एक सितारे की मौत
समाज और यथार्थसुशान्त सिंह राजपूत की आत्महत्या पर केन्द्रित लेख
नारी पर दोहे ★★★★नारी की यशगान हो ,नारी की ही रूप ।नारी के सहयोग से,मिलते लक्ष्य अनुप।। नारी बिन कब पूर्ण है?एक सुखी परिवार।नारी जो सुरभित रहे, सुखी रहे संसार।। जग में जो करता नहीं , नारी का सम्मान।कहलाये वह क्यो मनुज ,वह है पशु समान।।★★★★★★★★★★★★★रचनाकार – डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”
नारी पर दोहे- डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर” Read More »
वर्तमान परिस्थितियों में कवियों की सम्मान के प्रति अति मोह पर व्यंग्य करती कविता
मर गया कवि सम्मान के चक्कर में – मनीभाई नवरत्न Read More »
प्रेम आधारित छोटी सी कहानी
अंजलि और प्रताप की लव स्टोरी- मनीभाई नवरत्न Read More »
मनीभाई नवरत्न की अपने मित्र अंकित भोई अद्वितीय से साक्षात्कार
मनीभाई की अद्वितीय चर्चा – साक्षात्कार विधा Read More »
बचपन को आधार मानकर लिखी गई मनीभाई नवरत्न की तांका आप के समक्ष प्रस्तुत
अल्हड़ बचपन -मनीभाई नवरत्न (तांका विधा) Read More »
तांका विधा के बारे में जानकारी तांका जापानी काव्य की कई सौ साल पुरानी काव्य विधा है। इस विधा को नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के दौरान काफी प्रसिद्धि मिली। उस समय इसके विषय धार्मिक या दरबारी हुआ करते थे। हाइकु का उद्भव इसी से हुआ। तांका की वर्ण योजना इसकी संरचना ५+७+५+७+७=३१ वर्णों की
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आत्म व्यंग्य पर कविता आत्म विज्ञापन अधिक तो,लेखनी कमजोर है,गीत गूँगे हो रहे हैं,बक रहा बस शोर है ।। टिमटिमाते बुझ रहे हैं, नेह के दीपक यहाँ।और नफरत का अँधेरा, छा रहा घनघोर है ।। रात रोती, चाँद तारे हैं सिसकते भूख में ।हो गया खामोश चिड़ियों के बिना अब भोर है।। दंभ का झटका
आत्म व्यंग्य पर कविता करती कविता- रेखराम साहू Read More »
आज हमारी पर्यावरण संकट में है यदि वृक्षारोपण करके इसका संरक्षण ना किया जाये तो हम सबका भविष्य खतरे में है । इस पर आधारित बाल कविता से यह सीख लीजिये
बाल कविता- धरती पर कविता (आचार्य गोपाल जी) Read More »
यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। मां पर कविता वो दिन भी कितने अच्छे थे । जब हम सब छोटे बच्चे थे । नित मां
सपना पर आधारित कविता आँखों में सपने लिए , बढ़ती मैं हर रोज ।मंजिल मुझे पुकारती , करते मेरी खोज ।। साजन के सपने लिए ,मैं आई ससुराल ।रंग सभी भरने लगे , होती आज निहाल ।। हमने देखा है सजन , सपना सुंदर आज ।जो अपने संबंध हैं , इसकी रखना लाज ।। सपने
माधुरी मंजरी में सपना पर आधारित कविता – माधुरी डड़सेना मुदिता Read More »