कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

(स्वीकृति के गुलाम, सत्य से अनजान)

समाज और यथार्थ

Slaves of Approval, Strangers to Truth(स्वीकृति के गुलाम, सत्य से अनजान)(दृष्टान्त सहित, लम्बी विचारप्रद अतुकांत कविता) सच यह है—तुम किसी और के गुलाम नहीं हो।तुमअपने डर के गुलाम हो,अपनी लालसा के गुलाम हो।और कोई मालिक नहीं। तुम्हारे जीवन केसबसे निजी कोने तकएक ही सवालदम घोंटता रहता है—“वे क्या सोचेंगे?” तुम बोलते होक्योंकि लोग देख रहे

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उधार की रोशनी के पार

समाज और यथार्थ

उधार की रोशनी के पार(Beyond Borrowed Light)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) सबसे गहरी जिज्ञासाकठोर प्रश्न से शुरू होती है—औरविनम्र मौन मेंसमाप्त होती है। हम जाँचते नहीं,मान लेते हैं।किसी पुराने धर्माचार्य ने कहा—तो सच होगा।किसी अमीर,किसी सत्ता-शिखर,किसी प्रसिद्ध चेहरे ने बोला—तो सही ही होगा। घर की परंपरा है,समाज की रीति है—इसलिएहम झुक जाते हैं। पर क्याहम

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The Stainless Mind

हिंदी कविता

The Stainless Mind प्रतिक्रिया नहीं—सचेत उत्तर चाहिए,जहाँ मन उछलता नहीं,ठहरकर देखता है। उकसावे से नहीं,स्पष्टता से जन्मे कर्म—तीव्र हों, सुंदर हों,पर मजबूरी से नहीं। जो तुरंत भड़कता है,वह अपना नहीं रहता,उसके कर्मदूसरों की चिंगारियों कीउधार ली हुई आग होते हैं। घाव, घाव को जवाब देता है—यही तो कैद है,न मौलिकता,न स्वतंत्रता। मन भी एक पात्र

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सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता संस्कारों में जकड़ामनप्रेम कोजान ही नहीं सकता। “मैं तुम्हेंहमेशा प्रेम करूँगा”—अक्सरइसका अर्थ होता है:जब तकतुम मुझेसुख देते रहो। जिसेहम प्रेम कहते हैं,वहअक्सरशर्तों कागठ्ठर होता है—औरवहउसी समय तकज़िंदा रहता हैजब तकपरिस्थितियाँअनुकूल रहती हैं। सुनकरचुभता है न? सदियों सेतारे गवाह रहे हैं—हाथों में हाथ,आँखों में सपने,आवाज़,शरीर,रंग,आकृति सेमोहितलोगों नेअनंतता कीकसम खाई। औरफिरइतना

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स्क्रिप्ट के बाहर घटता प्रेम

प्रेम और रिश्ते, समाज और यथार्थ, हिंदी कविता

स्क्रिप्ट के बाहर घटता प्रेम प्रेमस्वाभाविक नहीं है।स्वाभाविक हैजंगल—सीमा खींचना,कब्ज़ा करना,हार्मोन का शोर। यहीजंगल-प्रेम है—जो सहज आता है,औरआसानी सेहिंसक हो जाता है। सच्चा प्रेमवहाँ शुरू होता हैजहाँजंगल पार किया जाए,जहाँसमाज की सिखाई हुईपरिभाषाएँभुला दी जाएँ। जितना स्पष्टतुमअपनी कंडीशनिंग देखते हो,उतना ही कमदूसरों सेचौंकते हो। हमव्यक्ति नहीं हैं,हमस्क्रिप्ट हैं—प्रशिक्षित,प्रोग्राम किए हुए,पूर्वानुमेय। परक्योंकिहम अपनी हीस्क्रिप्ट नहीं देखते,इसलिएजीवनहमें

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जिसे तुम प्रेम करते हो, वही बन जाते हो

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

जिसे तुम प्रेम करते हो, वही बन जाते हो यदिकीचड़ से प्रेम किया,तोकेंचुआ बनोगे। यदिआकाश से प्रेम किया,तोपंख उगेंगे। झूठा प्रेमढलान है—उस परफिसलने के लिएकुछ करना नहीं पड़ता।इसीलिए कहते हैं—प्रेम में गिरना। गिरनाहमेशाआसान होता है। परसच्चा प्रेमचढ़ाई है। उसके लिएहोश चाहिए,संकल्प चाहिए। वहतुम्हेंजकड़ेगा नहींजब तकतुमस्वयंझुको नहीं। वहशासन नहीं करेगाजब तकतुमस्वेच्छा सेसमर्पण न करो। यही विडंबना

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“जैसे हो, वैसे ही रहो?”

मन और भावनाएँ

“जैसे हो, वैसे ही रहो?” गलत के साथ रहने सेअकेला होनाकहीं बेहतर है। पूछो अपने मन से—जो तुम्हारे साथ है,वह तुम्हेंबल दे रहा हैयाधीरे-धीरेकमज़ोर बना रहा है? क्या वहतुम्हें मुक्त करता है,यादेखभाल के नाम परपिंजरे मेंढाल देता है? जो सीमाएँ खींचे,जो उड़ान से डरे,जो कहे—मैं तुम्हारी भलाई चाहता हूँऔर तुम्हेंछोटा बनाए रखे—वह न मित्र है,न

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कल्पना से परे प्रेम

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

कल्पना से परे प्रेम प्रेमकिसी को पकड़ने का नाम नहीं,प्रेम हैपकड़ने की जरूरत सेमुक्त हो जाना। जब सारी उम्मीदेंटूटकर गिर जाती हैं,जब यह साफ दिखने लगता हैकिअचेत मनुष्यों के बीचप्रेम संभव ही नहीं—तभीप्रेम की पहली संभावनाजन्म लेती है। यह समझ आना किजिसे हम प्रेम कहते रहे,वह प्रेम था ही नहीं—यहीजागरण की शुरुआत है। बहुत समय

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ऊष्मा में टूटता प्रेम

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

ऊष्मा में टूटता प्रेम जो प्रेमरसायन की देन हैवह ताप माँगता है,निकटता का दबाव,परिस्थिति की अनुकूलता। थोड़ी-सी गर्मी,थोड़ा-सा आकर्षण,और दो अस्तित्वबंधन में बँध जाते हैं—जैसे हाइड्रोजनऑक्सीजन से मिलकरपानी बन जाए। देखने मेंदोनों विलीन हो गए,कुछ नया जन्मा।पर सत्य यह नहीं। वे गए नहीं,बस छिप गए।परिस्थिति बदली,बंधन टूटा,और दोनोंफिर अपने-अपने नाम सेखड़े हो गए। ऐसा ही

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प्यार जो आपको आज़ाद करता है

मन और भावनाएँ

Love That Sets You Free(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अगर किसी रिश्ते कोपरखना हो,अगर संगति कीगुणवत्ता जाननी हो—तोया तोसच की बात शुरू करो,याफालतू शोरबंद कर दो। खुद से पूछो—क्या यह प्रेम है?तो देखो,उस व्यक्ति की संगतितुम्हारे भीतरक्या जगाती है— उथल-पुथलयाशांति? क्या वहअपनी मौजूदगीमनवाना चाहता है,यातुम्हेंअपने पैरों परखड़ा करना चाहता है? क्या उसके पास रहकरअसुरक्षाऔर अधिकार-बोधबढ़ता

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आधा और आधा एक चौथाई होता है

मन और भावनाएँ

Half and Half Is a Quarter(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अकेलेपन से जन्मे रिश्तेपूरा नहीं करते—वेआधेपन कोसिर्फदूसरे आधे सेढक देते हैं। अधिकतर रिश्तेसम्पूर्णता से नहीं,कमी से शुरू होते हैं। मैं तुम्हें चाहिए,तुम मुझे चाहिए—यह मिलन नहीं,यह समझौता है। मैं तुम्हारी चाह पूरी करूँगा,तुम मेरी।लेन-देन कीइस चुप डील कोहमप्रेम कह देते हैं। और जिस दिनकोईकाम का

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इच्छा निवेश करती है, प्यार पोषण करता है।

हिंदी कविता

Desire Invests, Love Nurtures(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अगर कोईतुम्हारे जीवन मेंइसलिए हैकि वहतुम्हारी ज़रूरतें पूरी करे,तो वहाँ प्रेम नहीं—बसआसक्ति है,निर्भरता है,जकड़न है,और धीरे-धीरेपीड़ा है। ज़रूरत पर टिका रिश्ताअहिंसक नहीं हो सकता,वहएक सूक्ष्म हिंसा है—जहाँ देना नहीं,पाना मुख्य लक्ष्य होता है। अधिकतर लोगप्रेम कोइच्छा कासभ्य नाम दे देते हैं।और इच्छाहमेशा निवेश करती है—लाभ के लिए।

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