कविता बहार

शिक्षक जग विख्यात है करे राष्ट्र निर्माण

समाज और यथार्थ

डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा […]

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जब तक तन में प्रान

हिंदी कविता

करो लोकहित तुम मनुज जब तक तन में प्रान देश सदा उन्नति करे ,मन में लेना ठान ।करो लोकहित तुम मनुज ,जब तक तन में प्रान ।। है स्वतंत्र यह देश है ,बनो नहीं अंजान ।निर्भर होना छोड़ तू,इसकी बन पहचान ।। जाति-पाति के भेद से ,रहो सदा ही दूर ।एक देश के लाल हो

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हिम्मत रख

हिंदी कविता

हिम्मत रख मल्लाह तूफानों के बीच में बनकर नन्हा दीप , तूफानों से लड़ रहा ।निश्चित जीत महीप , कृपा दृष्टि प्रभु आपकी ।। सफर नहीं आसान , साथी बढते ही चलो ।बहुत बड़ा तूफान , लहरों के कारण कई ।। तूफां का है शोर , अंदर हलचल है मची।डरावनी द्युति घोर , हुआ अँधेरा

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विरोधाभासपूर्ण कविता

हिंदी कविता

विरोधाभासपूर्ण कविता आर आर साहू, छत्तीसगढ़ हो न यदि संवेदना पर पीर की,मोल क्या जानोगे श्री रघुवीर की! दुष्ट दुर्योधन दुशासन हैं जहाँ,दुर्दशा है द्रौपदी के चीर की। सत्य को सूली लगाकर आज वो,छद्म पूजा कर रहे तस्वीर की। रौशनी की ओट ले फूली-फली,सल्तनत अंधेर के जागीर की। पाप को मन में छिपा तन धो

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शंकर छंद विधान : शिव महिमा -रमेश शर्मा

हिंदी कविता

शिव महिमा (शंकर छंद विधान) : 26 मात्रा 16,10पर यति पदान्त गुरु लघु प्रति दो चरण तुकांत।प्रस्तुत कविता शंकर छंद विधान पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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धनतेरस पर कविता

हिंदी कविता

धनतेरस पर कविता अमृत कलश के धारक,सागर मंथन से निकले।सुख समृद्धि स्वास्थ्य के,देव आर्युवेद के विरले।चार भुजा शंख चक्र,औषध अमृत कलश धारी।विष्णु के अवतार हैं देव,करें कमल पर सवारी।आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि,हैं आरोग्य के देवता।कार्तिक त्रयोदशी जन्म हुआ,कृपा करें धनदेवता।पीतल कलश शुभ संकेत,देते हैं यश वैभव भंडार।आर्युवेद की औषध खोज,किया जगत का उद्धार।धनतेरस को यम

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रेंगा प्रतियोगिता : सुख व दुःख जीवन के दो रूप

प्रकृति और पर्यावरण

रेंगा प्रतियोगिता दिनांक : 13 मई 2017 सुख व दुःखजीवन के दो रूपछाँह व धूप □ प्रदीप कुमार दाश दीपकदोनों रहते साथकर्मों के अनुरूप □ मधु सिंघीसच्चे हों कर्मसब तो तेरे हाथफिर क्यों चुप □ मनीलाल पटेलप्रकृति के नियमदुःख के बाद सुख □ गीता पुरोहितहवा ने कहापतझड़ का दुखसहते रहो □ देवेन्द्रनारायण दासइसी ताने बाने

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कोरोना को नहीं बुलाओ

प्रकृति और पर्यावरण

कोरोना को नहीं बुलाओ पटाखों का मोह छोड़कर दीवाली में दीप जलाओ।प्रदूषण फिर से फैलाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। हरसाल दिवाली आयेगी हम सबको यह हर्षायेगी।खुशियों पर पैबंद लगाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। बच्चे, बुजुर्ग और जवान हमारे घर की सभी है शान।डर स्वास्थ्य का फैलाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। मानव जाति पर बन आई

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छंद क्या है? इसके प्रमुख अंगों को जानिए

मन और भावनाएँ

सामान्यतः लय को बताने के लिये छन्द शब्द का प्रयोग किया गया है। यह अंग्रेजी के ‘मीटर’ अथवा उर्दू-फ़ारसी के ‘रुक़न’ (अराकान) के समकक्ष है। छंद क्या है? विशिष्ट अर्थों या गीत में वर्णों की संख्या और स्थान से सम्बंधित नियमों को छ्न्द कहते हैं जिनसे काव्य में लय और रंजकता आती है। छंद व्यवस्था

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