कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

विश्वास की परिभाषा – वर्षा जैन “प्रखर”

हिंदी कविता

विश्वास की परिभाषा विश्वास एक पिता का कन्यादान करे पिता, दे हाथों में हाथयह विश्वास रहे सदा,सुखी मेरी संतान। योग्य वर सुंदर घर द्वार, महके घर संसारबना रहे विश्वास सदा, जग वालों लो जान। विश्वास एक बच्चे का पिता की बाहों में खेलता, वह निर्बाध निश्चिंतउसे गिरने नहीं देंगे वह, यह उसे स्मृत। पिता के प्रति बंधी […]

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आदि भवानी-रामनाथ साहू ” ननकी ”                  

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। आदि भवानी नवदुर्गा नव रूप है ,               

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अमित अनुभूति के दोहे

हिंदी कविता

अमित अनुभूति के दोहे लिखने वाला लिख गया, उल्टे सीधे छंद।बिना पढ़े कहते सभी, रचना बहुत पसंद।~1 कविता लेखन थोक में, मनमर्जी के संग।शब्द शिल्प आहत हुए, भाव बड़ा बेढंग।~2 सृजनहार समृद्ध कहाँ, सुलझे नहीं विचार।कविताई  के नाम पर, करता  है  व्यापार।~3 तुकबंदी करता फिरे, जीवन भर षटमार।यत्र-तत्र छपने लगा, बनके रचनाकार।~4 नालायक नायक बना,

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सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता

हिंदी कविता

सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता तो मैं क्या करूँ ? आज आसमाँ भी रोया मेरे हाल परऔर अश्कों से दामन भिगोता रहा,वो तो पहलू से दिल मेरा लेकर गयेऔर मुड़कर न देखा तो मैं क्या करूँ ? उनकी यादें छमाछम बरसती रहींमन के आंगन को मेरे भिगोती रहींखून बनकर गिरे अश्क रुख़सार पर,कोई पोंछे न

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स्वच्छता पर कुंडलिया

समाज और यथार्थ

स्वच्छता पर कुंडलिया घर घर में अब देश के, मने स्वच्छता पर्व।दूर करें सब गंदगी, खुद पर तब हो गर्व।खुद पर तब हो गर्व, न कोई कोना छोड़ें।बदलें आदत सर्व, समय का अब रुख मोड़ें।नद नालें हो साफ, बहे जल उनमें निर्झर।नया स्वच्छता भाव, पले भारत के हर घर।।1 साफ-सफाई के लिये, चलें नये अभियान।सर्व

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प्लास्टिक मिटा देंगे हम

समाज और यथार्थ

प्लास्टिक मिटा देंगे हम दुनिया से प्लास्टिक मिटा देंगे हम. हम तुम सनम चलो खाले कसम |दुनिया से प्लास्टिक मिटा देंगे हम | ये गलता नही मिट्टी मे मिलता नही |खाती गाये पेट उनके पचता नहीं | मरती गायों को मिल बचाएंगे हम |हम तुम सनम चलो खाले कसम | इसके बर्तन बोतल इस्तेमाल न करो

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मदारी-दिलीप कुमार पाठक “सरस”

हिंदी कविता

“मदारी” बँदरिया प्यारी,        एक मदारी,           लेकर आया|तन लटा,      कपड़े फटे,          पेट धँसा,             फिर भी,            जबर्दस्ती मुस्कराया||जेठ का महीना,         भरी दोपहरी,              चूता पसीना, डमरू बजाकर,         बँदरिया नचाकर,  

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गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी

विरह और दर्द, हिंदी कविता

गरीबी का दर्द क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरीसुख गया है आंखों के पानीरिमझिम बारिश की फुहार मेंसमेट रखा है आंचल मेंगरीब तेरी कहानी कोउपहास बनायेगी ये दुनियातू कल भी फुटपाथ पर थाआज भी तेरी यही कहानी हैगरीब था तू गरीब रहेगावंचित तू अपने तकदीर से रहेगासुन गरीब लगा लें जोरअपना अस्तित्व बचा ले अबअब ना

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हिमा नजर आ रही है-सुरेन्द्र सैनी

नारी जीवन और संवेदना

हिमा नजर आ रही है हिम्मत तेरे हौसले मेंहिमा नजर आ रही हैदेश के तिरंगे का क्या खूब मान बढ़ा रही है उड़नपरी बन कर क्या खूब दौड़ लगाईचटा के धूल सबकोगोल्ड तू ले आई तेरा कद भी हिमा हिमालय से बडा हैदेश सारा तेरे लियपलके बिछाय खड़ा है बेटियों की हिम्मतनारी का तू मान है देश की उभरती

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तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है -बाँके बिहारी बरबीगहीया

हिंदी कविता

तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है तू सम्भल जा अब भी वक्त ये तुम्हारा है समझो इस जीवन को ये तो बहती धारा है। प्यार इजहार के लिए वक्त यूँ जाया न कर वक्त के साथ ये तो डूबता किनारा है।। ये जो रंगीन लम्हे लेके जी रहे हो तुमये तो क्षण भर की

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रास नहीं क्यों आता है-राजकिशोर धिरही

हिंदी कविता

रास नहीं क्यों आता है शौचालय का अभियान चला,वंचित घर रह जाता है।बाहर जाते बच्चे उनके,रास नहीं क्यों आता है जाति भेद को करते रहते,जलते रहते बढ़ने सेटाँग अड़ाते फिरते रहते,रोका करते पढ़ने से चाँद पर जा रही है दुनिया,बैरी के मन काले हैंखुले में शौच करने से ही,हत्या कर डाले हैं रंजिश रखते हैं

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आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे-सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप”

प्रकृति और पर्यावरण

आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे ब्रह्मपुत्र की गोद में,बसा हुआ आसाम। प्रथम किरण रवि की पड़े,वो कामाख्या धाम।।  हरे-हरे बागान से,उन्नति करे प्रदेश। खिला प्रकृति सौंदर्य से,आसामी परिवेश।। धरती शंकरदेव की,लाचित का ये देश। कनकलता की वीरता,ऐसा असम प्रदेश।। ऐरी मूंगा पाट का,होता है उद्योग। सबसे उत्तम चाय का,बना हुआ संयोग।। हरित घने बागान में,कोमल-कोमल

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