मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

बेखुदी की जिंदगी- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

बेखुदी की जिंदगी… बेखुदी की जिंदगी हम जिया करते हैं। शायद इसलिए हम पिया करते हैं । रही सही उम्मीदें तुझ पर अब जाती रही।ना समझ बन गए हैं कोई सोच आती नहीं ।मिली तुझसे जख्मों को हम सीया करते हैं । बेखुदी की जिंदगी… बेशुमार दौलत क्या? हमको पता नहीं ।बेपनाह मोहब्बत क्या ?तुमको

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मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं।तुमसे हुए हर मुलाकातें सताते हैं ।क्यों उस दिन अनजान रहा ,तेरे चाहत का ना भान रहा ।अब जब पता है तू ही लापता है , कैसे मिलू तुझे?सोचकर हम घबराते हैं।मुझे तेरी हर बातें …. बीते कल में चेहरा तेरा खोजू,आजकल

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हे दीन दयालु हे दीनानाथ- मनीभाई नवरत्न

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हे दीन दयालु हे दीनानाथहे दीन दयालु, हे दीनानाथ !दीन की रक्षा करलें मांगे वरदान। हे कृपालु ,हे भोलेनाथ! हे कृपालु , हे भोलेनाथ!हीन की रक्षा कर ले मांगे वरदान । ऊंची चोटी पर तेरा वास है ।हर तरफ शांति, उल्लास है। छायी रहे ऐसे सदा, अमन से ये जहान। मांगे वरदान। हे दीन दयालु….

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मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है- मनीभाई नवरत्न मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है ।जैसे तेरी पहचान वैसे मेरी पहचान है। जो तू सोचता है वह मेरी सोच है ।जो तू खोजता है वह मेरी खोज है।इस बात पर भला क्यों अनजान है ? मैं इंसान हूं….जब मैं राहों से गुजरता हूं तु

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तुम तो लूटोगे ही प्यारे,लुटेरों की बस्ती में

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तुम तो लूटोगे ही प्यारे,लुटेरों की बस्ती में पुकार रहे हो किससे बंदेखुद ही हो रहबर अपना।छिप रहे हो कहां कहां पे कहीं नहीं है घर अपना ।। आबरू की फिक्र है तुझे जाएगी कभी जो सस्ती में ।।तुम तो लूटोगे ही प्यारे ,हुस्न पाई लुटेरों की बस्ती में।। तेरी जिद करने को हासिल इस

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मनीभाई के पिरामिड रचना

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मनीभाई के पिरामिड रचना ★कलम,कागज,कलमकार★मैंएकअबूझतुकबंदीकलमकारहोता ज्यों व्यथितदेता उसे आकारहै मेरे सहचरकलम कागजमुखर नहींमुझ जैसानिशब्ददोनोंही। मनीभाई”नवरत्न” मनीभाई के पिरामिड रचना ★मरणासन्न★ येमेरीकौन सीहै अवस्थाजहाँ से अबदिखता है सचहोने लगा पवित्रकैसी भुलभुलैयाअब चला पतामरणासन्नहकीकतजिन्दगीदिखादी। “मनीभाई”नवरत्न” मनीभाई के पिरामिड रचना ★रिश्ते नातों का जाल★ ये जगअजीबजहाँ परहोती सबकीअलग जिन्दगीतथापि समाहितरिश्ते नातों का जालखट्टी मीठी यादेंआगे बढ़ातीकहानी कोहरेकसिरेमें।“मनीभाई” नवरत्न,मनीभाई

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मन की आंखें

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मन की आंखें पात्र परिचय :-रागिनी –  एक कामकाजी लड़की।राजन-    अंधा व्यक्ति ।राहुल –   रागिनी की सहकर्मी । (रागिनी अपनी ऑफिस की ओर जा रही थी। रास्ते में एक अंधा आदमी सड़क किनारे खड़ा हुआ सड़क पार करने की कोशिश रहा था ।) रागिनी : (ऑटो से ही)भैया !अभी मुझे अपने ऑफिस तक नहीं जानी

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आ सनम आ मेरे दिल में तू आ

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आ सनम आ मेरे दिल में तू आ आ सनम आ ,मेरे दिल में तू आ।आ सनम आ मेरे दिल को चुराके जा । जाने जा मैंने तुम्हें प्यार किया ।रात दिन तुझे याद किया ।अब तो मुझसे रूठ के ना जा जा ।। फूलों से खुशबू आ रही ।भंवरे झुमके यह गा रही ।मैंने

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नवाजिश नवाजिश

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नवाजिश नवाजिश तू जो मिली होने लगी ,जीने की ख्वाहिश ।आई मेरे जीवन में तू , रब की नुमाइश।नवाजिश नवाजिश बस रब की नवाजिश। मुझको अपनी पनाह में ले ले ।सुन ले मेरी इल्तजा।कुछ ना भाये तेरे सिवा कैसा वक्त का तकाजा । तुझसे मिला, पूरी हूई मेरी फरमाइश।आई मेरे जीवन में तू , रब

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सायकिल दिवस कविता (Poem on World Cycle Day)

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सायकिल दिवस कविता (Poem on World Cycle Day) मनीभाई की कविता अपने बचपन में , की थी जिससे यारी। वो मेरी सायकिल,जिसमें करूँ सवारी । आज बदहाल पड़ा, कहीं किसी कोने में सेवा कर गुजारी, जिसने जिंदगी सारी। ना वो ईंधन लेता, ना फैलायें प्रदूषण । ना दुर्घटना का भय,सुरक्षित हो जीवन। ना कोई झंझट

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जो तुमसे हो गया है प्यार

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जो तुमसे हो गया है प्यार जिंदगी हर बार आती नहीं ,यादों में आकर तुम जाती नहीं ।तुम ना कर जाना इंकारजो तुमसे हो गया है प्यार ।। यादों में तेरे मैं हर पल छाया रहता ।सोचकर मैं तुमको हरदम मुसकाया रहता।अब तो दिल हो गया बेकरारजो तुमसे हो गया प्यार । पूछो यह तुम

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मेरे सांसों ने तेरे कानों में

हिंदी कविता

मेरे सांसों ने तेरे कानों में मेरे सांसों ने तेरे कानों मेंअपने दिल का पैगाम दिया ।गुजरी तुझ पर क्या जानेमन ?क्या इसका अंजाम हुआ? धोखा में ना रखना ,सनम तू मुझको ।बरसों से चाहत है चाहे तू मेरे दिल को ।खफा होने की बात क्या है ?ख्वाब तेरे हो तो जुदाई रात क्या है?यादों

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