कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

ओ नारी- मनीभाई नवरत्न

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता,

ओ नारी- मनीभाई नवरत्न जिन्दगी चले ना, बिन तेरे ओ नारी!उठा ली तूने,  सिर अपने  ऐसी जिम्मेदारी । मर्दों ने नाहक किये खुद पे ऐतबार ।सच तो यह है कि नारी होती जग की श्रृंगार ।महक ऐसे , फूल जैसे खिल उठे क्यारी क्यारी ।रोशन होता रहे तेरा जी,  फैले ज्ञान की चिनगारी ।। संयमित […]

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विश्व दूरदर्शन दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ,

विश्व दूरदर्शन दिवस पर कविता समाज का एक वर्गइतराता नहीं ये कहने से,मूल्यों के विघटन मेंदूरदर्शन का हाथ है ।पर पवित्र ना होदृष्टिकोण तोलगता है दिन भीघनघोर रात है ।। कहीं चूक है अपनी जोमित्र दूरदर्शन हो रहा दोषी ।वरना ताकाझांकी चलती सदाकि क्या कर रहा अपना पड़ोसी? ज्ञान है, विज्ञान हैमनोरंजन की खान है

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पृथ्वी दिवस विशेष : ये धरा अपनी जन्नत है

हिंदी कविता, ,

ये धरा अपनी जन्नत है ये धरा,अपनी जन्नत है।यहाँ प्रेम,शांति,मोहब्बत है। ईश्वर से प्रदत्त , है ये जीवन।बन माली बना दें,भू को उपवन।हमें करना अब धरती का देखभाल।वरना पीढ़ी हमारी,हो जायेगी कंगाल।सब स्वस्थ रहें,सब मस्त रहें।यही “मनी” की हसरत है॥1॥ ये धरा …… चलो कम करें,प्लास्टिक का थैला।उठालें झाड़ु हाथों में,दुर करें मैला।नये पौधे लगायें,

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12 मई नर्स दिवस पर विशेष कविता

नारी जीवन और संवेदना,

12 मई नर्स दिवस पर विशेष कविता मौत की दहलीज में ,जब कोई हो पड़े-पड़े।खून से लथपथ ,अंग भंग हो के सड़े-सड़े ।अपने तक तरस खाते,देख दूर खड़े-खड़े ।तब एक महिला ,पस-दुर्गंधों से लड़े-लड़े।अस्पताल में महत्वपूर्ण है इसकी भूमिका ।“सिस्टर”कहते सब जिसे,वो है परिचारिका। बीमारी की पहचान में डॉक्टर करता काम।पर निदान प्रक्रिया में नर्स

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शहीद दिवस विशेष कविता

हिंदी कविता

शहीद दिवस विशेष कविता क्या शहीद दिवस मना लेना;इस पर कोई कविता बना लेना;तस्वीर स्मारक में फूल चढ़ा देना;बच्चों को उनके बारे में पढ़ा देना;सच्ची श्रद्धांजलि हो सकती है? क्या आज जरूरत नहीं हमें,भगत,सुखदेव,राजगुरू बनने की;भारतमाँ के लिये सर्वस्व लुटाने की;उनके विचारों को अमल में लाने की;उनके सपनों के भारत बनाने की ? हम चाहते

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गरमी महीना छत्तीसगढ़ कविता

हिंदी कविता

गरमी महीना छत्तीसगढ़ कविता किंदर किंदर के आवथें बड़ेर,“धुर्रा-माटी-पैरा-पान” सकेल।खुसर जाय कुरिया कोती अन,लकर-लकर फेरका ल धकेल।हव! आगे ने दिन बिन-बूता पसीना के।ए जम्मो चिन्हा हावे गरमी महीना के।। डम-डम डमरू बजावत,आवत हे ठेलावाला।रिंगी-चिंगी चुसकी धरे,दिखत हे भोलाभाला।लईका कूदे देखके ओला।पईसा दे दाई जल्दी से मोला।अऊ दाई देय चाउर,भर-भर गीना के।ए जम्मो चिन्हा हावे गरमी

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शौचालय विशेष छतीसगढ़ी कविता

हिंदी कविता

शौचालय विशेष छतीसगढ़ी कविता सुधारू केहे-“कस रे मितान!तोला सफई के,नईये कछु भान।तोर आस-पास होवथे गंदगीइही च हावे सब्बो बीमारी के खान।” बुधारू कहे-“मय रेहेंव अनजान।लेवो पकड़त हावों मोरो दूनों कान।लेकम येकर सती, का करना चाही संगी ?अहू बात के,  कर दो बखान। सुधारू कहे-“हमर सरकार लमहतारी मोटियारी के चिंता हावे।शौचालय बना लेवो जम्मोये मे अब्बड़

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मनखे के कोरा भक्ति पर व्यंग्य

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

हनुमान जंयती   “धरव -पकड़व -कुदावव”अउ सब्बो झन तोआवव।चढ़गय बेंदरा रूख म त,ढेला घलव बरसावव।अइसने करम करत हावे,आज के मनखे।मनावत हे “हनुमान जयंती”सीधवा अस बनके। सबों जीव के रखबो जीजूरमिल के मानबेंदरा घलव ल तोजानव हनुमानबड़ सुघ्घर नता हावे,बेंदरा अऊ इनसान के।बड़ भारी सेना रहिन ,श्रीराम भगवान के । हनुमान-राम के नता ल,सब्बोझन जानथे।बेंदरा तभ्भे

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manibhai Navratna

सुधारू बुधारू के गोठ -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

सुधारू बुधारू के गोठ (छत्तीसगढ़ी व्यंग्य) बुधारू ह गांव के गौंटिया के दमाद के भई के बिहाव म जाय बर फटफटी ल पोछत राहे।सुधारू ओही बखत आ धमकिस।अऊ बुधारू ल कहिस -“कइसे मितान!तोर फूफू सास के नोनी ल अमराय बर (कन्या विदाई ) जात हस का जी।”बुधारू कहिस -“लगन के तारीक ह एके ठन हे

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महाभारत अर्जुन और कृष्ण

गीता एक जीवन धर्म

हिंदी कविता

गीता एक जीवन धर्म यह कविता भगवद गीता के महत्व और उसके जीवन में अनुपालन के लाभ को दर्शाती है। इसे आगे बढ़ाते हुए प्रस्तुत है: गीता का ज्ञान गीता महज ग्रंथ नहीं, है यह जीवन धर्म।अमल कर उपदेश को, जान ले ज्ञान मर्म।गीता से मिलती, जीने का नजरिया।सुखमय बनाती जो अपनी दिनचर्या। ज्ञान झलके

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महाभारत अर्जुन और कृष्ण

गीता सार पर कविता

हिंदी कविता

यह कविता गीता के उपदेशों की महत्ता और उसके जीवन में अनुपालन से मिलने वाले सुख और शांति को दर्शाती है। गीता का ज्ञान हमें सही दिशा में चलने और जीवन को सफल और संतोषजनक बनाने की प्रेरणा देता है। गीता सार पर कविता नाहक तू शोक मनाय ,     डरता तू अकारन।आत्मा अजर अमर बंधु,

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