KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
Browsing Tag

शीत ऋतु सम्बंधित

शीत में निर्धन का वस्त्र- अखबार

शीत में निर्धन का वस्त्र -अखबार काया काँपे शीत से, ओढ़े तन अखबार। शीत लहर है चल रही, पड़े ठंड की मार। पड़े ठंड की मार, नन्हा सा निर्धन बच्चा। शीत…

शीत ऋतु का अंदाज

शीत ऋतु का अंदाज शीत ऋतु की ठंडी हवाएं,लगता मानो शरीर को चीर के निकल जाए।ठिठुरते-कांपते शरीर में भी दर्द हो जाता,जब सर्दी का पारा ऊपर चढ़ जाता।

जड़कल्ला के बेरा -छत्तीसगढ़ी कविता

आगे रे दीदी, आगे रे ददा, ऐ दे फेर जड़कल्ला के बेरा। गोरसी म आगी तापो रे भइया , चारोखुँट लगा के घेरा॥ रिंगीचिंगी पहिरके सूटर,नोनी बाबू ल फबे हे। काम…