हिंदी कविता

विघटन पर कविता

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विघटन पर कविता विघटन की चलती क्रिया , मत होना हैरान ।नियम सतत् प्रारंभ है , शायद सब अंजान ।।शायद सब अंजान , बदलते  गौर करो तुम ।आज अभी जो प्राप्त , रहे कल होकर ही गुम ।।कह ननकी कवि तुच्छ , चिन्ह रहते हैं उपटन ।कर जाता है काम , समय पर आकर विघटन

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मूर्ख कहते हैं सभी

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मूर्ख कहते हैं सभी मूर्ख कहते हैं सभी,उसका सरल व्यवहार है,ज्ञान वालों से जटिल सा हो गया संसार है। शब्द-शिल्पी,छंद-ज्ञाता,अलंकारों के प्रभो!क्या जटिल संवाद से ही काव्य का श्रृंगार है? जो नपुंसक हैं प्रलय का शोर करते फिर रहे,नव सृजन तो नित्य ही पुरुषत्व का उद्गार है। द्वेष रूपी खड्ग से क्या द्वेष का वध हो

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अनुभूति भाव पर कविता

हिंदी कविता

अनुभूति भाव पर कविता दृश्य देख अनुभूति से ,             आया अब विश्वास ।अपने उन्नति के लिए ,             लोग करे ठग रास ।। जिसका अनुभव है तुझे ,              करो वही तुम कृत्य ।तुझमें प्रतिभा है भरी ,       

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भाषा बड़ी है प्यारी -बासुदेव अग्रवाल नमन

हिंदी कविता

भाषा बड़ी है प्यारी भाषा बड़ी है प्यारी, जग में अनोखी हिन्दी,चन्दा के जैसे  सोहे, नभ में निराली हिन्दी। इसके लहू में संस्कृत, थाती बड़ी है पावन,ये सूर, तुलसी, मीरा, की है बसाई हिन्दी। पहचान हमको देती, सबसे अलग ये जग में,मीठी  जगत में सबसे, रस की पिटारी हिन्दी। हर श्वास में ये बसती, हर

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अरे लकीर के फकीरों

हिंदी कविता

अरे लकीर के फकीरों अपने-अपने मुहावरों परवे और तुमजिते आ रहे हो सदियों सेमुहावरा कभी बदला ही नहींन उनका न तुम्हारा शासक हैं वेबागडोर है उनके हाथों मेंवे अपने मुहावरों पररहते हैं सदा कायम तुम्हारे लिएवे जो भी कहते हैंकभी नहीं बदलतेचाहे जो हश्र हो तुम्हारावे अपने मुहावरों के पक्के हैं एक बार कह देने

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शिक्षक दीपक बन जले-माधुरी डड़सेना

समाज और यथार्थ

डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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नमन है मेरे गुरुवर -केवरा यदु मीरा

समाज और यथार्थ

डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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गुरु ईश्वर समतुल्य हैं

हिंदी कविता

भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

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गुरु ज्ञान का सागर

हिंदी कविता

भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

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शिक्षक के महत्व पर कविता

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भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

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गुरु महिमा – बासुदेव अग्रवाल नमन

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भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

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