KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

अमर शहीद कहाते हैं (amar shahid kahate hai)

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        *लावणी छंद विधान*
१६+१४ मात्रा चरणांत गुरु २
—   दो दो पद सम तुकांत ,
—    चार चरणीय छंद
.   —   मापनी रहित
.         *अमर शहीद*
.        
आजादी के हित नायक थे,
.        उनको शीश झुकाते हैं।
भगत सिह सुखदेव राजगुरु,
.         अमर शहीद कहातें हैं।
*भगतसिंह* तो बीज मंत्र सम,
.          जीवित है अरमानों में।
भारत भरत व भगतसिंह को,
.            गिनते है सम्मानों में।
*राजगुरू* आदर्श हमारे,
.          नव पीढ़ी की थाती है।
इंकलाब की ज्योति जलाती,
.         दीपक  वाली  बाती है।
*सुख देव* बसे हर बच्चे में,
.          मात भारती चाहत है।
जब तक इनका नाम रहेगा,
.         अमर तिरंगा भारत है।
जिनकी गूँज सुनाई देती,
.          अंग्रेज़ों की छाती में।
वे हूंकार लिखे हम भेजें,
.          वीर शहीदी पाती में।
इन्द्रधनुष के रंग बने वे,
.          आजादी के परवाने।
उन बेटों को याद रखें हम,
.        वीर शहादत सनमाने।
याद बसी हैं इन बेटों की,
.          भारत माँ की यादों में।
बोल सुनाई देते अब भी,
.            इंकलाब के नादों में।
तस्वीरों को देख आज भी,
.            सीने  फूले  जाते हैं।
उनके देशप्रेम के वादे,
.       सैनिक आन निभाते हैं।
वीर शहीदी परंपरा को,
.        उनकी  याद  निभाएँगे।
शीश कटे तो कटे हमारे,
.       ध्वज का मान  बढ़ाएँगे।
श्रद्धांजलि हो यही हमारी,
           भारत माँ के पूतों को।
याद रखें पीढ़ी दर पीढ़ी,
.          सच्चे  वीर सपूतों को।
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✍©
बाबू लाल शर्मा,”बौहरा”
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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