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व्यर्थ न बैठो काम करो तुम- डॉ एन के सेठी
मनहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’
प्रकृति का इंसाफ- मोहम्मद अलीम
हिन्दी कविता: अब तो पाठ पढ़ाना है
भीम बाबा पर कविता
अलविदा मेरे चाहने वाले-कमल यशवंत सिन्हा ‘तिलसमानी’
जल की महिमा गाथा-चालीसा
दोहे करते बात – बाबू लाल शर्मा
गीता ग्रंथ है पवित्र पावन- मनीभाई नवरत्न
पर मेरा लाल नहीं हो वह -बाबू लाल शर्मा बौहरा
दहेज दानव
नज़्म – मुझे समझा रही थी वो
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