कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

गंजापन पर कविता

हिंदी कविता

गंजापन पर कविता मेरा मित्र गंजाथा बहुत हिष्ट पुष्ट और चंगातपती धूप में अकेले खड़ा थाउसका दिमाग़ न जानेकिस आइडिया में पड़ा था?मेरा बदन तो धूप में जल रहा थापर गंजा मित्र धूप में खड़ा होकरअपने सर में सरसो तेल मल रहा था?मैंने कहा-मित्र टकलेहो गया है क्या तू पगलेतेज धूप में खड़े होकरसर क्यों […]

गंजापन पर कविता Read More »

कवि पर कविता

हिंदी कविता

कवि पर कविता ?मेरा मित्रएक कवि को दूर से आता देखअचानक रुकने लगाबगल वाली गली में जाकरन जाने क्यों छुपने लगामैंने कहा-यारकवि से उधार लिया है पैसाया चुराया है उसका भैंसाअगर नहीं तोकवि से तुझे क्या परेशानी हैवह तो कवि खानदानी हैइस तरह कवि से छुपनाकवि का अपमान हैकवि तो साक्षातटाइमपास का सामान हैतुझे देखकर

कवि पर कविता Read More »

शराब पर कविता

हिंदी कविता

शराब पर कविता कुण्डलिया छंद पीना छोड़ शराब को,इससे है नुकसान।तन मन खूब खराब हो,बीमारी की खान।।बीमारी की खान,रखो अपने सुध बुध को।खुश हो घर परिवार,रोक लेना तुम खुद को।छोड़ शराबी यार,अगर बढ़िया से जीना।नशा पान बेकार,कभी मत इसको पीना।। मधुशाला दर छोड़ दे,इससे तन बर्बाद।पीते आज शराब जो,पछतावा हो बाद।।पछतावा हो बाद,मिले जब घर

शराब पर कविता Read More »

मंजूर नहीं पर कविता

हिंदी कविता

मंजूर नहीं पर कविता संघर्षों में ही काटूंगा मैं अपना सारा जीवन क्योंकि मुझे किसी तरह से भी किसी रूप में भी किसी कारण वश भी कदम दर कदम पर समझौता करना मुझे मंजूर नहीं।।

मंजूर नहीं पर कविता Read More »

आत्मविश्वास पर कविता

हिंदी कविता

आत्मविश्वास पर कविता मानसिक शक्ति में वृद्धि ला,सुविचार आत्मविश्वास बढ़ा।सरल व्यक्ति की धनी बनकर,मन की चिंता दूर हटा । अंत: भावना जीवन मे ला,जीवन क्षेत्र में हौसला बढ़ा।प्रगति को शिखर में लाकर,कठिन कार्य को सक्षम बना। स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े,सत्य अहिंसा के अस्त्र बने ।भारत को स्वतंत्रता दिलाकर,गांधी जी देश के बापू बने। समय

आत्मविश्वास पर कविता Read More »

dr bhimrao ambedkar

भीमराव आंबेडकर पर कविता / Poem on BR Ambedkar in hindi

समाज और यथार्थ

भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।[1] उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। भीमराव आंबेडकर पर कविता

भीमराव आंबेडकर पर कविता / Poem on BR Ambedkar in hindi Read More »

शिव स्तुति-रमेश शर्मा

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता शिव स्तुति भगवान शिव पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

शिव स्तुति-रमेश शर्मा Read More »

श्रमिक पर कविता

हिंदी कविता

श्रमिक पर कविता खून पसीना एक कर,करता जग कल्याण।औरों के हित के लिए, देता अपने प्राण।।????स्वेद बहे मजदूर का, तभी बने आवास।जीवन में पाता वही, श्रम से करे प्रयास।।????श्रम जीवन में जो करे, होता बड़ा महान।इसके बल पर ही वही, पाता जग में मान।।????कठिन परिश्रम से मनुज,पत्थरभी पिघलाय।करे परिश्रम जो यहाँ, वही सफलता पाय।।????करे परिश्रम

श्रमिक पर कविता Read More »

खीर पर कविता

हिंदी कविता

खीर पर कविता मम्मी मम्मी खीर बना दोचम्मच चम्मच खाएँगे एक कटोरी मुझको देनाएक कटोरी मुन्नी कोथोड़ी सी उसको भी देनाखाला की उस चुन्नी को गरम गरम जो निकले पूड़ीपल में चट कर जाएँगेमम्मी मम्मी खीर बना दोचम्मच चम्मच खाएँगे पतला चावल बढ़िया रहताटेस्टी खीर बनाने मेंपिस्ता,चिरौंजी साथ उसमेंमजा उड़ा लो खाने में केसर पत्ती

खीर पर कविता Read More »

mosquito

विश्व मलेरिया दिवस पर कविता /राजकिशोर धिरही

हिंदी कविता

विश्व मलेरिया दिवस पर कविता /राजकिशोर धिरही बचना मच्छर काट से,मानो मेरी बातमच्छरदानी को लगा,नींद पड़े दिन रात।।नींद पड़े दिन रात,हटे बाधा तब सोना।स्वच्छ रहे घर द्वार,साफ हो कोना कोना।।मलेरिया से दूर,सुरक्षा घेरा रचना।उड़ते मक्खी कीट,सदा इनसे तुम बचना।। पानी आँगन में भरे,बाहर उसको फेंक।मच्छर का लार्वा बढ़े,बीमारी की टेक।।बीमारी की टेक,गंदगी बढ़ता जाता।मलेरिया ज्वर

विश्व मलेरिया दिवस पर कविता /राजकिशोर धिरही Read More »

राजकिशोर धिरही के गजल

हिंदी कविता

राजकिशोर धिरही के गजल कमाई पाप की हो वो खजाना छोड़ दो अब सेमिलाकर दूध में पानी कमाना छोड़ दो अब से भरोसा जिंदगी का ख़ौफ़ में आकर रहें कब तकमुहब्बत है तुम्हीं से बस सताना छोड़ दो अब से गली में चाँद निकले देखने की कुछ इजाजत होनियम जो जान लेती हो बनाना छोड़

राजकिशोर धिरही के गजल Read More »

प्यासा पंछी पर कविता-प्रेमचन्द साव

प्रकृति और पर्यावरण

प्यासा पंछी पर कविता मन है उदास भटकता फिरे ।जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।मन को ना कोई बांध सके। तो खुले आकाश की खोज करे ।मन की उड़ान खुशियों की पुकार करे ।जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे । फूलों में भौंरे जैसे गुंजन करे ।मन की इच्छा वैसे ही हिलोरे करे ।जैसे प्यासा पंछी

प्यासा पंछी पर कविता-प्रेमचन्द साव Read More »

Scroll to Top