कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

कोरोना पर कविता

समाज और यथार्थ

कोरोना पर कविता वुहान चीन से फैल कोरोना ,दुनियाभर में हाहाकार मचाया ।छोटे बड़े सभी देशों में,खलबली मचाया ।। इटली अमेरिका जैसे,देश भी बच नहीं पाये ।विश्व के कोई देश,अपने को बचा नहीं पाये।। घर में रहकर,लॉकडाउन का पालन करना होगा।परिवार को सुरक्षित रख,देश को बचाना होगा ।। कोरोना से बचने,मास्क,सेनेटाइजर लगाना होगा ।अपना कर्तव्य […]

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माँ की वह आँख पर कविता

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ की वह आँख पर कविता जब मैंने सुना कि माँ की एक आँख की रोशनी चली गई हैसहसा

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प्रधानमंत्री पर कविता

हिंदी कविता

प्रधानमंत्री पर कविता प्यारे बच्चों ! सुप्रभातकल प्रधानमंत्री जीआप लोगों के साथ सीधे वार्तालाप करेंगेआप अनुशासित रहेंगेमतलब इधर-उधर नहीं देखेंगेअपने से कुछ भी नहीं बोलेंगेप्रधानमंत्री जी की बातों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देंगेचुपचाप प्रधानमंत्री जी की बातों को ध्यानपूर्वक सुनेंगे हम आपको कुछ प्रश्न देंगे(जो प्रश्न हमें दिया जाएगा)वे प्रश्न चुनिंदा बच्चों को दिए

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मेरी और पत्नी पर कविता

हिंदी कविता

मेरी और पत्नी पर कविता – 30.04.2022 मेरी पत्नी दोपहर बादअक़्सर कुछ खाने के लिएमुझे पूछती हैमैं सिर हिलाकरसाफ मना कर देता हूँमेरे मना करने सेउसे बहुत बुरा लगता हैकि मैंने उसकी मेहनत और प्यार सेबनाई चीजों का तिरस्कार किया है पर उसे पता नहीं होताकि मेरे खाने की इच्छा होने पर भीमैं जब-जब उसकी

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क्रोध पर कविता

हिंदी कविता

क्रोध पर कविता मुझे नहीं पतापहली बारमेरे भीतरकब जागा था क्रोधशुरूआत चिनगारी-सी हुई होगीआज आग रूप मेंसाकार हो चुकी हैफिर भी इतनी भीषण नहीं हैकि अपनी आंच से किसी को बुरी तरह झुलसा देअपनी तीव्र लपट से जला दे किसी का घरया राख कर दे किसी की फसलों से भरी खेतहाँ कभी-कभीअपनी क्रोध की ऊष्मा

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यह ज़िन्दगी पर कविता

हिंदी कविता

यह ज़िन्दगी पर कविता रंगीन टेलीविजन-सी यह ज़िन्दगीलाइट गुल होने परबंद हो जाती है अचानककाले पड़ जाते हैं इसके पर्देबस यूँ ही–अचानक थम जाती हैहमारी उम्रऔर थम जाते हैंजीवन और मृत्यु के अहसासऔर सारे रहस्य। — कुलमित्र9755852479

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बताइये आप कौन हैं

प्रकृति और पर्यावरण

बताइये आप कौन हैं कुछ लोग हामी भरने मेंबड़े माहिर होते हैंपर काम कुछ भी नहीं करतेउनके मुख से हमेशानिकलता है हाँ-हाँ-हाँइनके शब्दकोश में ‘ना’ शब्द नहीं होताये कभी ना कहते ही नहींज़बान से कभी मुकरते ही नहींकाम करो या न करोइनके लिए हाँ कहना ही स्वामीभक्ति होती है कुछ लोग हाँ कहने के बादकाम

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कैमरे पर कविता

हिंदी कविता

कैमरे पर कविता वे रहते हैं ब्लैकआउट कमरों मेंवे हमें देखकर चलते है दांवबंद होते हैं उनके दरवाज़े और किवाड़हर बार हमारे साथ होता है खिलवाड़ हम देख नहीं पातेकोई भी उनकी कारगुजारियांकोई भी चालाकियां…. अब गए वो ज़मानेजब दीवारों के भी कान होते थे। — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र9755852479

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सुबह पर कविता

हिंदी कविता

सुबह पर कविता सुबह-सुबह सूरज ने मुझेआकर हिचकोलाऔर पुचकारते हुए बोलाउट्ठो प्यारेसुबह हो गई हैआलस त्यागोमुँह धो लो मैंने करवट बदलते हुएअंगड़ाई लेते हुएलरजते स्वर में बोलासूरज दादाबड़ी देर में सोया थाथोड़ी देर और सोने दो नमुझे आजअपने उजास के बदलेथोड़ा-सा अंधकार दो न सूरज दादा नेहँसते हुए बोलाअरे पगले !जो है नहीं मेरे पासवह

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आख़िर गुस्तागी पर कविता

हिंदी कविता

आख़िर गुस्तागी पर कविता अहम से भरा मूर्तिमानराजन ऊँचे आसन परविराजमान थाचाटुकार मंत्रीगणउनके नीचे इर्द गिर्द बैठे हुए थे दरबार में मेरी पेशी थीमुझे ही मेरी गुस्ताख़ी पता नहीं थामुझ पर कुछ आरोप भी नहीं थेमन ही मन सोचा–आख़िर मेरी पेशगी क्यों..?मन से ही उत्तर मिलाहाँ ! यह पेशगी राजा के ‘अहम’ के वास्ते होगा

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आविष्कारों पर कविता

हिंदी कविता

आविष्कारों पर कविता ये जो रेफ्रीजरेटरवैज्ञानिकों ने बनाया हैकमाल हैसब्ज़ी भाजी को सड़ने नहीं देताऔर खाने पीने की चीजों कोरखता है बड़ा ठंडा-ठंडा कुल-कुल ये एयर कंडीशनर भीबड़े कमाल के हैंबड़ी ज़ल्दी हीछू मंतर कर देती हैहमारे शरीर की सारी तपन इतने आविष्कारों के बावजूदइन दिनोंएक भी मशीननहीं है हमारे पासजो लोगों कीमनसिकता को सड़ने

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मुझे पता है कविता

हिंदी कविता

मुझे पता है कविता खौफ़ में क्या बोलेगा मुझे पता है। रात को दिन बोलेगा मुझे पता है।1। वक़्त आने पर  मेरे पक्ष में कोई नहीं बोलेगा मुझे पता है।2। साजिशें हैं उनकी गवाह भी उनके जज क्या बोलेगा मुझे पता है।3। ज़ुल्म के ख़िलाफ़ इस जंग में आखिर ईमान बोलेगा मुझे पता है।4। मेरी

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