कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मदिरा मंंदिर एक सा- रामनाथ साहू ” ननकी “

हिंदी कविता

मदिरा मंंदिर एक सा मदिरा का पर्याय है , माधव मोहन प्यार ।कभी कहीं उतरे नहीं , छके भरे रससार ।।छके भरे रससार , प्रेमरस पीले पगले ।क्या जाने कल वक्त , मिले या आगे अगले ।।कह ननकी कवि तुच्छ , पिया था जिसे कबिरा ।मदिरालय मन मस्त , पिये जा माधव मदिरा ।। मदिरा […]

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mahapurush

मेरे भारत देश है श्रेष्ठ गुणों की खान -मनोरमा चन्द्रा “रमा”

हिंदी कविता

मेरे भारत देश है श्रेष्ठ गुणों की खान -मनोरमा चन्द्रा “रमा” मन में अभिलाषा भरी, सभी बने विद्वान। मेरे भारत देश है, श्रेष्ठ गुणों की खान।। शांति नाद गूँजे सदा, सबका हो अरमान। सत्य, अहिंसा मार्ग चल, वही श्रेष्ठतम जान।। रंग भेद को तज चलें, रखें मनुज समभाव। श्रेष्ठ कर्म नित कर चलो, रिश्ते लगे

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द्वादश ज्योतिर्लिंग

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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हरियाली अमावस्या आज

प्रकृति और पर्यावरण

श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। देश के कई भागों विशेषकर उत्तर भारत में इसे एक धार्मिक पर्व के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाया जाता है।

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किसान (कुण्डलिया)-मदन सिंह शेखावत

हिंदी कविता

किसान (कुण्डलिया) खेती खुशियो की करे, बोए प्रेम प्रतीत।निपजाता मोती बहुत, सुन्दर आज अतीत।सुन्दर आज अतीत,पेट कब वह भर पाता।हालत बहुत खराब, दीन है अन्न प्रदाता।कहे मदन करजोर, ध्यान कृषकों का देती।होता वह सम्पन्न, करे खुशियो की खेती।। मदन सिंह शेखावत ढोढसर

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10 दिसम्बर विश्व मानवाधिकार दिवस पर विशेष लेख

समाज और यथार्थ, ,

10 दिसम्बर विश्व मानवाधिकार दिवस रहे सब धर्मों की बस यही पुकार। भेदभाव अंत हो, मिले मानवाधिकार। – मनीभाई नवरत्न प्रत्येक मानव , चाहे वह किसी भी धर्म, लिंग, जाति स्तर या फिर किसी भी देश का हो वह जन्म से बराबर एवं स्वतंत्र है । एक मनुष्य का जीवन तभी सफल है, जब उसे

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किसान पर दोहे -डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

हिंदी कविता

किसान पर दोहे धरती पुत्र किसान का , मत करना अपमान।जो करता सुरभित धरा,उपजाकर धन धान।। कॄषक सभी दुख पीर में , आज रहे है टूट।करते रहे बिचौलिए , इनसे निसदिन लूट।। रत्ती भर जिनको नही,फसल उपज का ज्ञान।वे अयोग्य रचने लगे , अब तो खेत विधान।। आंदोलन के नाम पर , डटे कृषक दिन

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लाचार शिक्षण- रमेश शर्मा

हिंदी कविता

लाचार शिक्षण शिक्षण में कोरोना बैठा,ऐसा भय दिखलाते हैं।बिना मास्क रैली धरनों को,रोक नहीं ये पातें हैं।। बिना परीक्षा पास न होंगे,ये आदेश सुनाया है।पढ़ना और पढ़ाना केवल,आनलाईन ही आया है।।बिना पढ़े गृह कार्य कराना,नासमझी की बातें हैं।।शिक्षण में कोरोना वैठा,ऐसा भय दिखलाते है।। छुपकर शिक्षक लगे पढ़ाने,घर अभ्यास बहाना है।गुरू शिष्य ऐसे मिलते हैं,जैसे

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भारतीय नौ सेना- मधु गुप्ता “महक”

हिंदी कविता

भारतीय नौ सेना प्रखर ओजस्वी नौजवानों,सुरक्षित है तुमसे वतन।विजयी तिरंगा फहराने वाले,जल सेना तुमको है नमन।विजय तिरंगा…………. प्रहरी सामुद्रिक सीमा के,देश की रक्षा तुमसे है।तोड़ के सारे कुचक्रों को,हर घर की खुशियाँ तुमसे है।जल के वीर जवानों सुन लो,मुस्काता है देश रूपी चमनविजयी तिरंगा…………… सरहद पर रहने वाले वीर,जब जब देश में युद्ध छीड़ी।सागर के

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