हिंदी कविता

जुल्मी-अगहन

नारी जीवन और संवेदना

जुल्मी-अगहन जुलुम ढाये री सखी,अलबेला अगहन!शीत लहर की कर के सवारी,इतराये चौदहों भुवन!!धुंध की ओढ़नी ओढ़ के धरती,कुसुमन सेज सजाती।ओस बूंद नहा किरणें उषा की,दिवस मिलन सकुचाती। विश्मय सखी शरमाये रवि- वर,बहियां गहे न धरा दुल्हन!!जुलूम…..सूझे न मारग क्षितिज व्योम-पथ,लथपथ पड़े कुहासा। प्रकृति के लब कांपे-न बूझे,वाणी की परिभाषा।मन घबराये दुर्योग न हो कोई-  मनुज […]

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चेहरे पर कविता

हिंदी कविता

चेहरे पर कविता सुनोकुछ चेहरोंके भावों को पढ़नाचाहती हूॅपर नाकाम रहती हूॅ शायदखिलखिलाती धूप सीहॅसी उनकीझुर्रियों की सुन्दरताबढ़ते हैंपढ़ना चाहती हूॅउस सुन्दरता के पीछेएक किताबजिसमें कितनेगमों के अफसाने लिखे हैंना जाने कितने अरमान दबे हैंना जाने कितने फाँके लिखे हैं चेहरा जो अनुभव के तेजसे प्रकाशित सा दिखता हैउस तेज के पीछे छिपीरोजी के पीछे

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इन्तजार पर कविता

समाज और यथार्थ

इन्तजार पर कविता विसंगति छाई संसृति मेंकरदे समता का संचार।मुझे ,उन सबका इन्तजार…। जीवन की माँ ही है, रक्षकफिर कैसे बन जाती भक्षक ?फिर हत्या, हो कन्या भ्रूण की या कन्या नवजात की ।रक्षा करने अपनी संतान कीजो भरे माँ दुर्गा सा हुँकारमुझे, उस माँ का इन्तजार….। गली गली और मोड़ मोड़ परहोता शोषण छोर

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संस्कार पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

संस्कार पर कविता अहो,युधिष्ठिर हार गया है,दयूत् क्रीड़ा में नारी को,दुःसाशन भी खींच रहा है,संस्कारों की हर साड़ी को। अपनी लाज बचाने जनता,सिंहासन से भीड़ जाओ तुम,भीख नही अधिकार मांगने,कली काल से लड़ जाओ तुम,विपरित काल घोर कलयुग है,ना याद करो गिरधारी को। अहो,युधिष्ठिर….सदियों को संस्कार सिखाकर,हम अब तक सीना ताने हैं।अपनाओ न पाश्चात्य सभ्यता,रिश्ते

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क्यूँ झूठा प्यार दिखाते हो

हिंदी कविता

क्यूँ झूठा प्यार दिखाते हो क्यूँ  झूठा  प्यार  दिखाते  हो ….दिल  रह  रह  कर  तड़पाते  हो .. गैरों  से  हंसकर  मिलते  होबस  हम  से  ही  इतराते  हो घायल  करते  हो  जलवों  से …नज़रों  के  तीर  चलाते  हो … जब  प्यार  नहीं  इज़हार  नहीं …फिर  हम  को  क्यूँ  अज़माते  हो .. आ  जाओ हमारी  बांहों  में

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भारत का लाज बन जायें

हिंदी कविता

भारत का लाज बन जायें भारत का लाज बन जायें।मुल्क की नाज बन जायें।युग – युग अमर कहानेभारत का लाल बन जायें। प्रण करें करबद्ध चित,नित प्रतिदिन करते नमन।सदैव ही मेरे वतन का,इस धरा पर मैं लूँ जनम। प्रेम के हम राग बन जायें।मुल्क की नाज बन जायें। रक्षक बन तत्पर भीड़ पड़े,शत्रु के जब

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फरियादी हो (बेटी पर कविता)

नारी जीवन और संवेदना

फरियादी हो (बेटी पर कविता) आज कोख की बेटी ही,अब पूछे बन फरियादी हो। बिना दोष क्यों बना दिया है,मुझको ही अपराधी हो। ईश विधान जन्म मेरा फिर,तुम क्यों पाप कमाते हो।सुख दुःख का अनुमान लगा,हत्यारे बन जाते हो।आज कोख……। घर बगिया की  कोमल कलिका , मुझसे ही घर शोभित हो।अँगना में किलकारी मेरी,रिमझिम ध्वनि पग

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लबों पे है तेरा नाम

हिंदी कविता

लबों पे है तेरा नाम लब  पे नाम  तेरा सुमिरूँ मैं सुबह शाम मोहन  मेरे  श्याम । आँखों  में तुम बसे होसाँसों की माला  में ओ मोहन  बस तेरा ही  नाम । तुम जगत  नियंता भक्तों को प्यारे ।हे गोविन्द  मेरे यसुदा के  हो दुलारे । मैने  रचाई मेंहदी मोहना  तेरे  नाम । लबों पे है

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जीवन उथल पुथल कर देगा

हिंदी कविता

जीवन उथल पुथल कर देगा पल भर का सम्पूर्ण समागम ,जीवन उथल पुथल कर देगा।तुम चाहे जितना समझाओ,पर यह भाव विकल कर देगा। 1.आँखो  में  आँखो  की भाषा ,लिखना पढ़ना रोज जरा सा।सपनों  का   सतरंगी    होना,देख चाँद सुध बुध का खोना।थी अब तक जो बंद  पंखुडी,उसको फूल कवल कर देगा।तुम चाहे जितना समझाओ,पर यह भाव

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हिंदी हास्य कविता संग्रह (Hasya Kavita in Hindi)

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

Popular Hasya Kavita in Hindi: नमस्कार पाठकों , यहां पर हमने हिंदी हास्य कविता संग्रह की है। यह हिंदी हास्य कविता (Hindi Hasya Kavita) बहुत ही प्रसिद्ध कवियों द्वारा रचित है। उम्मीद करते हैं आपको यह हास्य कविता (hindi funny poem) पसंद आयेगी। इन्हें आगे शेयर जरूर करें। हिंदी हास्य कविता कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ प्रकृति बदलती क्षण-क्षण

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ये लहू है आँखों का कोई पानी नहीं है

हिंदी कविता

ये लहू है आँखों का कोई पानी नहीं है जज़्बातों की होगी ज़रूरत समझने को इसे लफ़्ज़ों से समझ जाए कोई ये वो कहानी नहीं हैये जो लग रहा है गिला सा आँख टूटे हुआ दिल काये लहू है आँखों का कोई पानी नहीं है छोड़ कर जाने का फ़ैसला जो कर लिया है तुमने

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वीर को नमन कर-हरिहरण घनाक्षरी

हिंदी कविता,

23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है और भारत में मनाया जाता है। इस दिन 1931 को तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। महात्मा गांधी की स्मृति में। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी के सम्मान में

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