कविता बहार

गुरु महिमा – मदन सिंह शेखावत

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भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप […]

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सरस के दोहे -दिलीप कुमार पाठक सरस

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सरस के दोहे 1-जय माता हे शारदे ,मेटो मन का मैल|हस्त रखा जब शीश पर, गया उजाला फैल|| 2-साफ सफाई जो करे, रहता स्वस्थ निरोग|तन मन जिसका स्वस्थ है,उसके सारे भोग|| 3-जय जय हिन्दी घर मिला, प्यार मिला भरपूर|आप सभी इस दास को, करना मत अब दूर|| 4-कूड़ा कूड़ादान में, डाले हर परिवार |दूर रखो

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वक़्त पर हमने अगर ख़ुद को संभाला होता

हिंदी कविता

वक़्त पर हमने अगर ख़ुद को संभाला होताज़ीस्त में मेरी उजाला ही उजाला होता दरकते रिश्तों में थोड़ी सी तो नमी होतीअपनी जुबान को जो हमने सम्हाला होता तुमको भी ख़ौफेे – खुदा यार कहीं तो होताकाश ! रिश्तों को मोहब्बत से संभाला होता दर- ब -दर ढूंढ़ रहा जिसको बशर पत्थर मेंकाश ! दिल

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यह समय है सोच का-मधुसिंघी

समय और जीवन दर्शन

यह समय है सोच का भाग रहा मानव से मानव , डर समाया मौत का।कोरोना वायरस ले आया , एक साया खौफ का।।मनु पड़ गया उलझन में , कैसे बचूँ इस विपदा से।भीड़ में हुआ अकेला , विश्वास नहीं है और का।। प्रकृति पर हो गया हावी , सोचा यह तो मुट्ठी में।चाँद पर घूम

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उत्सव की घड़ियाँ-मधुसिंघी

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गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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गणपति अराधना- कवयित्री क्रान्ति

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गणपति अराधना विघ्नहारी मंगलकारीगणपति लीला अनेक-2 सज रहे हैं मंडप प्रभुबज रहे हैं देखो तालझूम रहे हैं भक्त तुम्हारेप्रभु कर उनका उद्धारविघ्नहारी…………….गणपति…………..2 हर घर में तेरी छवि प्रभुतू ही सबका तारण हारदुखियों की झोली भर देप्रभु कर इतना उपकारविघ्नहारी……………..गणपति……………..2 जल रहे हैं दीपक प्रभुमिट रहा है अंधकारतेरे ही गुणगान से आजगूंज रहा देखो संसारविघ्नहारी…………गणपति…………….2

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निषादराज के दोहे : जय गणेश 

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निषादराज के दोहे जय गणेश  जय गणेश जय गजवदन,कृपा सिंधु भगवान।मूसक वाहन  दीजिये, ज्ञान बुद्धि वरदान।।01।। शिव नंदन गौरी तनय, प्रथम पूज्य गणराज।सकल अमंगल को हरो,पूरण हो हर काज।।02।। हाथ जोड़ विनती करूँ, देवों के सरताज।भव बाधा सब दूर हो,ऋद्धि सिद्धि गणराज।।03।। मंगलकारी देव तुम,मंगल करो गणेश।जग वंदन तुम्हरे करें,काटो सबका क्लेश।।04।। गिरिजा पुत्र गणेश

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वोट -विनोद सिल्ला

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वोट- विनोद सिल्ला तेरा वोट उन्हेंबैठा देगासिंहासन परलगा देगाउनकी गाड़ी परलाल बत्तीवो अपनों कोठेके दिलवाएंगेआला अधिकारियों कीकसरत करवाएंगेलूट-लूट के वतन को खाएंगेपूरे पाँच सालबदले मेंतुझे क्या मिलेगाबस एक बोतल शराबजिसका नशामतदान के तुरंत बादउतर जाएगा. -विनोद सिल्ला©

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सखी रे तीज पर्व आया है( दूजराम साहू)

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सखी रे तीज पर्व आया है सखी रे तीज पर्व आया है,भाई उपहार लाया है !गुँज रहीं सारी गलियाँ,बचपन याद आया है !! बरसों बाद मिलीं सखियाँ ,पुरानी बातें याद आयी !हँसी – ठिठोली कर रही है,देखों फिर बचपन आया है !! ये पावन पर्व आया है,भाई घर मनाना है !सदा सुहागन की आशीषपरमेश्वर से

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हरितालिका तीज – राजेश पान्डेय वत्स

नारी जीवन और संवेदना

हरितालिका तीज!(घनाक्षरी) भाद्रपद शुक्ल पक्ष, पावन तृतीया तिथि,पूजन निर्जला ब्रत,रखें नारी देश के! माता रूप मोहनी सी, श्रृँगारित सोहनी सी,उम्र यश लंबी माँगे,अपने प्राणेश के! दृढ़वती धर्मधारी, सुहागिन या कुँवारी,वर लेती यदि मानें, ग्रंथों के आदेश के! मुदित मधुर मन, शिव गौरी आराधना,श्रद्धा लिये वत्स कल, पूजा फिर गणेश के! –राजेश पान्डेय वत्स!0821(हरितालिका तीज २०७७)

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खुशबु-विनोद सिल्ला

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खुशबु फूलों मेंहोती है खुशबुनहीं होती फूलों में हीहोती हैकुछ व्यक्तियों केव्यवहार में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों केकिरदार में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों केस्वभाव में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों कीप्रवृत्ति में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों कीवाणी में भीलेकिनउपरोक्त खुशबु के स्वामीसभी नहीं होते -विनोद सिल्ला©

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ढोंगी पर कविता – सतीश बब्बा

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ढोंगी पर कविता चलती रेल में एक पंडित,सफाचट मूँछें लम्बी चूँदी,देखता विरल नयनों से,बैठ सीट में आँखें मूँदी ! एक अधेड़ यात्री का,हाथ खोलकर लगा बताने,उसके बीते पलों की कहानी,जो उसके लिए थे अनजाने! अब भविष्य की बारी आई,रेल दुर्घटना की बात बताई,कुछ उपायों से बच सकते हो,रुपयों से की भरपाई ! चला गया फिर

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