का उदाहरण तिरंगा चाह कफन भारत माता वंदनमाटी सादर चंदन,मानस अभिनंदनचरणों में है नमन। जन गण का गायनहर दिन हो सावन,कण कण है पावनरहे आजाद वतन। सुन्दर सुन्दर

विजया घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

कृपाण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: कृपाण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ कृपाण घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण(८८८८) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत ८,८,८,८ पर यति हो, एवं चारो यति समतुकांत अनिवार्य चरणांत गुरु लघु २१ (गाल) कृपाण घनाक्षरी विधान का उदाहरण वर्षा नीर माने जाने भू की पीर,साथी सारे हैं जो धीर,गायें पौधे कागा कीर,रक्षे भैया वर्षा नीर। ले कुदाली आओ

कृपाण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

डमरू घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: डमरू घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ डमरू घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण(८८८८) प्रतिचरण १६,१६,वर्ण पर यति चार चरण समतुकांत समस्त वर्ण मात्रा विहीन हो डमरू घनाक्षरी विधान का उदाहरण हँसत नट चल पथ पनघटखटकत जल घट,धर पद नटखटभग पटकत घट। भय भगदड़ तबघर पथ लग जब,कहत रहत अबअभय हँसत नट। वन पथ तक करछछ घट

डमरू घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

मदन घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: मदन घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ मदन घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण १६,१६ वर्ण पर यति चार चरण समतुकांत चलणांत २२ गुरु गुरु मदन घनाक्षरी विधान का उदाहरण __नीर जरूर बचाएँ__ वर्षा का नीर सहेजेंसंदेश सभी को भेजें,पुनर्भरण कर लोव्यर्थ न नीर बहाएँ। पेड़ लगाओ सब हीमेड़ बनाओ तब ही,खेत खेत जल कुंडेघर

मदन घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

रूप घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: रूप घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ रूप घनाक्षरी का विधान विधान:- ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण १६,१६ वर्ण पर यति चार चरण समतुकांत चरणांत गुरु लघु (गाल) रूप घनाक्षरी का उदाहरण __भारती वंदन__ मात भारती वंदनमाटी तेरी है चंदन,जन्मे जो रघुनंदनआँचल में भगवान। मान देश का रखतेशान तिरंगा रखते,प्राण देह दे सकतेसपने शुभ अरमान। लिखते

रूप घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

जलहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: जलहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ जलहरण घनाक्षरी का विधान विधान :– ३२ वर्ण प्रति चरण( ८८८८) १६,१६ पर यतिचार चरण समतुकांतचरणांत लघु गुरु, या लघु लघु जलहरण घनाक्षरी का उदाहरण – नीर बहे मेघ घटा जल वर्षाखेत खेत है सरसाबाग पेड़ सर हर्षारोक जन नीर बहे। नीर भावि जन शक्तिउठो धीर मति व्यक्तिवारि

जलहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

जनहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: जनहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ जनहरण घनाक्षरी का विधान:– ३१, वर्ण प्रति चरण( ८८८७) १६,१५ पर यतिचार चरण समतुकांत हो।प्रति चरण ३० वर्ण लघु औरअंतिम वर्ण गुरु हो। जनहरण घनाक्षरी का उदाहरण प्रभु नटखट चल पथ पनघटनिरखत जल घटगिरधर नटखटपटकत घट है। भय भगदड़ तबघर पथ लगि जबछिपत रहत अबगिरधर नट है वन

जनहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ Read More »

गुरु पच्चीसी

समाज और यथार्थ

भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

गुरु पच्चीसी Read More »

वर्षा ऋतु (मनहरण घनाक्षरी) -सुश्री गीता उपाध्याय

हिंदी कविता

विषय :- वर्षा ऋतु
विधा:-मनहरण घनाक्षरी
————————————————————
सजल सघन बन,
उमड़ घुमड़ घन,
बिखर गगन भर-
देखो सखी आ गया।

घरर घरर घर,
गरज गरज कर,
तमक चमक हर-
दिशा चमका गया।

झरर झरर झर,
धरर धरर धर,
तरर बतर कर,
जल बरसा गया।

सरर सरर सर,
फरर फरर फर,
इधर उधर कर,
सबको भिगा गया।

दादुर टरर टर,
हर्ष पूर्ण स्वर भर
इत उत कूद कर,
खुशी दरसा गया।

सूखी माटी भीग चली,
बह गयी गली गली,
नार नदी सब बहे,
सर सरसा गया।

हल बैल बीज लिए,
खेत में कृषक गए,
नव गीत छेड़ रहे,
उमंग समा गया।

धरती सरस पगी ,
ममता छलक लगी,
बीज नव जीवन पा,
उठ कर आ गया।

—सुश्री गीता उपाध्याय
रायगढ़ छत्तीसगढ़

वर्षा ऋतु (मनहरण घनाक्षरी) -सुश्री गीता उपाध्याय Read More »

Scroll to Top