KAVITA BAHAR
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आखिर हम मजदूर है- कविता, महदीप जंघेल

मजदूर विश्व निर्माता है। संसार में उसके बिना विकास कार्य संभव नहीं है। मजदूर श्रम के पुजारी है। उन्हें मेरा नमन है।

आखिर हम मजदूर है (मजदूर दिवस)
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विधा -कविता

हम मजदूर है,
मजदूरी हमारा काम।
पत्थर से तेल निकाला हमने,
नही हमेआराम।
कंधे अड़ा दे, तो
हर काम बन जाए,
हाथ लगा दे,तो
बड़ा नाम बन जाए।
मेहनत मजूरी हम करते,
बड़े से बड़ा काम होता है।
पसीने की बूंद हम टपकाते,
औरों का नाम होता है।
सड़क पुल हमने बनाया,
दुनिया को हमने सजाया।
हमे सिर्फ मेहनत मजूरी मिली,
इनाम और नाम किसी और ने पाया।
दुनिया का हर कार्य हमने किया,
विकास का पथ हमने दिया।
हर कार्य में कंधे लगाया,
नाम दाम किसी और ने पाया।
मेहनत पूरी की, फिर भी
वजूद नही,आखिर हम मजदूर है।
रोज खाने रोज कमाने को ,
आखिर हम मजबूर है।
बडा घर ,बड़ा महल बनाया,
जीते जी कभी न रह पाया।
झुग्गी झोपड़ी में रहने को ,
हम मजबूर है।
आखिर हम एक मजदूर है।
हमने सब कुछ किया,
अपना जीवन समर्पित किया।
विश्व की प्रगति हेतू,
तन मन अर्पित किया।
हम एक मजदूर,
झोपड़ी में रहने को मजबूर।
न कोई सुविधा न कोई राहत,
आखिर हम एक मजदूर।
न कोई गम ,न कोई दुःख,
हम साहसी और मजबूत है।
हमारी मेहनत से ये दुनिया टिका है,
लाचार नही ,
हम मेहनतकश मजदूर है।

📝महदीप जंघेल
खमतराई,खैरागढ़

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