कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मै भी एक पेड़ हूं मत काटो

हिंदी कविता

मै भी एक पेड़ हूं मत काटो   (१)गली गली में मै हूं, छाया तुम्हे देता हूं।खेतों की पार में हूं, वर्षा भी कराता हूं।शीतल हवा देता हूं ,चुपचाप मै रहता हूं।देखो भाई मत काटो,मै भी एक पेड़ हूं।।                  (2)मीठा फल देता हूं , खट्टा फल देता […]

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summer sea

भोजपुरी पर्यावरण लोक गीत -जून दुपहरिया में

समाज और यथार्थ

जून दुपहरिया में जून दुपहरिया मे देहिया जरेला |सूखल होठवा पियासिया लगेला | सुना मोरे सइया |कईसे बीतिहे गरमिया के दिनवा हमार |सुना मोरे सइया | पेड़वा का छांव नाही ,चले केवनों उपाय नाही |टप-टप चुवेला पसीनवा चैन कही आय नाही |सुना मोरे सइया |ले आई देता एसी कूलर घरवा हमार |सुना मोरे सइया | गउआ

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मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से

हिंदी कविता

मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से,। मैं मरुं नित असहनीय पीडा से, मैं गुजरता नित कठिन परिस्थितियों से, मेरी सुंदरता कोमल शाखाओं से,उमर से पहले ही रहता मानव, मुझे काटने को तैयार, पल भर में करता अपाहिज और लाचार, पीपल, बरगद, नीम और सालकाट दिए मेरे अनगिनत साथी विशाल, शैतानी मानव कर रहा, अपना रेगिस्तानी

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इश्क़ के रोग की गर तू जो दवा बन जाए

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इश्क़ के रोग की गर तू जो दवा बन जाए । रात दिन भीगते है बिन तेरे मेरे नैनाबिन तेरे मिलता नही मुझको अब कही चैनाहर घड़ी याद की भरी स्याहीमुझको तड़पाने रात ले आईंतू जो बारिश की तरह आके मुझे मिल जाए,बादलों की तरह ये दर्द हवा हो जाये ।। इश्क़ के रोग की

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सुलगता हुआ शहर देखता हूँ

हिंदी कविता

सुलगता हुआ शहर देखता हूँ   इधर भी उधर भी जिधर देखता हूँ,सुलगता हुआ हर शहर देखता हूँ, कहीं लड़ रहे हैं कहीं मर रहे हैं,झगड़ता हुआ हर नगर देखता हूँ, कहीं आग में जल न जाए यहाँ सब,झुलसता हुआ हर बसर देखता हूँ, सियासत बहुत है घिनौना यहाँ पर,छिड़कता हुआ अब जहर देखता हूँ,

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माँ गंगा का अवतरण दिवस

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ गंगा का अवतरण दिवस अवतरण दिवस माँ गंगा का दशमी  तिथि थी जेष्ठ मास इसके पावन तट पर मनुज ने किया 

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तुम पर लगे इल्जामातमुझे दे दो

हिंदी कविता

तुम पर लगे इल्जामातमुझे दे दो तुम अपने अश्कों की सौगातमुझे दे दोअश्कों में डूबी अपनी हयातमुझे दे दो जिस रोशनाई ने लिखेनसीब में आंसूखैरात में तुम वो दवातमुझे दे दो स्याही चूस बन कर चूस लूंगाहरफ  सारेरसाले में लिखी हर इक बातमुझे दे दो जमाने से तेरी खातिर टकरा जाऊँगाजो तुम पर लगे इल्जामातमुझे दे

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मेरे वो कश्ती डुबाने चले है

हिंदी कविता

मेरे वो कश्ती डुबाने चले है रूठे महबूब को हम मनाने चले है |अपनी मजबूरीया उनकों सुनाने चले है | जो कहते थे तुम ही तुम हो जिंदगी मेरी  |बीच दरिया मेरे वो कश्ती डुबाने चले है | ख्यालो ख्याबों मेरी  सूरत उनका था दावा |डाल गैरो गले बाहे वो मुझको भुलाने चले है |

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मानवता की छाती छलनी हुई

हिंदी कविता

मानवता की छाती छलनी हुई विमल हास से अधर,नैन वंचित करुणा के जल से।नहीं निकलती पर पीड़ा की नदीहृदय के तल से।। सहमा-सहमा घर-आँगन है, सहमी धरती,भीत गगन है ।लगते हैं अब तो जन-जन क्यों जाने ?हमें विकल से । स्वार्थ शेष है संबंधों में, आडंबर है अनुबंधो में ।मानवता की छाती छलनी हुईमनुज के छल से । ——R.R.Sahuकविता

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कंगन की खनक समझे चूड़ी का संसार

नारी जीवन और संवेदना

कंगन की खनक समझे चूड़ी का संसार नारी की शोभा बढ़े, लगा बिंदिया माथ।कमर मटकती है कभी, लुभा रही है नाथ। कजरारी आँखें हुई,  काजल जैसी रात।सपनों में आकर कहे,  मुझसे मन की बात। कानों में है गूँजती, घंटी झुमकी साथ।गिर के खो जाए कहीं, लगा रही पल हाथ। हार मोतियों का बना, लुभाती गले

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धूल पर दोहे

नारी जीवन और संवेदना

धूल पर दोहे पाहन नारी हो गई,पाकर पावन धूलप्रभु श्रीराम करे कृपा,काँटे लगते फूल महिमा न्यारी धूल की,केंवट करे गुहारप्रभु पग धोने दीजिए,तभी चलूँ उस पार मातृभूमि की धूल भी,होता मलय समानबड़भागी वह नर सखी,त्यागे भू पर प्रान आँगन में सब खेलते,धूल धूसरित ग्वालमात यशोदा गोद ले,चुमती मोहन गाल कृष्ण पाद रज धो रहे,बहा नैन

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बस तेरा ही नाम पिता

हिंदी कविता

बस तेरा ही नाम पिता        उपर से गरम अंदर से नरम,ये वातानुकूलित इंसान है!पिता जिसे कहते है मित्रो,वह परिवार की शान है!! अच्छी,बुरी सभी बातो का,वो आभास कराते है!हार कभी ना मानो तुम तो,हर पल हमै बताते है!! वो नही है केवल पिता हमारे,अच्छे,सच्चे मित्र भी है!परिवार गुलशन महकाए,ऎसा ब्रंडेड ईत्र भी

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