माँ का मन शुचि गंगाजल है –  बाबूराम सिंह

कविता  माँ का मन शुचि गंगाजल है--------------------------------------     सकल जगत की धोती मल है।माँ का मन सुचि  गंगाजल  है।।हित - मित   संसार  में   स्वार्थ,भ्राता,पत्नि  के प्यार में स्वार्थ।बेटा - बेटी …

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बाल कवित सांझ सबेरे तेरी – सन्त राम सलाम

बाल कवित सांझ सबेरे तेरी - सन्त राम सलाम सांझ सबेरे तेरी,,,,,,,,राह निहारूं माई,,,,,,,,,मुझे छोड़-छोड़ मां तू, कहां चली जाती है।पलना कठोर भारी,,,,,,,लगता बड़ा जोर है,,,,,,,,,,,रोज-रोज आते ही मुझे, बांहों…

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