हिंदी कविता

तितली पर बाल कविता

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तितली पर बाल कविता नीली पीली काली तितली।सुंदर पंखों वाली तितली।। आए-जाए फूलों पर ये,घूमे डाली-डाली तितली।। कुदरत ने कितने रंग भरे,लाड-चाव से पाली तितली।। फूल-फूल पर आती जाती,रहती है कब खाली तितली।। सब को खुशियां देने वाली,ऐसी है मतवाली तितली।। छूने से ये डर जाती है,नाजो-नखरे वाली तितली। -विनोद सिल्ला

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पशु पक्षियों की पाठशाला ( कविता )

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पशु पक्षियों की पाठशाला ( कविता ) सुबह हुई है देखो भाई,पशु पक्षियों ने कक्षा लगाई,कौवा बोला ‘क’ से मैं,कोयल बोली ‘क’ से मैं,कबूतर बोला ‘क’ से मैं,ख से मैं हूँ खरगोश,बोला सब हो जाओ खामोश,न करो तुम आपस में लड़ाई,हमने अपनी अपनी पहचान बनाई,‘ग’ से बोले गधे भाई,एकता में है शक्ति समाईइतने में आये

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मैंने चाहा तुमको हद से -मनीभाई

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मैंने चाहा तुमको हद से -मनीभाई मैंने चाहा तुमको हद से,कोई खता तो नहीं।मैंने मांगा मेरे राम सेकोई ज्यादा तो नहीं।तू समझे या ना समझेतू चाहे या ना मुझे चाहेइसमें कोई वादा तो नहीं। तेरी भोली बातें सुनूं,या देखूं ये निगाहेंकैसे संभालूं दिल को,कैसे छुपाऊं आहें।तेरे पास पास रहूं,तेरे साथ साथ चलूंइसकी कोई वजह तो

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मेरी जीवन यात्रा

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मेरी जीवन यात्रा मेरी ये यात्रामुट्ठी बंद शून्य सेअशून्य की ओर।जैसे ही नैन खुले,चाहिए खिलौने।और एक चमकता भोर। पाने की तलाश।जिसकी बुझे ना प्यास।ये कुछ पाना ही बंधन है ।पर जो मिल रहामन कैसे कह देसब धोखा है, उलझन है। ये जो घोंसला तिनकों कामेरी आंखो के सामने।जिसमें आराम है सुरक्षा है।ठंड में गरमऔर गर्म

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क्रिकेट पर कविता| POEM ON CRICKET IN HINDI

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हमारे देश में घर-घर में क्रिकेट मैच देखा जाता है क्रिकेट मैच के दौरान टीवी देखते वक्त घर का माहौल खास हो जाता है। पति पत्नि का नोक झोंक और क्रिकेट का वर्णन करती हुई मनीभाई का यह कविता जरूर पढ़िए। क्रिकेट पर कविता| POEM ON CRICKET IN HINDI क्रिकेट का खेल है, रोमांच से

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गाय पालन पर छत्तीसगढ़ी कविता

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गाय पालन पर छत्तीसगढ़ी कविता पैरा भूँसा ,कांदी-कचरा,कोठा कोंन सँवारे,हड़ही होगे ,बछिया कहिके रोजेच के धुत्कारे।। बगियाके बुधारू ,छोड़िस,गउधन आन खार।बांधे-छोरे जतने के,झंझट हे बेकार।। बछिया आगे शहर डहर अउपारा-पारा घुमय।कोनो देदे रोटी-भातलइका मन ह झुमय।। देखते-देखत बछिया संगीघोसघोस ले मोटागे।चिक्कन-देहें ,दिखन लागयमन सबके हरसागे।। आना होगे एक दिन संगीबुधारू के हाट।देख परिस ,बछिया ललालच

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हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कविता सच कहो,चाहे तख्त पलट दो, चाहे ताज बदल दोभले “साहब” गुस्सा हो, चाहे दुनिया इधर से उधर होतुम रहो या ना रहोपर, जब कुछ कहो तो, सच कहो। सच पर ही तो, न्याय टिका हैशासन खड़ा है, धर्म बना हैहे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ!सच से ही तुम होतो, अगर कुछ

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दीपावली पर कविता (Diwali kavita in hindi)

समाज और यथार्थ

का के राजा रावण का वध कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन पूरी अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा रही थी. भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या आगमन पर दिवाली मनाई गई थी. हर नगर हर गांव में दीपक जलाए गए थे. तब से लेकर

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करवा चौथ पर कविता

करवाचौथ पर हिंदी कविता

समय और जीवन दर्शन

करवाचौथ पर हिंदी कविता- करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मनाया जाने वाला पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सवेरे सूर्योदय से पहले लगभग 4 बजे से आरंभ होकर रात में चंद्रमा दर्शन के उपरांत संपूर्ण होता है।

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हिन्दी की महत्ता पर कविता

मन और भावनाएँ

हिन्दी की महत्ता पर कविता – मानव जाति अपने सृजन से ही स्वयं को अभिव्यक्त करने के तरह-तरह के माध्यम खोजती रही है। आपसी संकेतों के सहारे एक-दूसरे को समझने की ये कोशिशें अभिव्यक्ति के सर्वोच्च शिखर पर तब पहुँच गई जब भाषा का विकास हुआ। भाषा लोगों को आपस मे जोड़ने का सबसे सरल

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टेचराही….(व्यंग) दिन आगे कइसा

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टेचराही….(व्यंग) दिन आगे कइसा गोरर-गोरर केजिनगी सहीचलत हे नेट,महिना पुटभरे परथेभरे झन पेट। दु दिन आघुमटकत रहिथेआरो मोबाइल मफोन आथे छोकरी केकहिथे ,स्टाइल म। जल्दी भरवा लोआपके सेवाहो जाही बंद,कसके लेववफेसबुक, वाट्सअपके आनंद। मरताका न करतालगा थे जुगाड़,लइका केफीस पटे झन पटेहो भले आड़। मुड़ खुसारेनटेरे आँखीअंगरी चलत हे,निसा धरेलत परगेरात-दिन कलत हे। चुहक डरिसनेट

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जय जगदम्बे माँ पर कविता

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दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। जय जगदम्बे माँ पर कविता विंध्यवासिनी, पाप नाशनी जय जगदम्बे माँ |हे जग

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