कविता बहार

हाइकु

तांका विधा के बारे में जानकारी

हिंदी कविता

तांका विधा के बारे में जानकारी तांका जापानी काव्य की कई सौ साल पुरानी काव्य विधा है। इस विधा को नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के दौरान काफी प्रसिद्धि मिली। उस समय इसके विषय धार्मिक या दरबारी हुआ करते थे। हाइकु का उद्भव इसी से हुआ। तांका की वर्ण योजना इसकी संरचना ५+७+५+७+७=३१ वर्णों की

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आत्म व्यंग्य पर कविता करती कविता- रेखराम साहू

हिंदी कविता

आत्म व्यंग्य पर कविता आत्म विज्ञापन अधिक तो,लेखनी कमजोर है,गीत गूँगे हो रहे हैं,बक रहा बस शोर है ।। टिमटिमाते बुझ रहे हैं, नेह के दीपक यहाँ।और नफरत का अँधेरा, छा रहा घनघोर है ।। रात रोती, चाँद तारे हैं सिसकते भूख में ।हो गया खामोश चिड़ियों के बिना अब भोर है।। दंभ का झटका

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बाल कविता- धरती पर कविता (आचार्य गोपाल जी)

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आज हमारी पर्यावरण संकट में है यदि वृक्षारोपण करके इसका संरक्षण ना किया जाये तो हम सबका भविष्य खतरे में है । इस पर आधारित बाल कविता से यह सीख लीजिये

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mother their kids

मां पर कविता

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यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। मां पर कविता वो दिन भी कितने अच्छे थे । जब हम सब छोटे बच्चे थे । नित मां

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माधुरी मंजरी में सपना पर आधारित कविता – माधुरी डड़सेना मुदिता

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सपना पर आधारित कविता आँखों में सपने लिए , बढ़ती मैं हर रोज ।मंजिल मुझे पुकारती , करते मेरी खोज ।। साजन के सपने लिए ,मैं आई ससुराल ।रंग सभी भरने लगे , होती आज निहाल ।। हमने देखा है सजन , सपना सुंदर आज ।जो अपने संबंध हैं , इसकी रखना लाज ।। सपने

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किताब की महत्ता पर रमा की कविता

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किताब की महत्ता *किताब* नित किताब को मनुज पढ़, करले अर्जित ज्ञान।दिव्य आचरण तब बने, मिले जगत सम्मान।। सारे किताब श्रेष्ठ हैं, करना मत तू मोल।शिक्षित होने के लिए, दिव्य ज्ञान मन घोल।। पढ़ना लिखना सीख कर, करलो नेकी कार्य।पोथी पठन कर भव में, विद्या कर सिर धार्य।। ज्ञानालय में बैठकर, पढ़ते सभी किताब।विद्या धन

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स्वार्थी मत बन बावरे काम करो निःस्वार्थ- रामनाथ साहू ननकी के कुंडलियाँ

हिंदी कविता

स्वार्थी मत बन बावरे काम करो निःस्वार्थ स्वार्थी मत बन बावरे , काम करो निःस्वार्थ ।शुद्ध भाव से कीजिए , जीवन में परमार्थ ।।जीवन में परमार्थ , बैरता बंधन खोलो ।बस मीठे शुचि बोल , सदा सबसे तुम बोलो ।।कह ननकी कवि तुच्छ , कर्म बस करो हितार्थी ।परहित की ही सोच , कभी मत

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केवरा यदु “मीरा ” के अपने श्याम के दोहे

हिंदी कविता

श्याम के दोहे पागल मनवा ढूँढता, कहाँ मेरा चितचोर ।मन-मंदिर से झाँकता,मैं बैठा इस ओर।। पागल फिरता है कहाँ, जीवन है दिन चार ।वाणी में रस घोलिये,सदा सत्य व्यवहार।। पागल कहते लोग है,लगी श्याम से प्रीत ।नहीं मुझे परवाह है,गाऊँ उनके गीत ।। जब से देखा श्याम को,पगली सी है हाल।जादू तिरछी नजर का,जग माया

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मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां- पदमा साहू

हिंदी कविता

मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां मोर जनमभूमि के भुंईयां मा माथ नवावंव गा।मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां मा माथ नवावंव गा।।जनम लेंव इही माटी मा ,,,,,2इही मोर संसार आवय गा–मोर………………… इंहा किसम- किसम के बोलबाखा मय छत्तीसगढ़िया हावंव।छत्तीसगढ़ म मोर जनम भूमि,मय एला माथ नवावंव।पले- बढे हों इही माटी मा,,,,2एला कईसे मय भुलावंव गा —मोर……………………… संगवारी मन

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हल्दीघाटी एकलिंग दीवान…

समाज और यथार्थ

हल्दीघाटी एकलिंग दीवान बाबूलालशर्मा *विज्ञ* मन करता है गीत लिखूँ मैं,एक लिंग दीवाने पर।मातृ भूमि के रक्षक राणा,मेवाड़ी परवाने पर।।✍१चित्रांगद का दुर्ग लिखूँ जब,मौर्यवंश नि: सार हुआ।मेदपाट की पावन भू पर,बप्पा का अवतार हुआ।कीर्ति वंश बप्पा रावल के,मेवाड़ी पैमाने पर।मन करता है गीत लिखूँ मैं,एक लिंग दीवाने पर।।✍२अंश वंश बप्पा रावल का ,सदियों प्रीत रीति

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