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निशा गई दे करके ज्योति
हिन्दी बिन्दी भूल गये सब
कागा की प्यास
धरती हमको रही पुकार
धुआँ घिरा विकराल
विनाश की ओर कदम
कर डरेन हम ठुक-ठुक ले
धरती के श्रृंगार
विश्व पर्यावरण दिवस पर दोहे
वृक्ष कोई मत काटे
प्रकृति मातृ नमन तुम्हें
कुछ तोड़ें कुछ जोड़ें
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