कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

तथाकथित श्रेष्ठता

हिंदी कविता

तथाकथित श्रेष्ठता मुंडेर को था घमंड अपनी श्रेष्ठता पर देहली पर बड़ी इतराईबड़ी लफ्फाजी कीबड़ी तानाकशी कीअपनी उच्चता केमनगढ़ंत दिए प्रमाण ताउम्र उसी देहली पर चढ़कर खड़ी रही मुंडेर जिसको वहकमतर व नीचीकहती न थकी एक दिन आया जलजलाचरमरा कर ढह गई मुंडेर आ कर गीरीदेहली के पास छू मंत्र हो गई तथाकथित श्रेष्ठता। -विनोद […]

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आज यह कैसी घड़ी

हिंदी कविता

भीड़ अब आगे बढ़ी, स्वार्थ में खूब अड़ीतंत्र हो गया घायल, आज यह कैसी घड़ी। कौन चोर कौन चौकीदार, पता नहीं चले यहाँअपनों के बीच खड़ी दुनिया, लगती कुटिल है यहाँभोले- भाले भूखे- प्यासे, बेघर हो घूमें जहाँआँखों में आँसू हैं उनके, हाय अब जाएँ कहाँ नीति भी सिर पर चढ़ी, हाथ में जादू- छड़ीकहीं

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राम-नाम विधा :- चौपाई

हिंदी कविता

राम-नाम विधा :- चौपाई राम-नाम लगे सबको प्यारा |सबने ही तन-मन में धारा ||राम सभी के पूज्य कहावे |सच्चे मन से सब जन ध्यावे || सबको सद् का मार्ग दिखाते |बीच भँवर से पार लगाते ||प्रभु नाम की जपे जो माला |रहते उन पर सदा कृपाला || छण में दुष्ट ताड़का मारी |छूँ कर शिला

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नन्हे बहादुर-लाल बहादुर शास्त्री जी

नारी जीवन और संवेदना

नन्हे बहादुर-लाल बहादुर शास्त्री जी दोहा छंद सदी बीस प्रारंभ में, चलती चौथी साल।दो अक्टूबर को लिए, जन्म बहादुर लाल।। जन्मे मुगल सराय में, वाराणसी सनेह।राम दुलारी मात थी, पिता शारदा गेह।। बचपन में गुजरे पिता, पले बढ़े ननिहाल।निर्धनता का सामना, करते पढ़ते लाल।। फिर चाचा के पास में, पहुँचे मुगलसराय।शिक्षा मे रह अग्रणी, लाल

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मनहरण घनाक्षरी -दशहरा

हिंदी कविता

किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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चिरनिन्द्रा-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

चिरनिन्द्रा जीत कर चुनाव हमारे राजनेतासो जाते हैं चिरनिंद्रा मेंचार वर्ष बाद चुनावी वर्ष में हीखुलती है इनकी जाग जागते हीलग जाते हैं फिर सेसाम-दाम-दण्ड-भेद आजमाने में छल-बल करकेजीत जाते हैं पुन: चुनाव उठाते हैं फायदाआम जनमानस कीचिरनिन्द्रा का जाने यह चिरनिन्द्राकब खुलेगी ? -विनोद सिल्ला

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doha sangrah

नवदुर्गा पर दोहा – बाबूलाल शर्मा

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। ]शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। नवदुर्गा पर दोहा ~ १ ~मात शैल पुत्री प्रथम, कर पूजन नवरात।घट स्थापन पूजा करें, मिले सर्व सौगात।।. ~ २ ~ब्रह्मचारिणी

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राष्ट्र भाषा पर छंद- बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

राष्ट्र भाषा पर छंद सुखद हिन्द महान बनाइए।मधुर बोल सदैव अपनाइए।प्रगति कारक भारत हो तभी।सरस काम करें अपना सभी। अजब ज्ञान भरें शुभदा लिए।सहज भावभरोस भव्य किए।गुण सभी इसमें जग आगरी।लखअमोलक है लिपि नागरी। महक मानवतामय है सिखो।मन लगाकर जागउठी लिखो।सँवर जाय तभी जग जानिये।बढ़ उठे शुचि भारत मानिये। जगत हिंद सु-बोल जगाइए।सरलता शुभ है

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शिक्षा ज्ञान का दीपक है कविता -बाबूराम सिंह

समाज और यथार्थ

शिक्षा ज्ञान का दीपक है कविता सौभाग्यसे मिलाहै नरतन इसे सुफल बनाओ।शिक्षा ज्ञान का दीपकहै सरस सदा अपनाओ।। बिनविद्या नर पशु समहै कहती दुनियां सारीछाया रहता जीवन है में चहुँदिश अँधियारी।ज्ञान ध्यान भगवान बिना माया रहती है घेरे-सबकुछ होता ज्ञान बिना मति जाति है मारी। अतः ज्ञानालोक हेतु शिक्षा को सेतु बनाओ।शिक्षा ज्ञान का दीपक

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर कविता दिखा गए जो मार्ग यहाँ वे, उसको सब अपनाएँदीनदयाल उपाध्याय जी को हम भुला न पाएँ। सन् उन्निस सौ सोलह में पच्चीस सितंबर आईनगला चंद्रभान मथुरा में, खुशियाँ गईं मनाईपिता भगवती प्रसाद जी माता बनीं राम प्यारीउठा पिता का साया फिर थी, संघर्षों की बारी वे मेधावी

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jai durga maa

माँ दुर्गा पर कविता -बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। माँ दुर्गा पर कविता -बाबुराम सिंह नित चरणों में रहे श्रध्दाभाव वर दो भक्ति अनन्य हो। मातेश्वरी तूं धन्य हो।।अज-जग में

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beti

बेटी पर कविता – सुशी सक्सेना

हिंदी कविता

बेटी पर कविता – सुशी सक्सेना मेरी बिटिया, मेरे घर की शान है।मेरे जीने का मकसद, मेरी जान है। पता ही न चला, कब बड़ी हो गई,मेरी बिटिया अपने पैरों पे खड़ी हो गई,मेरे लिए अब भी वो एक नन्हीं कली है,मेरे अंगना कि एक चिड़िया नादान है। या रब, हर बुरी नजर से उसे

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