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~दोहा

दोहा अर्द्धसम मात्रिक छंद है। यह दो पंक्ति का होता है इसमें चार चरण माने जाते हैं | इसके विषम चरणों (प्रथम तथा तृतीय) में १३-१३ मात्राएँ और सम चरणों (द्वितीय तथा चतुर्थ) में ११-११ मात्राएँ होती हैं।
Doha is a semantic verse. It is of two lines, it consists of four steps. Its odd phases (first and third) have 13–13 quantities and even phases (second and fourth) have 11–11 quantities.

रक्षाबन्धन पर दोहे

रक्षाबन्धन पर दोहे १.🌼रिश्तों का  अनुबन्ध शुभ, रक्षा बन्धन पर्व।सनातनी शुभ रीतियाँ, उत्तम संस्कृति गर्व।।२.🌼पूनम सावन  मास  में, राखी  का त्योहार।भाई का  रक्षा  वचन, हर्षे  बहिन  अपार।।३.🌼विष्णु पत्नि लक्ष्मी शुभे, वे नारद मुनि रंग ।बलि को राखी भेजकर, लाई  हरि हर संग।।४.🌼रीति सनातन काल से, बंधु बहिन का प्यार।सांसारिक शुभ रीति यह, परिवारी…
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बछ बारस पर कविता – दोहा छंद

बछ बारस पर कविता - दोहा छंद hindi doha || हिंदी दोहा बछ बारस सम्मानिए, गौ बछड़े की मात।मिटे पाप संताप तन, दैव प्रमाणित बात।।पावस सावन में मनें, बछ बारस का पर्व।गौ सेवा कर नर मिले, मेवा मंगल गर्व।।भिगो मोठ को लीजिए, उत्तम यह आहार।गौ को मीठे में खिला, बछ बारस व्यवहार।।गौ माताएँ हिन्द हित, बछ सौभाग्य किसान।बछ बारस पर दीजिए, इन्हे…
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मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान में दोहा छंद

आ.मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान म़े सादर समर्पित मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान में दोहा छंद Premchand प्रेम चन्द साहित्य में , भारत की त़सवीर।निर्धन,दीन अनाथ की,लिखी किसानी पीर।।सामाजिकी विडंबना , फैली रीति कुरीति।चली सर्व हित लेखनी, रची न झूठी प्रीत।।गाँव खेत खलिहान सब,ठकुर सुहाती मान।गुरबत में ईमान का , पाठ लिखा गोदान।।बूढ़ी काकी…
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बनिए गुरु तब मीत -बाबू लाल शर्मा बौहरा विज्ञ

बनिए गुरु तब मीत द्रोण सरीखे गुरु बनो,भली निभाओ रीत। नहीं अँगूठा माँगना, एकलव्य से मीत।।एकलव्य की बात से, धूमिल द्रोण समाज।कारण जो भी थे रहे, बहस न करिए आज।।परशुराम से गुरु बनो, विद्यावान प्रचंड।कीर्ति सदा भू पर रहे, हरिसन तजे घमंड।।गुरु चाणक्य समान ही,कर शासक निर्माण।अमर बनो स्व राष्ट्रहित, कर काया निर्वाण।।वालमीकि से धीर हो, सिय…
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प्लास्टिक मुक्त दिवस पर दोहे-अंचल

आज प्लास्टिक ने हमारे पर्यावरण के लिए बहुत खतरा पैदा कर दिया है। तो जनजागृति हेतु यहां पर प्लास्टिक मुक्त दिवस पर दोहे दिया गया है प्लास्टिक मुक्त दिवस पर दोहे पन्नी की उपयोगिता,करें बन्द तत्काल।खतरा जीवन के लिए,जीना करे मुहाल।। धीमा विष है जगत में ,सेहत करे प्रभाव।आओ इनसे सब करें,रिस्ता खत्म लगाव।। जहर धुँआ में व्याप्त है, करे गात…
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भोजन पर दोहे का संकलन

15 जून 2022 को साहित रा सिंणगार साहित्य ग्रुप के संरक्षक बाबूलाल शर्मा 'विज्ञ' और संचालक व समीक्षक गोपाल सौम्य सरल द्वारा " भोजन " विषय पर दोहा छंद कविता आमंत्रित किया गया जिसमें से भोजन पर बेहतरीन दोहे चयनित किया गया। जो कि इस प्रकार हैं- भोजन पर दोहे का संकलन मदन सिंह शेखावत के दोहे सादा भोजन कर सदा, करे परहेज तेल।पेट रहे आराम…
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महादेवी वर्मा पर कविता- बाबूलाल शर्मा

प्रस्तुत कविता हिंदी साहित्य के विख्यात छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा पर लिखी गई है ।जिसके रचयिता बाबूलाल शर्मा जी हैं ।आपने दोहे छंद पर यह कविता लिखी है।
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गाँधी की जरूरत -पद्मा साहू “पर्वणी”

गाँधी की जरूरत -पद्मा साहू "पर्वणी" पदमा साहू "पर्वणी" के दोहेखैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़ गाँधी की जरूरत -पद्मा साहू "पर्वणी" "पुनः जरूरत देश को, गाँधी तेरी आज।"*सत्य अहिंसा सादगी, ब्रम्हचर्य विश्वास।आत्म शुद्धि व्यवहार है, गाँधी जीवन खास।।गाँधी के सिद्धांत यह, परम धर्म हो धेय।जीवन शाकाहार हो,ध्यान धरो अस्तेय।।महा प्रणेता देश के,…
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