मनीभाई नवरत्न की कविता

मनीभाई नवरत्न के हिंदी में चोंका

नारी जीवन और संवेदना

यहाँ पर हम आपको मनीभाई नवरत्न के हिंदी में चोंका प्रस्तुत कर रहे हैं यदि आपको पसंद आई हो या कोई सुझाव हो तो नीचे कमेंट जरुर करें हिंदी में चोंका इसे भी पढ़ें :- चोका कैसे लिखें(How to write Choka ) चोका :- शीत प्रकोप धुंधला भोरकुंहरा चहुं ओरकुछ तो जलाजाने क्या हुई बलाक्या […]

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खुद को है -मनीभाई ‘नवरत्न’

हिंदी कविता

यहाँ पर मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित खुद को है आप पढ़ेंगे आशा आपको यह पसंद आएगी खुद पर कविता -मनीभाई ‘नवरत्न’ खुद को है जिन्दगी के हरेक  दंगल में …लड़ना खुद को है।   भिड़ना खुद को है।  टुटना खुद को है।  जुड़ना खुद को है। ये वक्त,बेवक्त माँगती हैं कुर्बानियाँ…  बिखरना खुद को है।  सिसकना

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मशाल की मंजिल – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मशाल की मंजिल – मनीभाई नवरत्न मशाल की मंजिल :-रचनाकार:- मनीभाई नवरत्नरचनाकाल :- 16 नवम्बर 2020 ज्ञानसतत विकासशीललगनशील,है जिद्दी वैज्ञानिक Iवह पीढ़ी दर पीढ़ीबढ़ा रहा अपना आकार Iवह कल्पना करतासिद्धांत बनाता स्वयंमेवउसकी प्रयोगशाला ये दुनिया।हम क्या ?बोतल में भरी रसायनया फिर बिखरी हुई मॉडलदीवाल में झूलता हुआ,कंकाल तंत्र सदृश। वो हमें परखता,देखता।हम पर घटित प्रतिक्रियाओं

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अब नहीं सजाऊंगा मेला

हिंदी कविता

अब नहीं सजाऊंगा मेला अक्सर खुद कोसाबित करने के लिएहोना पड़ता है सामने . मुलजिम की भांति दलील पर दलील देनी पड़ती है . फिर भी सामने खड़ा व्यक्तिवही सुनता है ,जो वह सुनना चाहता है .हम उसके अभेद कानों के पार जाना चाहते हैं .उतर जाना चाहते हैंउसके मस्तिष्क पटल पर बजाय ये सोचे

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तम्बाकू निषेध दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ,

तम्बाकू निषेध दिवस पर कविता नशा मत करना,नशा है मृत्य समान,तम्बाकू ने ली असमय मानव जान। शौक- शौक में तम्बाकू खाने लगा अनजान,शरीर खोखला करने लगा,मन मंदिर हुआ वीरान। धीरे धीरे सामने आए,तम्बाकू के दुष्परिणाम,डॉक्टर के पास जाना पड़ा,हुआ गलती का भान। फिर कसम खाई मैंने,छोड़ दिया नशे का साथ,तम्बाकू मुक्त हो गया,मेरा भारत महान।।

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काँटों पर चलना सीखे – मनीभाई नवरतन

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अब काँटों पर चलना सीखें अब तक सुमनों पर चलते थे, अब काँटों पर चलना सीखें॥खड़ा हुआ है अटल हिमालय, दृढ़ता का नित पाठ पढ़ाता।। बहो निरन्तर ध्येय-सिन्धु तक, सरिता का जल-कण बतलाता।अपने दृढ़ निश्चय से पथ की, बाधाओं को ढहना सीखें। अब…… हममें चपला-सी चंचलता, हममें मेघों की गर्जन।हममें पूर्ण चन्द्रमा-चुम्बी, सिन्धु-तरंगों का नर्तन

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प्रायश्चित- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

प्रायश्चित- मनीभाई नवरत्न हम करते जाते हैं कामवही जो करते आये हैंया फिर वो ,जो अब हमारे शरीर के लिएहै जरूरी। इस दरमियानकभी जो चोट लगेया हो जाये गलतियां।तो पछतावा होता है मन मेंजागता है प्रायश्चित भाव। वैसे सब चाहते हैंगलतियां ना दोहराएं जाएं।सब पक्ष में हैंसामाजिक विकास अग्रसर हो।गम के बादल तले,सुखों का सफर

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हाय यह क्या हो गया?- मनीभाई नवरत्न

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हाय यह क्या हो गया? हाय यह क्या हो गया?महाभारत हो गया ।हुआ कैसे?एकमात्र दुर्योधन से!किसका बेटा ?अंधे धृतराष्ट्र का!पट्टी लगाई आंखों मेंपतिव्रता गांधारी का।शायद कम गई दृष्टि इनकी,उद्दंडता जो दुर्योधन ने की । असल कसूरवार कौन?जिसने दुर्योधन को गढ़ा।जीवन के महत्वपूर्ण घड़ियों में ,जो सारे बुरे सबक को पढ़ा ।दोषी वे सारे व्यवस्था हैं

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ये तो बस मूर्खों की पीढ़ी बनायेगा

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ये तो बस मूर्खों की पीढ़ी बनायेगा ये जानता नहीं अपनी मंजिल,  लक्ष्य के लिए कैसे सीढ़ी बनायेगा ?मूर्ख बनाने में शातिर महाप्रभु, ये तो बस मूर्खों की पीढ़ी बनायेगा ।। इसे स्वयं को जो भी अच्छा लगे, उसे सत्य मान लेता है।स्वयं को सच्चा परम ज्ञानी, दूसरों को झूठा जान लेता है।सच झूठ का

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बेखुदी की जिंदगी- मनीभाई नवरत्न

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बेखुदी की जिंदगी… बेखुदी की जिंदगी हम जिया करते हैं। शायद इसलिए हम पिया करते हैं । रही सही उम्मीदें तुझ पर अब जाती रही।ना समझ बन गए हैं कोई सोच आती नहीं ।मिली तुझसे जख्मों को हम सीया करते हैं । बेखुदी की जिंदगी… बेशुमार दौलत क्या? हमको पता नहीं ।बेपनाह मोहब्बत क्या ?तुमको

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मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं- मनीभाई नवरत्न

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मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं।तुमसे हुए हर मुलाकातें सताते हैं ।क्यों उस दिन अनजान रहा ,तेरे चाहत का ना भान रहा ।अब जब पता है तू ही लापता है , कैसे मिलू तुझे?सोचकर हम घबराते हैं।मुझे तेरी हर बातें …. बीते कल में चेहरा तेरा खोजू,आजकल

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