(स्वीकृति के गुलाम, सत्य से अनजान)
समाज और यथार्थSlaves of Approval, Strangers to Truth(स्वीकृति के गुलाम, सत्य से अनजान)(दृष्टान्त सहित, लम्बी विचारप्रद अतुकांत कविता) सच यह है—तुम किसी और के गुलाम नहीं हो।तुमअपने डर के गुलाम हो,अपनी लालसा के गुलाम हो।और कोई मालिक नहीं। तुम्हारे जीवन केसबसे निजी कोने तकएक ही सवालदम घोंटता रहता है—“वे क्या सोचेंगे?” तुम बोलते होक्योंकि लोग देख रहे
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