कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

डाँ. आदेश कमार पंकज के दोहे

हिंदी कविता

डाँ. आदेश कमार पंकज के दोहे पाई पाई जोड़ के बना खूब धनवान । संस्कार नहीं जानता कैसा तू नादान ।। करता लूट खसोट है वा रे वा इन्सान । लालच में है घूमता बिगड़ गई सन्तान ।। क्यों तू लालच कर रहा करता फिरता पाप । सोने सा अनमोल तन बना रहा अभिशाप ।। […]

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सामाजिक बदलाव पर छत्तीसगढ़ी कविता

हिंदी कविता

सामाजिक बदलाव पर छत्तीसगढ़ी कविता करलई होगे संगी ,करलई होगे गा।छानी होगे ढलई ,करलई होगे गा ।।पहिली के माटी घर ,मोला एसी लागे।करसी के पानी म ,मोर पियास भागे।मंझन पहा दन, ताश अऊ कसाड़ी म।टेढ़ा फंसे रे ,   हमर बिरथा-बाड़ी म।ए जमाना बदलई ,  करलई होगे गा ।करलई होगे संगी ,   करलई होगे गा ॥

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17 मई विश्व दूरसंचार दिवस के अवसर पर एक कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

विश्व दूरसंचार दिवस १७ मई को मनाया जाता है। यह दिन 17 मई 1865 को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना की स्मृति में विश्व दूरसंचार दिवस के रूप में जाना जाता था। वर्ष1973 में मैलेगा-टोर्रीमोलिनोन्स में एक सम्मेलन के दौरान इसे घोषित किया गया। इस दिन का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट और नई प्रौद्योगिकियों द्वारा लाया गया सामाजिक परिवर्तनों की

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मानव समानता पर कविता

हिंदी कविता

मानव समानता पर कविता हम मानव मानव एक समान।हम सब मानव की संतान ।धर्म-कर्म भाषा भूषा से ,हमको ना किञ्चित् अभिमान ।हिंदू की जैसे वेद पुराण ।बस वैसे ही बाइबल और कुरान ।सब में छुपी हुई है एक ही ज्ञान।सभी बनाती है मनुष्य को महान।छोड़ दो करना लहूलुहान ।मानवता धर्म की कर पहचान ।धर्म जाति

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शादी से पहले

समाज और यथार्थ

शादी से पहले मैं जीना चाहता थाएकांत जीवन प्रकृति के सानिध्य में।पर न जाने कब उलझासेवा सत्कार आतिथ्य में ।अनचाहे  विरासत में मिलीदुनियादारी की बागडोर ।धीरे-धीरे जकड़ रही हैमुझे बिना किए शोर।कभी तौला नहीं थाअपना वजूद समाज के पलड़ों में ।अब जरूरी जान पड़ताकि पड़ूँ दुनियादारी के लफड़ों में ।सुख चैन मिलता सहजशादी से पहले

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विदाई के पल पर कविता

हिंदी कविता

विदाई के पल पर कविता वर्षों से जुड़े हुए कुछ पत्तेआज बसंत में टूट रहे हैं ।जरूरत ही जिनकी पेड़ मेंफिर भी नाता छूट रहे हैं। यह पत्ते होते तो बनती पेड़ की ताकत ।इन की छाया में मिलती सबको राहत ।पर सबको मंजिल तक जाना है।सबने बनाई है अपनी-अपनी चाहत ।इन की विदाई से

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आओ स्कूल चलें हम

हिंदी कविता

आओ स्कूल चलें हम आओ स्कूल चलें हम,स्कूल में खुब पढ़ें हम।जब तक सांसे चले,तब तक ना रुके कदम । पढ़ लिख के बन जाएं नेहरू।खुले गगन में उड़ेगें बन पखेरू।गाता रहे हमारी सांसो की सरगम।जैसे परी रानी की पायल की छम छम।आओ स्कूल चले हम …. आज इरादे हैं हमारे कच्चेकल पढ़कर हो जाएंगे

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कमाए धोती वाला खाए टोपी वाला

हिंदी कविता

कमाए धोती वाला खाए टोपी वाला तेरी व्यथा,तेरी कथा,समझे ना ये दुनिया।लूटा तुझे अमीरों ने, पकड़ा दिया झुनझुनिया ।तूने आग में चलके ,पड़ाया रे पांव में छाला ।कमाए धोती वाला ,खाए टोपी वाला ।।1।। खड़े किए ,तूने सैकड़ों मंजिल ।फिर भी निडर तेरा ,दहला ना दिल ।तेरे खुन काम से हाथों में ,जब बह आए

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ममतामयी माँ -मनीभाई “नवरत्न”

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। ममतामयी माँ लाई दुनिया में पीड़ा सहकर।बचपन बीता माँ-माँ कहकर।स्वर्गानंद लिया गोद में रहकर।आशीष रहा उनका मुझ पर।एक शख्स

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राणा की तलवार

हिंदी कविता

राणा की तलवार पावन मेवाड़ भू पर जन्मेमहाराणा प्रताप  शूर वीरअकबर से  संघर्ष  कियाकई वर्षों तक बनकर धीर lदृढ़  प्रतिज्ञा  वीरता  मेंनाम तुम्हारा रहे  अमरघास की रोटी खाकर तुमनेशत्रु से किया संग्राम समर lतलवारों के वार से जिसकेअकबर थर थर थर्राता थाबुलंद हौसलों का सिपाहीमहाराणा वो कहलाता था lतलवार हवा में जब चलतीचहुँ ओर मचाती

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इधर-उधर की मिट्टी

हिंदी कविता

इधर-उधर की मिट्टी ऐ! हवाये मिट्टी जो तुमसाथ लाई होये यहाँ कीप्रतीत नहीं होतीतुम चाहती हो मिलानाउधर की मिट्टीइधर की मिट्टी मेंऔर इधर की मिट्टीउधर की मिट्टी मेंतभी तो लाती होले जाती होसीमा पार मिट्टीलेकिन कुछ ताकतें हैंइधर भीउधर भीजो नहीं चाहतीइधर-उधर की मिट्टीआपस में मिले। -विनोद सिल्‍ला©771/14, गीता कॉलोनीडांगरा रोड़, टोहानाजिला फतेहाबाद, हरियाणापिन कोड 125120संपर्क

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नशे में चित

हिंदी कविता

नशे में चित मेरा शहर है विख्यातनहरों की नगरी के नाम सेआज मैं घूमते-घूमतेपहुँचा नहर परपानी लड़खड़ाता-सातुतलाता-साहोश गवांकर बह रहा था बहते-बहतेपानी संग बह रहे थेप्‍लास्‍टिक के खालीडिस्‍पोजल गिलास-प्‍लेटचिप्स-कुरकरे के खाली पैकेटशराब व खारे कीप्‍लास्‍टिक की खाली बोतलेंजो फैंके गए हैंप्रयोग के बाद थोड़ा आगे बढा तोसजी थी महफिलेंथोड़े-थोड़े फांसले सेनहरों के दोनों ओर लेकिन

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