KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

करवा चौथ-डॉ.सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप” (karwa chouth)

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करवा चौथ-(विधा-चौपाई छन्द)


कार्तिक चौथ घड़ी शुभ आयी। सकल सुहागन मन हरसायी।।
पर्व पिया हित सभी मनाती। चंद्रोदय उपवास निभाती।।
करवे की महत्ता है भारी। सज-धज कर पूजे हर नारी।।
सदा सुहागन का वर हिय में। ईश्वर दिखते अपने पिय में।।
जीवनधन पिय को ही माना। जनम-जनम तक साथ निभाना।।
कर सौलह श्रृंगार लुभाती। बाधाओं को दूर भगाती।।
माँग भरी सिंदूर बताती। पिया हमारा ताज जताती।।
बुरी नजर को दूर भगाती। काजल-टीका नार लगाती।।
गजरे की खुशबू से महके। घर-आँगन खुशियों से चहके।।
सुख-दुख के साथी बन जीना। कहता मुँदरी जड़ा नगीना।।
साड़ी की शोभा है न्यारी। लगती सबसे उसमें प्यारी।।
बिछिया पायल जोड़े ऐसे। सात जनम के साथी जैसे।।
प्रथा पुरानी सदियों से है। रहती लक्ष्मी नारी में है।।
नारी शोभा घर की होती। मिटकर भी सम्मान न खोती।।
चाहे स्नेह सदा अपनों से। जाना नारी के सपनों से।।
प्रेम भरा संदेशा देता। पर्व दुखों को है हर लेता।।
उर अति प्रेम पिरोये गहने। सारी बहनें मिलकर पहने।।
होगा चाँद गगन पर जब तक। करवा चौथ मनेगी तब तक।।
डॉ.सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप”
तिनसुकिया, असम
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