दर्द पर दोहे- मदन सिंह शेखावत ढोढसर
विरह और दर्द, हिंदी कवितादर्द पर दोहे दर्द किसी को दे नही ,हे जग के करतार।दर्द देखा जाय नही ,किससे करू पुकार ।।1 दीन दुखी सब खुश हो, पीड़ा किसे न आय।सब जनता खुश हाल हो, विपदा नही सताय।।2 होती मन मे वेदना,दर्द दुखी कर जाय ।विपदा आफत टाल कर,सब की करे सहाय ।।3 दर्द किसी को दे नही,लौटे
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