कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

व्यर्थ न बैठो काम करो तुम- डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

विषय-मेहनत
विधा-सार छन्द

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

व्यर्थ न बैठो काम करो तुम
मेहनत से न भागो।
आलस छोड़ो करो परिश्रम
सभी नींद से जागो।।

कर्म करो परिणाम न देखो
अपना भाग्य बनाओ।
मेहनत से आगे बढ़ो तुम
जीवन सफल बनाओ।।

आए हम सब इस दुनिया में
कर्म सभी करने को।
मेहनत करें सब मिलकर हम
जग नही विचरने को।।

खुश होते भगवान सदा ही
हिम्मत सदा दिखाओ।
करो परिश्रम जीवन में तुम
आगे बढ़ते जाओ।

मिलता मेहनत से सभी को
जीवन उन्नति पाए।
बढ़े सदा हिम्मत से आगे
भाग्य बदलता जाए।।

हर एक संकट मेहनत से
हल हो ही जाता है।
जीवन में पुरुषार्थ सदा ही
मान यहाँ पाता है।।

जीवन का पर्याय मेहनत
इससे सबकुछ होता।
करता जोआलस्य यहाँ पर
वह सब कुछ है खोता।।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

©डॉ एन के सेठी

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मनहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

हिंदी कविता

घनाक्षरी छंद विधान: मनहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ मनहरण घनाक्षरी विधान:– ८, ८, ८, ७ (आठ,आठ, आठ,सात) वर्ण संयुक्त वर्ण एक ही माना जाता है। कुल ३१वर्ण, १६, १५, पर यति हो,( , ) पदांत गुरु(२) अनिवार्य है, चार पद सम तुकांत हो, चार पदों का एक छंद कहलाता है। मनहरण घनाक्षरी का उदाहरण होली रूप

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प्रकृति का इंसाफ- मोहम्मद अलीम

प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति का इंसाफ 1.उदयाचल से अस्ताचल तक,कैसी ये वीरानी है |उत्तर से दक्षिण तक देखो ,मानव माथ पर परेशानी है || 2. पूरब से चली दनुज पुरवाई ,मानव मानव का नाशक बनकर |खड़ा है द्वारे एक विषाणुसृष्टि में नर पिशाचक बनकर || 3.चीन वुहान का एक विषाणु ,संक्रामक संक्रमण फैलाया है |विश्व स्वास्थ्य संगठन में

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हिन्दी कविता: अब तो पाठ पढ़ाना है

हिंदी कविता

अब तो पाठ पढ़ाना है
★★★★★★★★★
फिर सीमा में आ जाए तो,
गलवान को याद दिलाना है।
दुस्साहस कर न सके वह,
ऐसी सबक सिखाना है।
ए वीर जवानों सुन लो,
सबको यह बताना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
प्राण जाय पर वचन न जाय,
ऐसी कसम जो खाना है।
थर थर काँप उठे रूह उनका,
ऐसी सजा दिलाना है।
कलाम की परमाणु याद दिला दो,
बासठ का अब नही जमाना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
★★★★★★★★★★★★
रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822

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dr bhimrao ambedkar

भीम बाबा पर कविता

समाज और यथार्थ

भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।[1] उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। भीम बाबा पर कविता

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अलविदा मेरे चाहने वाले-कमल यशवंत सिन्हा ‘तिलसमानी’

हिंदी कविता

अलविदा मेरे चाहने वाले जब उसने ही छोड़ दिया मुझको मेरे हवालेतुम्हीं बताओ फिर मुझको कौन संभाले??? अब फिर किसी पे ऐतबार न होगाकरीब आने के चाहे कोई सौ तरकीब निकाले। जिसने खो दी अपने जीने की वजहउसे ख़्वाब दिखाते है ख़्वाब तोड़कर जाने वाले। भूख ,नींद, प्यास सब छीन कर वो कहते हैख्याल रखना

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shri Krishna

गीता ग्रंथ है पवित्र पावन- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

गीता ग्रंथ में उल्लेखित महत्वपूर्ण बातों को आधार मानकर लिखी गई कविता

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नज़्म – मुझे समझा रही थी वो

हिंदी कविता

मुझे समझा रही थी वो बहुत मासूम लहजे में, बड़े नाज़ुक तरीके सेमेरे गालों पे रखके हाथ समझाया था उसने येसुनो इक बात मानोगे,अगर मुझसे है तुमको प्यार,तो इक एहसान कर देनाजो मुश्किल है,मेरी ख़ातिर उसे आसान कर देना…अब इसके बाद दोबारा मुझे न याद आना तुमअगर ये हो सके तो जान मुझको भूल जाना

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