हिंदी कविता

व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

कहानी सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी पर कविता

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कहानी सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी पर कविता हाँ मुंशी प्रेमचंद जी , साहित्यकार थे ऐसेमानवता की नस-नस को पहचान रहे हों जैसे। सन् अठ्ठारह सौ अस्सी में अंतिम हुई जुलाईतब जिला बनारस में ही लमही भी दिया सुनाईआनंदी और अजायब जी ने थी खुशी मनाईबेटे धनपत को पाया, सुग्गी ने पाया भाईफिर माता और पिता […]

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doha sangrah

शुभ्र शरद पूर्णिमा – बाबूलाल शर्मा

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शुभ्र शरद पूर्णिमा – बाबूलाल शर्मा शुभ्र शरद शुभ पूर्णिमा, लिए शीत संकेत।कर सोलह शृंगार दे, चंद्र प्रभा घर खेत।। दक्षिण पथ रवि रथ चले, शरद पूर्णिमा देख।कृषक फसल के बीज ले, हल से लिखे सुलेख। श्वाँस कास उपचार हित, खीर चाँदनी युक्त।उत्तम औषधि वैद्य दे, करे रोग से मुक्त।। सुधा बरसता चन्द्र से, कहते

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समझाये सबो मोला (छत्तीसगढ़ी गजल)

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पगला कहे दुनिया समझाये सबो मोला ।का तोर मया हे दिखलाये सबो मोला ।। मन मोर भरम जाये वो ही गोठ ला करथेंदुरिहा चले जावों भरमाये सबो मोला । मँगनी के मया नोहे मया हावे जनम केनिंदा करें सब झन बिचकाये सबो मोला । कइसे तोला छोड़ँव मर जाहूँ लगे अइसेअर्थी मा मढ़ाये अलगाये सबो

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कतको दीवाना हे (छत्तीसगढ़ी गजल)

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कतको दीवाना हे (छत्तीसगढ़ी गजल) किस्मत के सितारा हा चमक जाही लगत हे ।मन तोर दीवाना हे भटक जाही लगत हे ।। खुशबू ले भरे तन मा रथे मन घलो सुंदरतोर तीर जमाना ये जटक जाही लगत हे । कतको दीवाना हे अउ कतको अभी होहीकतको इहाँ फाँसी मा लटक जाही लगत हे । अब

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लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर कविता

समाज और यथार्थ

लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर कविता जयप्रकाश नारायण सिन्हा जी को हम तो,अपने जीवन के सपनों में सचमुच लाएँबने लोकनायक वे ऐसा ज्ञान दे गए,जिससे हम मानवता को फिर से पनपाएँ। छपरा जो बिहार में गाँव सिताब दियारा,अब उत्तर प्रदेश के बलिया में है न्याराग्यारह अक्टूबर को सन् उन्नीस सौ दो में,वहीं जन्म ले जो सबका

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mahatma gandhi

देख रहे हो बापूजी

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देख रहे हो बापूजी देख रहे हो बापूजी,कैसा है आपके सपनों का भारत।निज स्वार्थ सिद्ध करने हेतु,जन-जन ने प्राप्त कर ली है महारत। देख रहे हो बापूजी,गांवों की हालत आपसे क्या कहें।इतना विकास हुआ ग्राम्य अंचल का,कि अब गांव, गांव ना रहे। देख रहे हो बापूजी,आपकी खादी कितना बदनाम हो गई।गांधीगिरी का दामन छोड़कर,अब नेतागिरी

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भारत राष्ट्रपिता कहलाये धन्य

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भारत राष्ट्रपिता कहलाये धन्य सादा जीवन उच्च विचार अपनाये मानवतावादी।भारत राष्ट्रपिता कहलाये धन्य महात्मा गाँधी। २ अक्टुबर सन् १८६९ समय रहा सुखदाई।गुजरात के पोरबन्दर में जन्म आपने पाई।पिता कर्मचन्द्र गाँधी थे माता पुतली बाई।मोहनदास कर्मचन्द्रगाँधी पुरा नाम कहलाई। जीवन साथी डोर कस्तुरबा गाँधी के संग बांधी।भारत राष्ट्रपिता कहलाये धन्य महात्मा गाँधी। सत्यअहिंसा पाठ पढा़कर जन

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पाती एक लिखी है बापू के नाम

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पाती एक लिखी है बापू के नाम पाती एक लिखी है, हमने प्यारे बापू के नाम।सभांल के रखना इस देश को अब हमारा काम। सत्य अहिंसा की ज्वाला जो दिल में जलाई है।बुझने न दी हमने लौ को, आंधी तो खूब आई है।भेदभाव कभी न रखेंगे, कभी न करेंगे क्रोध।तेरे आदर्शों पर चलेंगे, न करेंगे

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mahatma gandhi

दोहा मुक्तक-बापू पर कविता

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दोहा मुक्तक-बापू पर कविता सदी वही उन्नीसवीं, उनहत्तर वीं साल।जन्मे मोहन दास जी, कर्म चंद के लाल।बढ़े पले गुजरात में, पढ़ लिख हुए जवान।अरु पत्नी कस्तूरबा, जीवन संगी ढाल। भारत ने जब ली पहन, गुलामियत जंजीर।थी अंग्रेज़ी क्रूरता, मरे वतन के वीर।हाल हुए बेहाल जब, कुचले जन आक्रोश।देख दशा व्याकुल हुए, गाँधी जी मति धीर।

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mahatma gandhi

बापू जी का ज्ञान

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बापू जी का ज्ञान देश के लिए जिन्होंने दिए हैं,अमूल्य योगदान,इसलिए हिन्दुस्तान को मिला है,अलग पहचान।भारतीयों को सत्य-अहिंसा,का पाठ-पढ़ाए,हिन्दुस्तान का संपूर्ण,संसार में मान बढ़ाए।हिंद के लिए,अपना सर्वस्व कर दिए कुर्बान,हिन्दुस्तान की पहचान,गांधी जी का ज्ञान। महात्मागांधी जी दया,अहिंसा,प्रेम के थे समंदर,2 अक्टूबर1869 को जन्मे,स्थान था पोरबंदर।परिवार में सदाचार-व्यवहार का डोर बांधी,बापू जी के पिताजी थे,श्री

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रावण दहन पर कविता

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किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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अब तो मन का रावण मारें

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किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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