छेरछेरा / राजकुमार ‘मसखरे’

छत्तीसगढ़ कविता

छेरछेरा / राजकुमार ‘मसखरे’ छेरिक छेरा छेर मरकनिन छेरछेरामाई कोठी के धान ल हेर हेरा. आगे पुस पुन्नी जेखर रिहिस हे बड़ अगोराअन्नदान के हवै तिहार,करे हन संगी जोरा…छेरछेराय बर हम सब जाबोधर के लाबो जी भर के बोरा…..! आजा चैतू,आजा जेठू आ जा ओ मनटोराजम्मों जाबो,मजा पाबो,चलौ बनाथन घेरा……छत्तीसगढ़ हे धान के सीघये हमर … Read more

रोटी / विनोद सिल्ला

रोटी / विनोद सिल्ला

रोटी सांसरिक सत्य तोयह है किरोटी होती हैअनाज कीलेकिन भारत में रोटीनहीं होती अनाज कीयहाँ होती हैअगड़ों की रोटीपिछड़ों की रोटीअछूतों की रोटीफलां की रोटीफलां की रोटीऔर हांयहाँ परनहीं खाई जातीएक-दूसरे की रोटी। -विनोद सिल्ला

प्रलय / रमेश कुमार सोनी

JALATI DHARATI

प्रलय / रमेश कुमार सोनी दिख ही जाता है प्रलय ज़िंदगी मेंदुर्घटना में पूरे परिवार के उजड़ जाने से,बाढ़,सूनामी,चक्रवात से औरकिसी सदस्य के घर नहीं लौटने सेप्रलय की आँखों में ऑंखें डालकरकौन कहेगा कि नहीं डरता तुझसे। आख़िरी क्षण होगा जब हम नहीं होंगेचिंता,फिक्र और तमाम सोच केउस पार होगी तो सिर्फ चिरनिद्राना भूख होगी … Read more

पालक जागरूकता पर कविता / डॉ विजय कन्नौजे

पालक जागरूकता पर कविता / डॉ विजय कन्नौजे

पालक जागरूकता पर कविता / डॉ विजय कन्नौजे बुलाते हैं शिक्षक पालक कोपर आते नहीं है लोग।पालक बालक जागरूक होशिक्षक को लगाते दोष।‌अनुशासन की पाठ कहें तोकुछ शिक्षक नही निर्दोष।गेहूं के संग है कुछ घुन पीसेशिक्षक गरिमा हो दोस्त।। शिक्षा विभाग पद गरिमामानते हैं लोग गुरूनंत।विद्यालय है एक मंदिरजहां बाल रूप भगवंत।। बाल पाल अरू … Read more

चमकते सितारे/ आशीष कुमार

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चमकते सितारे नन्हे नन्हे और प्यारे प्यारेआसमान में चमकते सितारेदेखा दूर धरती की गोद सेलगता पलक झपकाते सारे ऊपर कहीं कोई बस्ती तो नहींजहाँ के चिराग दिखाएँ नजारेउड़ा ले गया कोई जुगनुओं कोआकाशगंगा सा टिमटिमाते सारे जला आया कोई दीपक लाखोंया मोमबत्तियाँ धरती को निहारेंलालटेनों की रोशनी तो नहींजो सुबह-सवेरे बुझ जाते बेचारे जड़ दिए … Read more